जहाज निर्माण उद्योग को ₹69,725 करोड़ का पैकेज, मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड और कौशल विकास पर बड़ा जोर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 25 जुलाई 2026 को देश के जहाज निर्माण (शिपबिल्डिंग) उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए ₹69,725 करोड़ के व्यापक पैकेज को मंजूरी दी है। इस पैकेज के तीन प्रमुख स्तंभ हैं — घरेलू जहाज निर्माण क्षमता का विस्तार, समुद्री क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण, और कुशल जनशक्ति का विकास।
पैकेज में क्या-क्या शामिल है
पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि पैकेज के तहत ₹24,736 करोड़ की शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम को मंजूरी दी गई है, जिसका उद्देश्य भारतीय शिपयार्ड की लागत को वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के बराबर लाना है।
पैकेज का सबसे बड़ा घटक ₹25,000 करोड़ का मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड है। इसमें ₹20,000 करोड़ का मैरीटाइम इन्वेस्टमेंट फंड और ₹5,000 करोड़ का इंटरेस्ट इंसेंटिवाइजेशन फंड सम्मिलित है, जो जहाज निर्माण और समुद्री क्षेत्र को दीर्घकालिक वित्तीय आधार देगा।
इसके अतिरिक्त, ₹19,989 करोड़ की शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम (एसबीडीएस) भी मंजूर की गई है। इस योजना के अंतर्गत ग्रीनफील्ड क्लस्टर विकसित करने और मौजूदा इकाइयों के ब्राउनफील्ड विस्तार के ज़रिये देश की जहाज निर्माण क्षमता को प्रतिवर्ष 45 लाख ग्रॉस टनेज तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
नीतिगत सुधार और इन्फ्रास्ट्रक्चर दर्जा
सरकार ने 19 सितंबर 2025 को 10,000 ग्रॉस टनेज (जीटी) या उससे अधिक क्षमता वाले भारतीय ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाजों को इन्फ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया था। साथ ही, भारत में निर्मित 1,500 जीटी या उससे अधिक क्षमता वाले जहाजों को भी यही दर्जा प्रदान किया गया है।
यह कदम उद्योग के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण के नए रास्ते खोलता है, क्योंकि इन्फ्रास्ट्रक्चर दर्जे से बैंकिंग और बॉन्ड बाज़ार से सस्ती पूँजी जुटाना आसान हो जाता है।
माँग एकीकरण और ऑर्डर की स्पष्टता
माँग को एकीकृत करने की रणनीति के तहत 400 से अधिक जहाजों के अधिग्रहण की योजना तैयार की गई है। इससे भारतीय शिपयार्ड को लंबी अवधि तक ऑर्डर मिलने की निश्चितता मिलेगी — एक ऐसी समस्या जो दशकों से घरेलू उद्योग की विकास-राह में रोड़ा रही है।
ग्रीनफील्ड क्लस्टर: तीन राज्यों में नई शुरुआत
सरकार ने एसबीडीएस के तहत आंध्र प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु में तीन ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर विकसित करने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। ये क्लस्टर तटीय राज्यों में औद्योगिक रोज़गार और निर्यात क्षमता दोनों के लिहाज़ से अहम माने जा रहे हैं।
मैरीटाइम विजन 2030 और 2047 से जुड़ाव
पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, यह पूरा पैकेज मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मैरीटाइम अमृतकाल विजन 2047 के अनुरूप भारत को वैश्विक जहाज निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। गौरतलब है कि वैश्विक जहाज निर्माण बाज़ार में अभी चीन, दक्षिण कोरिया और जापान का दबदबा है, और भारत की हिस्सेदारी अत्यंत सीमित रही है। यह पैकेज उस असंतुलन को पलटने का महत्वाकांक्षी प्रयास है।