भारत की बेरोजगारी दर सितंबर 2026 में घटकर 5% पर आई, NSO के आंकड़ों में ग्रामीण रोजगार में सुधार
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा 15 अक्टूबर 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की बेरोजगारी दर सितंबर 2026 में सालाना आधार पर 0.2 प्रतिशत घटकर 5 प्रतिशत पर आ गई। यह गिरावट मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन में सुधार के कारण दर्ज की गई है।
ग्रामीण और शहरी बेरोजगारी की स्थिति
NSO के आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण बेरोजगारी दर सितंबर 2026 में 0.4 प्रतिशत घटकर 4.2 प्रतिशत रह गई, जबकि सितंबर 2025 में यह 4.6 प्रतिशत थी। यह सुधार उल्लेखनीय है क्योंकि देश की कार्यबल में ग्रामीण भागीदारी का अनुपात शहरी भागीदारी से कहीं अधिक है।
वहीं, शहरी बेरोजगारी दर सितंबर में 6.8 प्रतिशत पर स्थिर बनी रही — जो पिछले वर्ष की समान अवधि के बराबर है। यह स्थिरता संकेत देती है कि शहरी श्रम बाज़ार में सुधार की गति अपेक्षाकृत धीमी है।
श्रम बल भागीदारी दर में वृद्धि
सितंबर 2026 में श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) 0.2 प्रतिशत बढ़कर 55.5 प्रतिशत हो गई, जो सितंबर 2025 में 55.3 प्रतिशत थी। ग्रामीण LFPR 0.6 प्रतिशत बढ़कर 58 प्रतिशत पहुँची, जो पहले 57.4 प्रतिशत थी।
हालांकि, शहरी LFPR सालाना आधार पर 0.2 प्रतिशत घटकर 50.7 प्रतिशत रह गई, जो पिछले वर्ष 50.9 प्रतिशत थी। यद्यपि मासिक आधार पर शहरी LFPR में 0.3 प्रतिशत का सुधार दर्ज किया गया।
महिला श्रम भागीदारी में सुधार के संकेत
सितंबर 2026 में कुल महिला LFPR 34.6 प्रतिशत रही, जो अगस्त 2026 के 34.8 प्रतिशत से मामूली कम है। हालांकि, सालाना आधार पर यह सितंबर 2025 के 34.1 प्रतिशत की तुलना में 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है।
शहरी महिला LFPR मासिक आधार पर 0.5 प्रतिशत बढ़कर 25.9 प्रतिशत हो गई — यह अक्टूबर 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। इसी तरह, ग्रामीण महिला LFPR 1.0 प्रतिशत अंक बढ़कर 38.9 प्रतिशत पर पहुँची, जो पहले 37.9 प्रतिशत थी।
श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR) की स्थिति
सितंबर 2026 में कुल श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR) 52.7 प्रतिशत पर लगभग स्थिर रहा, जो सितंबर 2025 के 52.4 प्रतिशत से 0.3 प्रतिशत अंक अधिक है। शहरी WPR 47.2 प्रतिशत पर पहुँचा, जो अक्टूबर 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है।
यह सुधार दोनों लिंगों में दर्ज किया गया। शहरी पुरुषों का WPR 70.7 प्रतिशत से बढ़कर 71.0 प्रतिशत और शहरी महिलाओं का WPR 23.2 प्रतिशत से बढ़कर 23.5 प्रतिशत हो गया।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि यह आंकड़े ऐसे समय में आए हैं जब भारतीय अर्थव्यवस्था पर वैश्विक मंदी की आशंकाओं का असर चर्चा में है। रोजगार के आंकड़ों में सुधार, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, नीति निर्माताओं के लिए सकारात्मक संकेत है। आलोचकों का कहना है कि शहरी बेरोजगारी दर का 6.8 प्रतिशत पर स्थिर बने रहना यह दर्शाता है कि औपचारिक शहरी रोजगार बाज़ार में अभी भी संरचनात्मक चुनौतियाँ बनी हुई हैं। आने वाले महीनों के आंकड़े यह स्पष्ट करेंगे कि यह सुधार टिकाऊ है या मौसमी।