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आईपैक छापेमारी: ममता बनर्जी व पूर्व डीजीपी के खिलाफ FIR की ईडी की माँग पर सुप्रीम कोर्ट आज करेगा सुनवाई

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आईपैक छापेमारी: ममता बनर्जी व पूर्व डीजीपी के खिलाफ FIR की ईडी की माँग पर सुप्रीम कोर्ट आज करेगा सुनवाई

सारांश

आईपैक दफ्तर में ईडी की तलाशी के दौरान कथित बाधा का मामला आज सर्वोच्च न्यायालय पहुँचा है। ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तत्कालीन डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के खिलाफ FIR दर्ज करने की माँग की है — और शीर्ष अदालत पहले ही कह चुकी है कि ऐसी दखलअंदाजी 'लोकतंत्र को खतरे में डालती है'।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय आज 22 मई 2026 को आईपैक छापेमारी मामले में ईडी की याचिका पर सुनवाई करेगा।
ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी , तत्कालीन डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश माँगे हैं।
तलाशी 8 जनवरी को कोयला तस्करी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जाँच के तहत आईपैक कार्यालय और सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर हुई थी।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ पहले ही मौखिक रूप से कह चुकी है कि मुख्यमंत्री द्वारा जाँच में दखल 'लोकतंत्र को खतरे में डालता है'।
ममता बनर्जी ने हलफनामे में आरोपों से इनकार किया; कहा — परिसर में उपस्थिति केवल TMC का गोपनीय चुनावी डेटा वापस लेने के लिए थी।

सर्वोच्च न्यायालय शुक्रवार, 22 मई 2026 को आईपैक छापेमारी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तत्कालीन पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के विरुद्ध FIR दर्ज करने के निर्देश देने की माँग की गई है। यह मामला कथित कोयला तस्करी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच के दौरान 8 जनवरी को हुई तलाशी में कथित रूप से बाधा डाले जाने से संबंधित है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने 8 जनवरी को राजनीतिक परामर्श फर्म 'इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी' (आईपैक) के कोलकाता स्थित कार्यालय और सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर तलाशी अभियान चलाया था। ये तलाशियाँ कथित कोयला तस्करी घोटाले से जुड़े करोड़ों रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जाँच के तहत की गई थीं।

एजेंसी का आरोप है कि तलाशी के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पुलिसकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आईपैक कार्यालय तथा प्रतीक जैन के आवास में घुस गईं और जाँच प्रक्रिया में बाधा डाली। ईडी का यह भी आरोप है कि उसके अधिकारियों को रोका गया और उन्हें कथित तौर पर डराया-धमकाया गया।

सुप्रीम कोर्ट की पिछली टिप्पणी

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने पिछली सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कड़ी टिप्पणी की थी। पीठ ने कहा था, 'यह अपने आप में राज्य और केंद्र के बीच का कोई विवाद नहीं है। यह अपने आप में एक ऐसे व्यक्ति की ओर से किया गया कृत्य है, जो संयोग से एक राज्य का मुख्यमंत्री है और जो पूरी व्यवस्था और लोकतंत्र को खतरे में डाल रहा है।' न्यायालय ने यह भी मौखिक रूप से रेखांकित किया कि किसी मौजूदा मुख्यमंत्री द्वारा चल रही जाँच में कथित दखलअंदाजी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

ममता बनर्जी का पक्ष

अपने जवाबी हलफनामे में ममता बनर्जी ने बाधा डालने के सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि परिसर में उनकी उपस्थिति सीमित और उद्देश्य-विशेष थी — तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़ा गोपनीय और मालिकाना डेटा वापस लेना। हलफनामे के अनुसार, उन्हें सूचना मिली थी कि तलाशी के दौरान 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की रणनीति से संबंधित संवेदनशील राजनीतिक डेटा देखा जा रहा था।

हलफनामे में यह भी दावा किया गया कि ईडी अधिकारियों ने कुछ डिवाइस और दस्तावेज वापस लेने की अनुमति दी, जिसके बाद तलाशी शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से जारी रही।

आगे क्या होगा

आज की सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय यह तय करेगा कि ईडी की FIR दर्ज कराने की माँग पर आगे क्या निर्देश दिए जाएँ। यह मामला न केवल संघीय जाँच एजेंसियों और राज्य सरकारों के बीच टकराव की व्यापक प्रवृत्ति को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी तय करेगा कि जाँच के दौरान कार्यपालिका के हस्तक्षेप की संवैधानिक सीमाएँ क्या हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मौखिक टिप्पणियाँ बाध्यकारी नहीं होतीं — आज का लिखित आदेश ही असली मानक तय करेगा। दूसरी ओर, ईडी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठते रहे हैं कि क्या राजनीतिक रूप से संवेदनशील तलाशियाँ पर्याप्त प्रक्रियागत सुरक्षा के साथ की जाती हैं। न्यायालय को दोनों पक्षों की जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईपैक छापेमारी मामला क्या है?
यह मामला 8 जनवरी को ईडी द्वारा राजनीतिक परामर्श फर्म आईपैक के कोलकाता कार्यालय और सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर की गई तलाशी से जुड़ा है। ये तलाशियाँ कथित कोयला तस्करी घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच के तहत की गई थीं।
ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में क्या माँग की है?
ईडी ने सर्वोच्च न्यायालय से माँग की है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तत्कालीन डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए जाएँ। एजेंसी का आरोप है कि तलाशी के दौरान इन लोगों ने जाँच में बाधा डाली और अधिकारियों को डराया-धमकाया।
ममता बनर्जी ने आरोपों पर क्या कहा है?
ममता बनर्जी ने अपने जवाबी हलफनामे में बाधा डालने के सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि वे परिसर में केवल TMC का गोपनीय चुनावी डेटा वापस लेने गई थीं, क्योंकि उन्हें सूचना मिली थी कि 2026 विधानसभा चुनाव की रणनीति से जुड़ा संवेदनशील डेटा देखा जा रहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर पहले क्या कहा था?
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने पिछली सुनवाई में मौखिक रूप से कहा था कि किसी मुख्यमंत्री द्वारा चल रही जाँच में कथित दखलअंदाजी 'पूरी व्यवस्था और लोकतंत्र को खतरे में डालती है'। यह टिप्पणी मौखिक थी और आज का आदेश इस मामले की दिशा तय करेगा।
आज की सुनवाई में क्या हो सकता है?
आज जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ईडी की FIR दर्ज कराने की माँग पर सुनवाई करेगी। न्यायालय दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर अगली कार्रवाई या आदेश पर निर्णय ले सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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