भारत वैश्विक ताकत बनने की पूरी क्षमता रखता है, यूरोप का भरोसेमंद साझेदार: वोल्फगैंग इस्चिंगर
सारांश
मुख्य बातें
म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन और राजदूत वोल्फगैंग इस्चिंगर ने 5 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत केवल एक 'मिडिल पावर' नहीं, बल्कि वैश्विक ताकत बनने की पूरी क्षमता रखने वाला देश है — और यूरोप के लिए यह एक भरोसेमंद एवं सुरक्षित रणनीतिक साझेदार है। म्यूनिख लीडर्स मीटिंग के दौरान दिए गए इस बयान ने भारत-यूरोप संबंधों की बदलती दिशा को रेखांकित किया।
मिडिल पावर्स की बहस में भारत की अलग पहचान
इस्चिंगर ने कहा कि कनाडा के प्रधानमंत्री ने इस वर्ष की शुरुआत में 'मिडिल पावर्स' देशों की भूमिका पर जो चर्चा शुरू की थी, वह अत्यंत दिलचस्प है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में दो दिन चली म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में इस विषय पर गहराई से विचार-विमर्श हुआ। उनके अनुसार, इस पूरी चर्चा में भारत की भूमिका निश्चित रूप से विशिष्ट और अलग है।
उन्होंने जोर देकर कहा, 'भारत में वैश्विक ताकत बनने की पूरी क्षमता है — शायद भारत पहले से ही एक वैश्विक ताकत है।' इसके पीछे उन्होंने भारत की विशाल जनसंख्या, बड़ी और बढ़ती अर्थव्यवस्था, और शिक्षित युवा आबादी की प्रचंड क्षमता को प्रमुख कारण बताया।
यूरोप के लिए भरोसेमंद साझेदार
इस्चिंगर ने कहा कि यूरोप के लिए यह एक सुखद स्थिति है कि उसके पास भारत जैसा साझेदार है, जो अन्य कुछ वैश्विक साझेदारों की तुलना में 'अधिक भरोसेमंद' साबित हो सकता है। उन्होंने कहा, 'आज दुनिया जिस उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है, उसमें भरोसेमंद और सुरक्षित साझेदारों का होना जरूरी है — और भारत में ये सभी खूबियाँ मौजूद हैं।'
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब यूरोप अमेरिका के साथ अपने संबंधों में अनिश्चितता महसूस कर रहा है, और भारत-यूरोपीय संघ के बीच हाल ही में मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत आगे बढ़ी है।
भारत-यूरोप रणनीतिक साझेदारी की संभावना
इस्चिंगर के अनुसार, भारत और यूरोप न केवल अपने आर्थिक संबंधों को और मज़बूत करने की स्थिति में हैं, बल्कि हाल के मुक्त व्यापार समझौते के आधार पर एक 'व्यापक और मजबूत रणनीतिक साझेदारी' की ओर भी बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि यही भविष्य है, और यह भविष्य काफी उज्ज्वल है।'
यह ऐसे समय में आया है जब यूरोपीय देश अपनी विदेश नीति में विविधता लाने और एकल-देश निर्भरता कम करने की रणनीति अपना रहे हैं।
अमेरिका पर निर्भरता घटाने की रणनीति
इस्चिंगर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हाल के वर्षों में अमेरिका यूरोप के लिए उतना भरोसेमंद साझेदार नहीं रहा। उन्होंने कहा कि अमेरिका में कुछ ही हफ्तों में होने वाले चुनावों को देखते हुए, जर्मनी और यूरोप के लिए यह जरूरी है कि वे अमेरिका के साथ अपने संबंधों को यथासंभव मज़बूत बनाए रखें — लेकिन साथ ही 'जोखिम विविधीकरण' की नीति पर चलें।
उन्होंने कहा, 'हम पूरी तरह किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहते। इसीलिए हम दुनिया के दूसरे देशों के साथ साझेदारी बढ़ाने की संभावनाएँ तलाश रहे हैं' — और इस संदर्भ में उन्होंने भारत को एक 'बेहद उम्मीद भरा साझेदार' बताया।
आगे की संभावनाएँ
म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में हुई इन चर्चाओं से यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में भारत-यूरोप संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि सुरक्षा, तकनीक और भू-राजनीतिक समन्वय के क्षेत्र में भी गहरे होंगे। इस्चिंगर का यह बयान यूरोपीय रणनीतिक समुदाय में भारत की बढ़ती साख का प्रमाण है।