कनाडा में खालिस्तान जनमत संग्रह की योजना पर भारत सख्त, MEA ने की कड़ी निंदा
सारांश
मुख्य बातें
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को कनाडा में प्रस्तावित तथाकथित 'खालिस्तान जनमत संग्रह' की कड़ी निंदा की। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में आयोजित साप्ताहिक प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि भारत सभी भारत-विरोधी गतिविधियों को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करेगा। यह प्रतिक्रिया उन रिपोर्टों के बाद सामने आई है जिनमें दावा किया गया है कि प्रतिबंधित संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) 18 अक्टूबर को कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में इस तथाकथित जनमत संग्रह का आयोजन करने की योजना बना रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
नई दिल्ली में MEA की नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से कनाडा में प्रस्तावित खालिस्तानी कार्यक्रम पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, 'हम सभी भारत-विरोधी गतिविधियों की कड़ी निंदा करते हैं।' यह बयान भारत की उस सुस्थापित नीति की पुनरावृत्ति है जिसके तहत वह विदेशी धरती पर पनपने वाले अलगाववादी आंदोलनों को सिरे से खारिज करता रहा है।
गौरतलब है कि SFJ भारत में प्रतिबंधित संगठन है, और इसके कथित संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू को भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ आतंकवादी घोषित कर चुकी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-कनाडा संबंध पहले से ही तनावपूर्ण दौर से गुज़र रहे हैं।
पन्नू के कथित बयान और प्रशिक्षण वीडियो
अगस्त 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, पन्नू ने कथित तौर पर 'खालिस्तान आर्मी' और 'सिख होमलैंड सिक्योरिटी' बल बनाने की घोषणा की थी। उक्त रिपोर्ट में कनाडा की धरती पर सिख युवाओं को अर्ध-स्वचालित राइफलों के साथ प्रशिक्षण लेते दिखाने वाले वीडियो का उल्लेख किया गया, जिसे रिपोर्ट में 'बेहद चिंताजनक' बताया गया।
'खालसा वॉक्स' की एक रिपोर्ट के अनुसार, पन्नू ने एक वीडियो के ज़रिए प्रवासी सिखों से अमेरिका के इंडियाना राज्य की राजधानी इंडियानापोलिस में आयोजित तथाकथित खालिस्तान जनमत संग्रह में भाग लेने की अपील की थी।
युवाओं पर असर और सामुदायिक चिंताएँ
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ये गतिविधियाँ 'केवल राजनीतिक बहसें नहीं हैं, बल्कि सोच-समझकर किए गए ऐसे उकसावे हैं, जिनका लक्ष्य वे युवा हैं जो प्रवास, पहचान और आर्थिक दबावों से जूझ रहे हैं।' रिपोर्ट के अनुसार, इसका नतीजा यह है कि अमेरिका और कनाडा में सिख युवाओं का एक छोटा वर्ग नशे, अवैध हथियारों और गैंग संस्कृति की ओर खिंच रहा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पन्नू के संदेश हर युवा को प्रभावित नहीं करते, लेकिन वे एक ऐसा तैयार नैरेटिव प्रस्तुत करते हैं जो विरोध को महिमामंडित करता है और हर विफलता का ठीकरा भारत पर फोड़ता है। जब पहले से ही सड़क संस्कृति से प्रभावित कोई युवा यह सुनता है कि 'असली लड़ाई भारतीय राज्य के खिलाफ है', तो ऑनलाइन बयानबाज़ी से वास्तविक हथियारों तक पहुँचने की दूरी कम हो जाती है — ऐसा रिपोर्ट में कहा गया।
कनाडाई खुफिया एजेंसियों की चिंता
रिपोर्टों के अनुसार, कनाडाई खुफिया एजेंसियाँ पहले भी खालिस्तानी चरमपंथियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बता चुकी हैं। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि भड़काऊ वीडियो के बाद शक्ति प्रदर्शन का यह पैटर्न किसी संयोग का नतीजा नहीं है।
आगे क्या
भारत सरकार ने कनाडा से इस प्रकार की भारत-विरोधी गतिविधियों पर अंकुश लगाने की अपेक्षा लगातार जताई है। 18 अक्टूबर 2026 को अल्बर्टा में प्रस्तावित कार्यक्रम के मद्देनज़र भारत-कनाडा राजनयिक संबंधों पर और दबाव पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। राजनयिक जानकारों के अनुसार, MEA का यह बयान एक स्पष्ट संकेत है कि भारत इस मामले पर अपनी निगरानी जारी रखेगा।