लाओस के उप PM थोंगसावन फोमविहाने की राष्ट्रपति मुर्मु से मुलाकात, 70वीं वर्षगांठ पर रिश्तों को नई धार
सारांश
मुख्य बातें
लाओ जनवादी लोकतांत्रिक गणराज्य के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री थोंगसावन फोमविहाने ने बुधवार, 3 जून को राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। यह फोमविहाने की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है, और यह उस वर्ष में हो रही है जब दोनों देश राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ मना रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
राष्ट्रपति मुर्मु ने लाओस के उप प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और लाओ जनवादी लोकतांत्रिक गणराज्य के बीच गहरे सभ्यतागत संबंध हैं, जो बौद्ध धर्म और रामायण की साझा विरासत से प्रतिबिंबित होते हैं। उन्होंने राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ को द्विपक्षीय रिश्तों का एक महत्वपूर्ण सोपान बताया।
मोदी की 2024 यात्रा का संदर्भ
राष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्टूबर 2024 में आसियान से जुड़े शिखर सम्मेलनों में भाग लेने के लिए लाओस गए थे। उस यात्रा के दौरान कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, जिनसे, उनके शब्दों में, द्विपक्षीय सहयोग को ‘नई गति’ मिली।
व्यापार और निवेश की संभावनाएँ
मुर्मु ने कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़ा है, लेकिन व्यापार और निवेश दोनों क्षेत्रों में आगे और प्रगति की पर्याप्त संभावनाएँ अब भी मौजूद हैं। उन्होंने सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT), स्वास्थ्य, मेडिसिन, कृषि, सिंचाई, विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युत जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई। राष्ट्रपति ने जोड़ा कि भारत नवाचार और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में भी अपने अनुभव साझा करने को तत्पर है।
विकास साझेदारी और युवा
राष्ट्रपति ने यह जानने पर प्रसन्नता जताई कि दोनों देशों के बीच विकास साझेदारी और सुदृढ़ हुई है। उन्होंने रेखांकित किया कि यह साझेदारी लाओस के युवाओं की आकांक्षाओं और देश की सामाजिक-आर्थिक विकास आवश्यकताओं पर केंद्रित है।
क्या होगा आगे
दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि घनिष्ठ सहयोग से दोनों देशों के लोगों को व्यापक लाभ पहुँच सकता है। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत आसियान क्षेत्र में अपनी ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को नया विस्तार दे रहा है, और मेकांग उप-क्षेत्र में चीन की बढ़ती उपस्थिति के बीच लाओस के साथ रणनीतिक संवाद का महत्व बढ़ा है।