लाओस के उप-प्रधानमंत्री थोंगसावन फोमविहाने ने आगरा में ताजमहल का दौरा किया, भारत-लाओस JCM की 10वीं बैठक आज
सारांश
मुख्य बातें
लाओस के उप-प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री थोंगसावन फोमविहाने और उनकी पत्नी वदस्ना फोमविहाने ने मंगलवार, 2 जून को उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित विश्व-प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारक ताजमहल का भ्रमण किया। फोमविहाने सोमवार को तीन दिवसीय आधिकारिक भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुँचे थे। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और लाओस अपने राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे कर रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर फोमविहाने का स्वागत करते हुए लिखा, 'लाओ पीडीआर के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री थोंगसावन फोमविहाने का भारत में प्रथम आगमन पर हार्दिक स्वागत है, वे विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ भारत-लाओस संयुक्त आयोग की 10वीं बैठक की सह-अध्यक्षता करेंगे।' जायसवाल ने यह भी रेखांकित किया कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को नई गति देगी।
बुधवार का कार्यक्रम
बुधवार, 3 जून को फोमविहाने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ भारत-लाओस संयुक्त आयोग (JCM) की 10वीं बैठक की सह-अध्यक्षता करेंगे। इसके अलावा वे भारत-लाओस बिजनेस फोरम में भी भाग लेंगे और तत्पश्चात राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करेंगे। गौरतलब है कि इससे पहले 9वीं JCM बैठक 2018 में वियनतियाने में आयोजित हुई थी।
भारत-लाओस संबंधों की पृष्ठभूमि
भारत और लाओस के बीच राजनयिक संबंध 1956 में स्थापित हुए थे। दोनों देशों के बीच बौद्ध धर्म और रामायण (रामकियेन) जैसी साझा सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से सभ्यतागत जुड़ाव सदियों पुराना है। संस्थागत परामर्श तंत्रों में विदेश कार्यालय परामर्श (FOC) और संयुक्त आयोग बैठक शामिल हैं — तीसरा FOC 2023 में वियनतियाने में आयोजित हुआ था।
मोदी-सिसोलिथ मुलाकात का संदर्भ
पिछले वर्ष अगस्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान लाओस के राष्ट्रपति थोंगलून सिसोलिथ से भेंट की थी। उस मुलाकात के बाद मोदी ने एक्स पर लिखा था, 'राष्ट्रपति सिसोलिथ से मिलकर हर्ष की अनुभूति हुई। दोनों देशों के बीच का गहरा रिश्ता हमारे लिए लाभदायी है, ये संबंध ट्रेड से लेकर कल्चर तक में परिलक्षित होता है।' फोमविहाने की यह यात्रा उसी द्विपक्षीय संवाद की अगली कड़ी मानी जा रही है।
आगे की राह
JCM की 10वीं बैठक में व्यापार, निवेश, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय संपर्क जैसे विषयों पर चर्चा अपेक्षित है। राजनयिक संबंधों की सात दशक की यात्रा को देखते हुए यह बैठक दोनों देशों के लिए सहयोग के नए क्षेत्र तय करने का अवसर प्रदान करती है।