3 अक्टूबर 2026
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भारतीय जहाज निर्माण: 2047 तक टॉप-5 देशों में शामिल होने का लक्ष्य, सोनोवाल ने गिनाए समुद्री आत्मनिर्भरता के मील के पत्थर

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भारतीय जहाज निर्माण: 2047 तक टॉप-5 देशों में शामिल होने का लक्ष्य, सोनोवाल ने गिनाए समुद्री आत्मनिर्भरता के मील के पत्थर

सारांश

भारत के 95% निर्यात कार्गो को विदेशी जहाज ढोते हैं और इससे हर साल 75 अरब डॉलर बाहर जाते हैं — सोनोवाल का 2047 का समुद्री दांव इसी खाई को पाटने की कोशिश है। सवाल यह है कि क्या नीतिगत इरादा इस बार जहाजों की संख्या और वास्तविक क्षमता में बदल पाएगा।

मुख्य बातें

सर्बानंद सोनोवाल ने 2 अक्टूबर 2026 को मुंबई में SCI की 65वीं वर्षगांठ पर भारत के समुद्री लक्ष्यों की रूपरेखा पेश की।
सरकार का लक्ष्य: 436 नए भारतीय झंडे वाले जहाज जोड़ना और GT क्षमता 14 मिलियन से बढ़ाकर 19 मिलियन GT करना।
जहाज निर्माण क्षमता को 4.5 मिलियन GT तक विस्तारित करने का लक्ष्य; 2047 तक टॉप-5 जहाज निर्माण देशों में शामिल होना।
फिलहाल भारतीय झंडे वाले जहाज देश के निर्यात कार्गो का केवल 5% ही ढोते हैं; शेष 95% विदेशी कंपनियों के पास।
विदेशी शिपिंग पर निर्भरता के कारण हर साल करीब 75 अरब अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा बाहर जाती है।
मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 के तहत 2030 तक शीर्ष 10 और 2047 तक शीर्ष 5 शिपिंग देशों में जगह बनाने की रणनीति।

केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 2 अक्टूबर 2026 को मुंबई में स्पष्ट किया कि भारत 2047 तक दुनिया के शीर्ष पाँच जहाज निर्माण देशों में स्थान पाने की ओर अग्रसर है। शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) की 65वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में सोनोवाल ने कहा कि पोर्ट, शिपिंग और वॉटरवेज क्षेत्र में निरंतर विस्तार हो रहा है और सरकार भारतीय झंडे वाले जहाजों की संख्या तेज़ी से बढ़ाने के मिशन पर है।

समारोह का संदर्भ और थीम

'सेलिंग इंडियाज ग्रोथ, शेपिंग मैरीटाइम ट्रांसफॉर्मेशन' विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में SCI के छह दशकों से अधिक के योगदान को रेखांकित किया गया। सोनोवाल ने कहा कि विभिन्न भू-राजनीतिक संकटों में कंपनी ने जो साहसी निर्णय लिए, वे देश की समुद्री यात्रा के गौरवशाली अध्याय हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के समुद्री क्षेत्र को नई दिशा और गति मिली है।

मुख्य लक्ष्य और क्षमता विस्तार

सोनोवाल ने बताया कि सरकार 436 नए भारतीय झंडे वाले जहाज जोड़ने की योजना पर काम कर रही है। इसके साथ ही देश की ग्रॉस टनेज (GT) क्षमता को मौजूदा 14 मिलियन GT से बढ़ाकर 19 मिलियन GT करने का लक्ष्य है। जहाज निर्माण क्षमता को भी 4.5 मिलियन GT तक विस्तारित करने की दिशा में काम जारी है। 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' के अंतर्गत 2030 तक भारत को शिपिंग टनेज में दुनिया के शीर्ष 10 देशों में और 2047 तक शीर्ष 5 देशों में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

विदेशी निर्भरता की चुनौती

सोनोवाल ने एक चिंताजनक आँकड़ा साझा करते हुए बताया कि फिलहाल भारतीय झंडे वाले जहाज देश के निर्यात कार्गो का केवल 5 प्रतिशत ही परिवहन करते हैं, जबकि शेष 95 प्रतिशत कार्गो विदेशी शिपिंग कंपनियों के माध्यम से जाता है। उनके अनुसार, इस निर्भरता के कारण भारत हर साल करीब 75 अरब अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा गँवाता है — एक राशि जो देश के कुल रक्षा बजट से भी अधिक है।

भू-राजनीतिक सन्दर्भ और ऊर्जा सुरक्षा

मंत्री ने रेड सी, ब्लैक सी और होर्मुज जलडमरूमध्य में हाल के व्यवधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये घटनाएँ साबित करती हैं कि पर्याप्त शिपिंग क्षमता सीधे तौर पर राष्ट्र की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी है। गौरतलब है कि रेड सी में हूती हमलों के कारण वैश्विक शिपिंग लागत में भारी उछाल आया था, जिसने भारतीय आयातकों और निर्यातकों दोनों को प्रभावित किया था। इनलैंड वॉटरवेज, कोस्टल शिपिंग और समुद्री परिवहन को एकीकृत करते हुए सरकार एक व्यापक समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र खड़ा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब चीन, जापान और दक्षिण कोरिया वैश्विक जहाज निर्माण बाज़ार में वर्चस्व बनाए हुए हैं और भारत की हिस्सेदारी अभी भी सीमित है। विशेषज्ञों के अनुसार, SCI जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को मज़बूत करना और निजी क्षेत्र को शिपयार्ड में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना इस लक्ष्य की कुंजी होगा। सरकार की नीति स्पष्ट है — आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा अब समुद्र की लहरों तक पहुँच रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे उद्धृत करना और इसे पलटने की रोडमैप देना दो अलग-अलग बातें हैं। भारत दशकों से अपनी शिपिंग क्षमता बढ़ाने की बात करता आया है — SCI की स्थापना 1961 में इसी उद्देश्य से हुई थी। असली कसौटी यह है कि क्या नई नीति निजी शिपयार्ड निवेश को व्यवहारिक बनाती है, वित्तपोषण को सुलभ बनाती है, और कुशल जनशक्ति की आपूर्ति सुनिश्चित करती है — क्योंकि चीन, जापान और दक्षिण कोरिया का एकाधिकार सिर्फ़ सब्सिडी से नहीं टूटेगा, उसके लिए दीर्घकालिक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र चाहिए जो अभी भारत में नदारद है।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 क्या है?
यह भारत सरकार की दीर्घकालिक समुद्री नीति है जिसके तहत 2030 तक भारत को शिपिंग टनेज में दुनिया के शीर्ष 10 देशों में और 2047 तक शीर्ष 5 जहाज निर्माण देशों में लाने का लक्ष्य है। इसमें 436 नए भारतीय झंडे वाले जहाज जोड़ना और ग्रॉस टनेज क्षमता 19 मिलियन GT तक बढ़ाना शामिल है।
भारत से विदेशी शिपिंग कंपनियों पर निर्भरता की वजह से कितना नुकसान होता है?
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के अनुसार, विदेशी शिपिंग कंपनियों पर निर्भरता के कारण भारत हर साल करीब 75 अरब अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा गँवाता है। वर्तमान में भारतीय झंडे वाले जहाज देश के निर्यात कार्गो का केवल 5 प्रतिशत ही ढोते हैं।
SCI की 65वीं वर्षगांठ समारोह में क्या घोषणाएँ हुईं?
मुंबई में आयोजित इस समारोह में मंत्री सोनोवाल ने भारत की समुद्री आत्मनिर्भरता की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने GT क्षमता 14 मिलियन से 19 मिलियन तक बढ़ाने और जहाज निर्माण क्षमता 4.5 मिलियन GT तक ले जाने के लक्ष्यों की पुष्टि की।
रेड सी और होर्मुज संकट का भारत की शिपिंग नीति से क्या संबंध है?
सोनोवाल ने स्पष्ट किया कि रेड सी, ब्लैक सी और होर्मुज जलडमरूमध्य में हाल के व्यवधानों ने यह उजागर किया है कि पर्याप्त शिपिंग क्षमता देश की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा से सीधे जुड़ी है। इन्हीं संकटों ने स्वदेशी समुद्री क्षमता बढ़ाने की ज़रूरत को और प्रासंगिक बना दिया है।
भारत 2047 तक टॉप-5 जहाज निर्माता देशों में कैसे पहुँचेगा?
सरकार की योजना में 436 नए भारतीय झंडे वाले जहाज जोड़ना, GT क्षमता 19 मिलियन तक बढ़ाना और जहाज निर्माण क्षमता 4.5 मिलियन GT करना शामिल है। इनलैंड वॉटरवेज, कोस्टल शिपिंग और समुद्री परिवहन तीनों को एकीकृत करके एक व्यापक समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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