भारतीय जहाज निर्माण: 2047 तक टॉप-5 देशों में शामिल होने का लक्ष्य, सोनोवाल ने गिनाए समुद्री आत्मनिर्भरता के मील के पत्थर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 2 अक्टूबर 2026 को मुंबई में स्पष्ट किया कि भारत 2047 तक दुनिया के शीर्ष पाँच जहाज निर्माण देशों में स्थान पाने की ओर अग्रसर है। शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) की 65वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में सोनोवाल ने कहा कि पोर्ट, शिपिंग और वॉटरवेज क्षेत्र में निरंतर विस्तार हो रहा है और सरकार भारतीय झंडे वाले जहाजों की संख्या तेज़ी से बढ़ाने के मिशन पर है।
समारोह का संदर्भ और थीम
'सेलिंग इंडियाज ग्रोथ, शेपिंग मैरीटाइम ट्रांसफॉर्मेशन' विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में SCI के छह दशकों से अधिक के योगदान को रेखांकित किया गया। सोनोवाल ने कहा कि विभिन्न भू-राजनीतिक संकटों में कंपनी ने जो साहसी निर्णय लिए, वे देश की समुद्री यात्रा के गौरवशाली अध्याय हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के समुद्री क्षेत्र को नई दिशा और गति मिली है।
मुख्य लक्ष्य और क्षमता विस्तार
सोनोवाल ने बताया कि सरकार 436 नए भारतीय झंडे वाले जहाज जोड़ने की योजना पर काम कर रही है। इसके साथ ही देश की ग्रॉस टनेज (GT) क्षमता को मौजूदा 14 मिलियन GT से बढ़ाकर 19 मिलियन GT करने का लक्ष्य है। जहाज निर्माण क्षमता को भी 4.5 मिलियन GT तक विस्तारित करने की दिशा में काम जारी है। 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' के अंतर्गत 2030 तक भारत को शिपिंग टनेज में दुनिया के शीर्ष 10 देशों में और 2047 तक शीर्ष 5 देशों में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
विदेशी निर्भरता की चुनौती
सोनोवाल ने एक चिंताजनक आँकड़ा साझा करते हुए बताया कि फिलहाल भारतीय झंडे वाले जहाज देश के निर्यात कार्गो का केवल 5 प्रतिशत ही परिवहन करते हैं, जबकि शेष 95 प्रतिशत कार्गो विदेशी शिपिंग कंपनियों के माध्यम से जाता है। उनके अनुसार, इस निर्भरता के कारण भारत हर साल करीब 75 अरब अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा गँवाता है — एक राशि जो देश के कुल रक्षा बजट से भी अधिक है।
भू-राजनीतिक सन्दर्भ और ऊर्जा सुरक्षा
मंत्री ने रेड सी, ब्लैक सी और होर्मुज जलडमरूमध्य में हाल के व्यवधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये घटनाएँ साबित करती हैं कि पर्याप्त शिपिंग क्षमता सीधे तौर पर राष्ट्र की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी है। गौरतलब है कि रेड सी में हूती हमलों के कारण वैश्विक शिपिंग लागत में भारी उछाल आया था, जिसने भारतीय आयातकों और निर्यातकों दोनों को प्रभावित किया था। इनलैंड वॉटरवेज, कोस्टल शिपिंग और समुद्री परिवहन को एकीकृत करते हुए सरकार एक व्यापक समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र खड़ा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब चीन, जापान और दक्षिण कोरिया वैश्विक जहाज निर्माण बाज़ार में वर्चस्व बनाए हुए हैं और भारत की हिस्सेदारी अभी भी सीमित है। विशेषज्ञों के अनुसार, SCI जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को मज़बूत करना और निजी क्षेत्र को शिपयार्ड में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना इस लक्ष्य की कुंजी होगा। सरकार की नीति स्पष्ट है — आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा अब समुद्र की लहरों तक पहुँच रही है।