यूएनजीए में ईरान की आवाज: अराघची बोले — 'अन्यायपूर्ण युद्ध' झेल रहा है हमारा देश
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र की उच्च स्तरीय बैठक में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क पहुँचे, जहाँ उन्होंने स्पष्ट किया कि इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य वैश्विक मंच पर ईरानी नागरिकों के अधिकारों, हितों और उनके 'जायज पक्ष' को प्रस्तुत करना है। अराघची ने कहा कि यह दौरा ऐसे नाज़ुक समय में हो रहा है जब ईरान कथित तौर पर एक 'अन्यायपूर्ण युद्ध' का सामना कर रहा है और देश में हालात अब भी संघर्षपूर्ण बने हुए हैं।
यूएनजीए यात्रा का उद्देश्य
न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत में अराघची ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच है, जहाँ राष्ट्र अपना दृष्टिकोण वैश्विक समुदाय के सामने रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष की महासभा ईरान को अपने लोगों की पीड़ा और संघर्ष में जान गँवाने वाले नागरिकों की स्थिति दुनिया के सामने रखने का अवसर प्रदान करती है। इसमें उन्होंने मिनाब के एक स्कूल में मारे गए लोगों और देश के दिवंगत नेता का भी उल्लेख किया।
राष्ट्रपति पेजेश्कियन की भूमिका
अराघची ने बताया कि राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन स्वयं संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे। इस दौरे में वे ईरानी और अंतरराष्ट्रीय बुद्धिजीवियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे तथा विभिन्न मीडिया संस्थानों को साक्षात्कार देंगे। विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि इस चार से पाँच दिन के दौरे में कई देशों के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें होंगी, जिनमें ईरान के राष्ट्रीय हितों का पक्ष रखा जाएगा।
पश्चिमी देशों पर निशाना और इज़रायली कार्रवाई की निंदा
अराघची ने इस दौरान पश्चिमी देशों की तीखी आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि एक ही घटना में 168 मासूम बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाया गया। उनके अनुसार, इज़रायल की इस कार्रवाई की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्याप्त गंभीरता से निंदा नहीं की गई, जो उनके लिए गहरी चिंता का विषय है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है।
यूएनजीए की थीम और बहुपक्षीय बैठकें
अराघची ने बताया कि इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा की थीम है — 'भरोसा फिर से कायम करना, बदलाव को संभालना: ऐसा संयुक्त राष्ट्र जो सभी के लिए काम करे।' उन्होंने कहा कि यह थीम इस पर विचार-विमर्श का अवसर देती है कि संयुक्त राष्ट्र पर देशों और नागरिकों का भरोसा क्यों घटा है और इसे पुनर्स्थापित करने के उपाय क्या हो सकते हैं। गौरतलब है कि इस यात्रा के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) और गुटनिरपेक्ष आंदोलन (एनएएम) की बैठकों में भी भाग लेगा।
व्यापक परिप्रेक्ष्य
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों का दबाव जारी है और क्षेत्रीय स्तर पर कई मोर्चों पर तनाव बना हुआ है। यूएनजीए जैसे मंच पर उपस्थिति ईरान की कूटनीतिक सक्रियता का संकेत देती है। आगे देखना होगा कि राष्ट्रपति पेजेश्कियन के महासभा संबोधन और द्विपक्षीय बैठकों से ईरान की अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ता है।