23 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस 2026: 7 करोड़ बधिरों की आवाज़ बनती है भारतीय सांकेतिक भाषा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस 2026: 7 करोड़ बधिरों की आवाज़ बनती है भारतीय सांकेतिक भाषा

सारांश

23 सितंबर को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस इस बार 'बधिर लोगों के मानवाधिकारों की घोषणा' थीम के साथ आया है। दुनिया में 7 करोड़ से अधिक बधिर लोग 300 से ज़्यादा सांकेतिक भाषाओं में संवाद करते हैं — और भारत में ISL उनकी सबसे मज़बूत पहचान है।

मुख्य बातें

अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस प्रतिवर्ष 23 सितंबर को मनाया जाता है; 2026 की थीम है 'बधिर लोगों के मानवाधिकारों की घोषणा' ।
दिवस का आधार संयुक्त राष्ट्र महासभा का 2017 का प्रस्ताव है; पहला आयोजन 2018 में हुआ था।
23 सितंबर का चयन विश्व बधिर संघ (WFD) की 1951 में स्थापना के उपलक्ष्य में किया गया।
विश्व में 7 करोड़ से अधिक बधिर लोग हैं, जिनमें 80% से अधिक विकासशील देशों में रहते हैं और 300+ सांकेतिक भाषाओं का उपयोग करते हैं।
भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) हिंदी या अंग्रेज़ी से पूरी तरह अलग — इसकी अपनी स्वतंत्र व्याकरणिक संरचना है।
विधि और न्याय मंत्रालय तथा मध्य प्रदेश सामाजिक न्याय विभाग ने बधिर समुदाय के अधिकारों और कौशल विकास के प्रति प्रतिबद्धता जताई।

अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस प्रतिवर्ष 23 सितंबर को दुनिया भर में मनाया जाता है — इस वर्ष इसकी थीम है 'बधिर लोगों के मानवाधिकारों की घोषणा'। यह दिवस उन 7 करोड़ से अधिक बधिर व्यक्तियों के संवाद अधिकारों और भाषाई पहचान को रेखांकित करता है, जो विश्व भर में 300 से अधिक सांकेतिक भाषाओं का उपयोग करते हैं। भारत में इसे सांकेतिक भाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है, जहाँ भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) बधिर समुदाय की प्राथमिक अभिव्यक्ति का माध्यम है।

दिवस का इतिहास और महत्व

यह दिवस संयुक्त राष्ट्र महासभा के 2017 के प्रस्ताव के आधार पर अस्तित्व में आया, जिसमें 23 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के रूप में आधिकारिक मान्यता दी गई। पहला आयोजन 2018 में अंतरराष्ट्रीय बधिर सप्ताह के हिस्से के तौर पर हुआ था। 23 सितंबर की तारीख़ का चयन इसलिए किया गया क्योंकि इसी दिन 1951 में विश्व बधिर संघ (WFD) की स्थापना हुई थी — जो बधिर समुदाय के अधिकारों के लिए काम करने वाली सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय संस्था है।

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र ने सांकेतिक भाषाओं को पूर्ण विकसित प्राकृतिक भाषाएँ माना है, जो संरचनात्मक रूप से बोली जाने वाली भाषाओं से भिन्न होती हैं। इनकी अपनी व्याकरण, शब्दावली और अभिव्यक्ति-शैली होती है।

विश्व में बधिर समुदाय की स्थिति

विश्व बधिर संघ के आँकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में 7 करोड़ से अधिक बधिर लोग हैं। इनमें से 80 प्रतिशत से अधिक विकासशील देशों में रहते हैं, जहाँ सांकेतिक भाषा शिक्षा और सेवाओं तक पहुँच अभी भी सीमित है। ये समुदाय मिलकर 300 से अधिक सांकेतिक भाषाओं का उपयोग करते हैं।

एक अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा भी प्रचलन में है, जिसका उपयोग बधिर लोग अंतरराष्ट्रीय बैठकों, यात्राओं और सामाजिक मेलजोल में अनौपचारिक रूप से करते हैं। हालाँकि, इसे राष्ट्रीय सांकेतिक भाषाओं का मिश्रित रूप माना जाता है और इसकी शब्दावली तुलनात्मक रूप से सीमित है।

भारत में भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL)

भारत में भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) एक स्वतंत्र दृश्य-हस्त भाषा है, जो हिंदी, अंग्रेज़ी या देश की किसी भी अन्य बोली जाने वाली भाषा से बिल्कुल अलग है। यह किसी बोली जाने वाली भाषा का हस्त-अनुवाद नहीं है — इसकी अपनी व्याकरणिक संरचना है। ISL बधिर और श्रवण-सक्षम दोनों समुदायों के बीच संचार का सेतु बनती है।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देश में दिव्यांगजनों की समावेशी शिक्षा और रोज़गार नीतियाँ केंद्र की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। सांकेतिक भाषा तक प्रारंभिक पहुँच को संयुक्त राष्ट्र ने बधिर व्यक्तियों के विकास और वैश्विक विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अनिवार्य माना है।

सरकारी प्रतिक्रिया और संकल्प

विधि और न्याय मंत्रालय के विधि कार्य विभाग ने इस दिवस पर समावेशिता, सुलभता और मानवाधिकारों को साकार करने में सांकेतिक भाषा की भूमिका को रेखांकित किया। मंत्रालय ने कहा, 'बातचीत या संवाद सिर्फ अपनी बात कहने का ज़रिया नहीं है, बल्कि यह जानकारी, शिक्षा और न्याय पाने का एक अहम हिस्सा है।'

मध्य प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं निःशक्तजन कल्याण विभाग ने इस अवसर पर श्रवण बाधितजनों के अधिकारों, सम्मान और समान अवसरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया। विभाग ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों को कौशल विकास प्रशिक्षण से जोड़कर उनके लिए आत्मनिर्भर भविष्य की राह बना रही है।

आगे की राह

सांकेतिक भाषाओं को भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के अभिन्न अंग के रूप में संरक्षित करना अब केवल कल्याणकारी प्रश्न नहीं, बल्कि मानवाधिकार का विषय बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायिक, शैक्षणिक और सार्वजनिक सेवाओं में ISL की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करना आने वाले वर्षों की सबसे ज़रूरी नीतिगत प्राथमिकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सरकारी दफ्तरों और स्कूलों में ISL दुभाषियों की अनिवार्य उपस्थिति कब सुनिश्चित होगी। विधि मंत्रालय का बयान प्रेरणादायक है, किंतु 'न्याय तक पहुँच' तब तक अधूरी है जब तक अदालती कार्यवाही में सांकेतिक भाषा सेवाएँ कानूनी अधिकार न बन जाएँ। मध्य प्रदेश का कौशल विकास संकल्प सराहनीय दिशा है, परंतु ज़मीनी कार्यान्वयन के आँकड़े सार्वजनिक नहीं हैं। जब तक नीति और जवाबदेही एक साथ नहीं चलेंगी, यह दिवस संकल्पों की औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस क्या है और यह कब मनाया जाता है?
अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस प्रतिवर्ष 23 सितंबर को मनाया जाता है। यह संयुक्त राष्ट्र महासभा के 2017 के प्रस्ताव पर आधारित है और पहली बार 2018 में मनाया गया था। यह दिन बधिर लोगों के भाषाई अधिकारों और सांकेतिक भाषाओं की वैश्विक मान्यता को समर्पित है।
2026 में सांकेतिक भाषा दिवस की थीम क्या है?
इस वर्ष 2026 में अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस 'बधिर लोगों के मानवाधिकारों की घोषणा' थीम के अंतर्गत मनाया जा रहा है। यह थीम बधिर समुदाय के संवैधानिक और अंतरराष्ट्रीय अधिकारों की पुनः पुष्टि पर केंद्रित है।
23 सितंबर को ही यह दिवस क्यों मनाया जाता है?
23 सितंबर की तारीख़ विश्व बधिर संघ (WFD) की स्थापना की वर्षगाँठ के रूप में चुनी गई है, जो 1951 में इसी दिन गठित हुई थी। WFD दुनिया भर के बधिर समुदायों के अधिकारों की पैरोकारी करने वाली प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्था है।
भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) क्या है और यह अन्य भाषाओं से कैसे अलग है?
भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) एक स्वतंत्र दृश्य-हस्त भाषा है, जो हिंदी, अंग्रेज़ी या देश की किसी भी बोली जाने वाली भाषा से संरचनात्मक रूप से भिन्न है। यह किसी भाषा का हस्त-अनुवाद नहीं, बल्कि अपनी व्याकरण और शब्दावली वाली पूर्ण प्राकृतिक भाषा है।
दुनिया में कितने बधिर लोग हैं और वे कितनी सांकेतिक भाषाएँ उपयोग करते हैं?
विश्व बधिर संघ के आँकड़ों के अनुसार दुनिया भर में 7 करोड़ से अधिक बधिर लोग हैं, जिनमें 80 प्रतिशत से अधिक विकासशील देशों में रहते हैं। ये समुदाय मिलकर 300 से अधिक सांकेतिक भाषाओं का उपयोग करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले