क्या इंदौर दूषित पानी मामले की न्यायिक जांच होगी? - दिग्विजय सिंह
सारांश
Key Takeaways
- दिग्विजय सिंह ने न्यायिक जांच की मांग की।
- इंदौर में 18 लोगों की मौत हुई।
- सैकड़ों लोग दूषित पानी पीने से बीमार पड़े।
- राज्य सरकार ने कार्रवाई का भरोसा दिया।
- राजनीति इस मामले में सक्रिय है।
भोपाल, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने इंदौर में दूषित जल पीने से हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार पड़ने के मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की।
दिग्विजय सिंह ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर कहा कि इंदौर मेरा बचपन का शहर, राज्य का सबसे विकसित शहर और देश का सबसे स्वच्छ शहर है। राज्य की आर्थिक राजधानी के रूप में इसकी पहचान है, और उसी इंदौर में 18 लोग गंदा पानी पीने से मर जाते हैं। जब तक आंकड़ा 2-4 मौतों का रहा, किसी ने कोई परवाह नहीं की, लेकिन जब मौतों की गिनती बढ़ने लगी, तो सभी ने अपनी जिम्मेदारी एक दूसरे पर डालना शुरू कर दिया। मंत्री ने अधिकारियों को, अधिकारियों ने मेयर को, और मेयर ने व्यवस्था को दोषी ठहराया।
इंदौर के प्रभारी मंत्री पर सवाल उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री से कोई सवाल नहीं पूछ रहा है कि वे हर दूसरे दिन शहर में आते हैं और सिर्फ मौत का मुआवजा देकर चुप क्यों हो गए? कुछ ट्रांसफर और मुआवजे से शहर का कलंक नहीं मिटता। पूर्व मुख्यमंत्री ने इस हादसे की न्यायिक जांच की मांग की है, जिससे पब्लिक के सामने सुनवाईहाईकोर्ट के सिटिंग जज से इसकी जांच कराई जाए।
उन्होंने आगे कहा कि मौत के मुआवजे से जिंदगी नहीं लौटती। गलतियों पर पर्दा डालने की बजाय गलतियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को दंडित किया जाना चाहिए।
बता दें कि इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की आपूर्ति से कई मौतें हुई हैं, वहीं सैकड़ों लोग बीमार हुए हैं। इसके बाद से राज्य के अन्य हिस्सों में भी दूषित पानी की आपूर्ति का मामला तूल पकड़ रहा है। इस मामले पर राजनीति भी काफी हो रही है। सरकार दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिला रही है।