सर्बानंद सोनोवाल की दक्षिण कोरिया यात्रा: 2047 तक भारत को शीर्ष 5 जहाज निर्माता देशों में लाने का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल दक्षिण कोरिया की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं, जिसका उद्देश्य कोरियाई उद्योग जगत के समक्ष भारत के समुद्री क्षेत्र की संभावनाएँ प्रस्तुत करना और जहाज निर्माण (शिपबिल्डिंग) में द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊँचाई देना है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा भारत को 2047 तक विश्व के शीर्ष पाँच जहाज निर्माता देशों में शामिल करने के दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बुसान से हुई यात्रा की शुरुआत
सोनोवाल ने अपनी यात्रा का आगाज़ बुसान से किया — जो दक्षिण कोरिया की समुद्री राजधानी मानी जाती है। वहाँ उन्होंने कोरियाई जहाज निर्माण क्षेत्र में कार्यरत भारतीय पेशेवरों से सीधी बातचीत की। सोनोवाल ने कहा, "दुनिया के सबसे उन्नत जहाज निर्माण इकोसिस्टम में से एक, यानी कोरिया में आपकी मौजूदगी भारत के लिए गर्व की बात है।"
उन्होंने इन पेशेवरों से आग्रह किया कि वे कोरिया में अर्जित अनुभव को या तो स्वदेश लाएँ अथवा वहीं रहते हुए भारतीय कंपनियों को सहयोग करें। उनके अनुसार भारत को बड़ी संख्या में जहाज निर्माताओं, मरीन इंजीनियरों, नेवल आर्किटेक्ट्स, डिजाइनरों, वेल्डरों, प्रोजेक्ट मैनेजरों और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों की आवश्यकता है।
'वॉयजेस' फ्रेमवर्क: सरकारी समझौते से आगे की दृष्टि
सोनोवाल ने पेशेवरों से कहा कि वे 'वॉयजेस' नामक द्विपक्षीय ढाँचे को महज़ एक सरकारी दस्तावेज़ न समझें। यह फ्रेमवर्क अप्रैल में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच अपनाया गया था। इसमें जहाज निर्माण, शिपिंग और समुद्री लॉजिस्टिक्स में सहयोग शामिल है।
उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूं कि आप 'वॉयजेस' को केवल एक सरकारी ढाँचे के रूप में न देखें, बल्कि इसे अपने पेशेवर विकास और भारत के समुद्री भविष्य के लिए एक मंच के रूप में देखें।" सोनोवाल ने यह भी कहा, "आप दोनों देशों में अपने नेटवर्कों के बीच एक जीवंत पुल की तरह काम कर सकते हैं।"
कौशल साझेदारी और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर ज़ोर
सोनोवाल ने भारतीय पेशेवरों से 'इंडिया शिप टेक्नोलॉजी सेंटर' तथा भारत और कोरिया इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (KOICA) के बीच चल रही जहाज निर्माण कौशल साझेदारी में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने युवा भारतीय पेशेवरों का मार्गदर्शन करने और शिपयार्ड की उत्पादकता बढ़ाने के लिए व्यावहारिक सुझाव भी माँगे।
इसके अतिरिक्त उन्होंने विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी कुशल कार्यबल तैयार करने और तकनीक, विनिर्माण व नवाचार में द्विपक्षीय औद्योगिक सहयोग को और गहरा करने के उपायों पर सुझाव माँगे। सोनोवाल ने स्पष्ट कहा, "हम जहाज निर्माण, शिपिंग, बंदरगाहों और समुद्री लॉजिस्टिक्स के क्षेत्रों में कोरिया के साथ साझेदारी करना चाहते हैं।"
मैरीटाइम इंडिया विजन 2047 का व्यापक संदर्भ
यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मैरीटाइम इंडिया विजन 2030' और 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' के अनुरूप है, जिसके तहत भारत का लक्ष्य जहाज निर्माण, जहाज की मरम्मत, समुद्री विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स के लिए एक विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धी केंद्र बनना है। गौरतलब है कि फिलहाल वैश्विक जहाज निर्माण में भारत की हिस्सेदारी एक प्रतिशत से भी कम है, जबकि दक्षिण कोरिया, चीन और जापान इस क्षेत्र में अग्रणी हैं।
यात्रा के कार्यक्रम में वैश्विक जहाज निर्माण उद्योगों के शीर्ष नेताओं के साथ बैठकें, समुद्री उद्योग संगठनों के साथ चर्चा और समुद्री थिंक टैंक तथा अनुसंधान संस्थानों के साथ संवाद शामिल हैं। आने वाले समय में इन बैठकों से निकले सहयोग समझौते भारत की शिपबिल्डिंग क्षमता निर्माण की गति तय करेंगे।