28 जुलाई 2026
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विक्रम-1 की ऐतिहासिक उड़ान के बाद पीयूष गोयल बोले — नई पीढ़ी के इनोवेटर्स से भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र नई ऊंचाइयों पर

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विक्रम-1 की ऐतिहासिक उड़ान के बाद पीयूष गोयल बोले — नई पीढ़ी के इनोवेटर्स से भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र नई ऊंचाइयों पर

सारांश

विक्रम-1 — भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट — की सफलता के बाद स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम ने पीयूष गोयल, अश्विनी वैष्णव और प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। गोयल ने कहा, नई पीढ़ी के इनोवेटर्स भारत के वैश्विक अंतरिक्ष नेतृत्व की नींव बन रहे हैं।

मुख्य बातें

विक्रम-1 भारत का पहला निजी क्षेत्र द्वारा निर्मित और सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ ऑर्बिटल रॉकेट है, जिसने 10 जून 2026 को उड़ान भरी।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने 28 जुलाई 2026 को स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापकों पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका से नई दिल्ली में मुलाकात की।
बैठक में स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने और प्रतिभाशाली इंजीनियरों को भारत में ही रोकने पर जोर दिया गया।
स्काईरूट के सह-संस्थापकों ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी अलग-अलग मुलाकात की।
स्काईरूट ने कहा — भारत में बने चिप्स भविष्य में उनके रॉकेटों में उड़ान भरेंगे।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 28 जुलाई 2026 को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बने मजबूत नीतिगत माहौल के कारण भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र नई पीढ़ी के इनोवेटर्स की ऊर्जा का भरपूर लाभ उठा रहा है, जिससे इस क्षेत्र में देश का वैश्विक नेतृत्व और सुदृढ़ हो रहा है। यह बयान उन्होंने स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक एवं सीईओ पवन कुमार चंदाना और सह-संस्थापक नागा भरत डाका से नई दिल्ली में मुलाकात के बाद दिया।

विक्रम-1 मिशन: एक ऐतिहासिक पड़ाव

विक्रम-1 भारत का पहला निजी क्षेत्र द्वारा निर्मित और सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया ऑर्बिटल रॉकेट है। 10 जून 2026 को इस मिशन की सफलता को देश की अंतरिक्ष यात्रा का एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। गोयल ने स्काईरूट की युवा टीम की इस उपलब्धि पर गर्व जताया और कहा कि यह मिशन भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की असाधारण क्षमता का प्रमाण है।

गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, '10 जून 2026 को विक्रम-1 मिशन की सफलता के समर्थन में पोस्टकार्ड पर हस्ताक्षर करना मेरे लिए बेहद यादगार पल था, जो शुरुआत में सिर्फ प्रोत्साहन का एक छोटा-सा कदम था, लेकिन वह आज भारत की असाधारण यात्रा का प्रतीक बन गया है।'

स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने पर जोर

बैठक के दौरान भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की भावी दिशा पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। चर्चा में स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम को और अधिक सशक्त बनाने तथा ऐसा वातावरण तैयार करने पर जोर दिया गया, जहाँ देश के सबसे प्रतिभाशाली इंजीनियर भारत में ही नवाचार और निर्माण को प्राथमिकता दें। गौरतलब है कि स्काईरूट के दोनों सह-संस्थापकों ने इस दौरे में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव से भी मुलाकात की।

स्काईरूट की ओर से जारी बयान में कहा गया, 'भारत का डीप-टेक इकोसिस्टम दूरदर्शी सुधारों, विश्वस्तरीय डिजिटल अवसंरचना और नवाचार के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता के दम पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्काईरूट को भारत से वैश्विक स्तर की अंतरिक्ष तकनीक विकसित करने में योगदान देने पर गर्व है। हम उस दिन का इंतजार कर रहे हैं, जब भारत में बने चिप्स हमारे रॉकेटों में उड़ान भरेंगे।'

प्रधानमंत्री मोदी से भी हुई मुलाकात

इससे पहले स्काईरूट के सह-संस्थापकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की, जिसमें प्रौद्योगिकी, दीर्घकालिक दृष्टिकोण और भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के भविष्य के अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ। स्काईरूट के सह-संस्थापकों ने कहा, 'युवा उद्यमियों के प्रति प्रधानमंत्री मोदी का प्रोत्साहन और भारत के बढ़ते नवाचार इकोसिस्टम पर उनका भरोसा हमें लगातार प्रेरित करता है।'

प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के बाद कहा, 'उनकी अब तक की यात्रा और भविष्य को लेकर उनके विचार सुनकर खुशी हुई। उनकी ऊर्जा, महत्वाकांक्षा और सकारात्मक सोच भारत के जीवंत निजी अंतरिक्ष इकोसिस्टम की झलक दिखाती है। स्काईरूट की पूरी टीम को मेरी शुभकामनाएं।'

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र का व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से विस्तार पा रहा है। IN-SPACe के गठन और अंतरिक्ष नीति सुधारों के बाद से देश में दर्जनों स्पेस स्टार्टअप उभरे हैं। विक्रम-1 की सफलता इस बात का संकेत है कि भारतीय निजी कंपनियाँ अब वैश्विक वाणिज्यिक लॉन्च बाज़ार में प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हैं। आलोचकों का कहना है कि नीतिगत समर्थन के साथ-साथ दीर्घकालिक वित्तपोषण और विनियामक स्पष्टता भी उतनी ही ज़रूरी है। आने वाले वर्षों में स्काईरूट सहित कई स्टार्टअप के वाणिज्यिक मिशन भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की वास्तविक परिपक्वता की असली परीक्षा होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि एक सफल लॉन्च और एक टिकाऊ वाणिज्यिक अंतरिक्ष उद्योग के बीच लंबी दूरी होती है। भारत के स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम को नीतिगत समर्थन के साथ-साथ दीर्घकालिक सरकारी और निजी निवेश, स्पष्ट विनियामक ढाँचा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने की क्षमता चाहिए। मंत्रियों के साथ तस्वीरें और प्रोत्साहन भरे बयान उत्साहवर्धक हैं, पर असली परीक्षा तब होगी जब स्काईरूट जैसी कंपनियाँ वाणिज्यिक पेलोड के लिए अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को आकर्षित करें और दोहराने योग्य लॉन्च क्षमता साबित करें।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विक्रम-1 रॉकेट क्या है और इसकी सफलता क्यों महत्वपूर्ण है?
विक्रम-1 भारत का पहला निजी क्षेत्र द्वारा निर्मित और सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया ऑर्बिटल रॉकेट है, जिसे स्काईरूट एयरोस्पेस ने 10 जून 2026 को लॉन्च किया। यह भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो देश को वैश्विक वाणिज्यिक लॉन्च बाज़ार में प्रतिस्पर्धी बनाती है।
स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापक कौन हैं?
स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक एवं सीईओ पवन कुमार चंदाना और सह-संस्थापक नागा भरत डाका हैं। दोनों ने 28 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की, और इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी भेंट की।
पीयूष गोयल ने स्काईरूट टीम से मिलकर किन विषयों पर चर्चा की?
बैठक में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की भावी दिशा, स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने और प्रतिभाशाली इंजीनियरों को भारत में ही नवाचार के लिए प्रोत्साहित करने पर चर्चा हुई। गोयल ने विक्रम-1 मिशन की सफलता पर टीम को बधाई दी।
भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र कितनी तेजी से बढ़ रहा है?
IN-SPACe के गठन और अंतरिक्ष नीति सुधारों के बाद से भारत में दर्जनों स्पेस स्टार्टअप उभरे हैं। विक्रम-1 की सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारतीय निजी कंपनियाँ अब वैश्विक वाणिज्यिक लॉन्च बाज़ार में प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्काईरूट के बारे में क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्काईरूट के संस्थापकों की यात्रा और भविष्य के विचार सुनकर उन्हें खुशी हुई। उन्होंने कहा कि टीम की ऊर्जा, महत्वाकांक्षा और सकारात्मक सोच भारत के जीवंत निजी अंतरिक्ष इकोसिस्टम की झलक दिखाती है।
राष्ट्र प्रेस
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