विक्रम-1 की सफलता पर PM मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस को सराहा, निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के उज्जवल भविष्य पर जताया भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 जुलाई को भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की अग्रणी कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापकों पवन चंदाना और नागा भरत डाका से मुलाकात की और विक्रम-1 मिशन की सफलता सहित भारत के निजी स्पेस इकोसिस्टम की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कंपनी की उपलब्धियों की प्रशंसा की और टीम को शुभकामनाएं दीं।
मुलाकात में क्या हुई चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा कि पवन चंदाना और नागा भरत डाका के साथ उनकी बेहद सार्थक बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि चर्चा में विक्रम-1 मिशन की सफलता को विशेष रूप से रेखांकित किया गया, साथ ही स्काईरूट की भविष्य की योजनाओं और भारत के निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र पर भी विचार-विमर्श हुआ।
मोदी ने कहा कि संस्थापकों का उत्साह, महत्वाकांक्षा और सकारात्मक दृष्टिकोण भारत के तेज़ी से विकसित हो रहे निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की जीवंत भावना का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत का निजी स्पेस सेक्टर नई ऊँचाइयाँ छुएगा और वैश्विक मंच पर अपनी मज़बूत पहचान बनाएगा।
स्काईरूट एयरोस्पेस की प्रतिक्रिया
स्काईरूट एयरोस्पेस ने भी एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री से हुई इस मुलाकात को सम्मान की बात बताया। कंपनी ने कहा कि सह-संस्थापकों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने स्काईरूट की यात्रा, विक्रम-1 की सफलता और अंतरिक्ष क्षेत्र में कंपनी के दीर्घकालिक विज़न को विस्तार से प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
कंपनी ने यह भी कहा कि यह मुलाकात भारतीय निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए प्रेरणादायक है और इससे देश में नवाचार, अनुसंधान एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए अवसरों को बल मिलेगा।
भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र का संदर्भ
गौरतलब है कि स्काईरूट एयरोस्पेस भारत की उन पहली निजी कंपनियों में शामिल है जिन्होंने स्वदेशी रॉकेट तकनीक विकसित की है। विक्रम-1 मिशन की सफलता को भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार निजी कंपनियों को अंतरिक्ष अन्वेषण में प्रोत्साहित करने के लिए नीतिगत सुधार कर रही है और इन-स्पेस (IN-SPACe) जैसी नियामक संस्थाओं के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ा रही है।
आगे की राह
प्रधानमंत्री के साथ इस उच्चस्तरीय संवाद को उद्योग विशेषज्ञ भारत के निजी स्पेस इकोसिस्टम को सरकारी समर्थन के स्पष्ट संकेत के रूप में देख रहे हैं। स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में कंपनी और अधिक महत्वाकांक्षी मिशनों की ओर अग्रसर होगी, जो भारत को वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में सहायक होंगे।