ईरानी राजनयिक इलाही की अपील: स्कूल हमले पर अमेरिका ने माफी नहीं माँगी, 168 बच्चों की गई थी जान
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि और वरिष्ठ राजनयिक अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में कहा कि ईरान के एक प्राथमिक विद्यालय पर हुए हमले के लिए अमेरिका ने आज तक माफी नहीं माँगी है। इलाही के अनुसार, 28 फरवरी को ईरान के मिनाब स्थित शजरे तैय्यबेह स्कूल पर हुए इस हमले में 168 निर्दोष बच्चों की मौत हुई थी और कुछ बच्चों के शव आज तक नहीं मिल सके। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस घटना की निंदा करने और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने की अपील की।
मुख्य घटनाक्रम
एनडीटीवी वर्ल्ड समिट के सत्र 'ए रीजन इन फ्लक्स: हू विल शेप द मिडिल ईस्ट्स फ्यूचर?' में बोलते हुए इलाही ने स्कूल हमले का विस्तार से ज़िक्र किया। उन्होंने कहा, 'उन्होंने ईरान पर हमला किया और 28 फरवरी को एक प्राथमिक स्कूल पर हमला कर 168 निर्दोष बच्चों की जान ले ली।' उनके अनुसार, कुछ बच्चों के शव अभी तक नहीं मिले हैं और उनके माता-पिता के पास अपने बच्चों की कब्र तक नहीं है जहाँ वे शोक मना सकें।
गौरतलब है कि इलाही ने स्वयं और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में दी गई मृतक संख्या में अंतर भी स्वीकार किया। उनके अनुसार, संयुक्त राष्ट्र ने इस घटना की जाँच के लिए एक समिति भेजी थी, जिसकी रिपोर्ट में 125 बच्चों की मौत बताई गई — जबकि इलाही ने स्वयं 168 का आँकड़ा उद्धृत किया।
अमेरिका पर आरोप और माफी की माँग
इलाही ने कहा, 'दुर्भाग्य से अमेरिका ने आज तक हमारे प्राथमिक स्कूल पर हमले जैसी बड़ी गलती के लिए माफी नहीं माँगी है।' उन्होंने दुनिया के सभी स्वतंत्र लोगों और मानवाधिकारों में विश्वास रखने वालों से अपील की कि वे ऐसी त्रासदियों की आलोचना करें — चाहे वे ईरान में हों या किसी भी अन्य देश में। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव और व्यापक संघर्ष जारी है।
खामेनेई के स्वास्थ्य पर प्रतिक्रिया
इलाही ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के स्वास्थ्य को लेकर चल रही अटकलों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि खामेनेई पूरी तरह स्वस्थ हैं और सक्रिय रूप से अपना कार्य कर रहे हैं। इलाही के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति ने पिछले सप्ताह सात घंटे लंबी बैठक खामेनेई के साथ की थी और संसद अध्यक्ष भी जल्द भारत आने वाले हैं।
फिलिस्तीन राजदूत की टिप्पणी
इसी चर्चा में भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला अबू शवेश ने कहा कि फिलिस्तीन 'इज़राइल के नरसंहार जैसे युद्ध' का सामना कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका इज़राइल को हथियारों और राजनीतिक समर्थन के माध्यम से मदद दे रहा है। अबू शवेश ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका ने छह बार वीटो का इस्तेमाल कर गाजा में हिंसा रोकने के प्रयासों को बाधित किया।
आगे क्या
इलाही की यह अपील ऐसे समय में आई है जब मध्य पूर्व में संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय राजनयिक दबाव की स्थिति लगातार बदल रही है। ईरान कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाता रहेगा और वैश्विक समर्थन जुटाने की कोशिश जारी रखेगा। इस मामले में अमेरिकी पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।