UNGA 2026: ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन बोले — बल प्रयोग से किसी को नहीं झुकाया जा सकता
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने 22 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क रवाना होने से पहले स्पष्ट रूप से कहा कि ताकत का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए और बल प्रयोग के ज़रिये किसी भी देश या उसकी जनता को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्र में भाग लेने से पहले दिए गए इस बयान को ईरानी सरकारी मीडिया ने प्रसारित किया।
UNGA में ईरान का एजेंडा
पेजेश्कियन ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ईरान के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने बताया कि वे वहाँ ईरानी जनता की शिकायतों, उनके अनुसार हुई घटनाओं और पैदा हुए अविश्वास का मुद्दा प्रमुखता से उठाएँगे। तस्नीम न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, उन्होंने कहा कि यह मंच दुनिया के सामने क्षेत्र की वास्तविकताओं और ईरानी जनता की आवाज़ रखने का मौका है।
टूटे समझौतों पर सीधा आरोप
पेजेश्कियन ने कहा, 'हम कई बार बातचीत की मेज पर गए और समझौतों पर हस्ताक्षर किए, लेकिन दुर्भाग्य से पूरी दुनिया ने देखा कि किस तरह प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं किया गया और लिखित समझौतों का उल्लंघन किया गया।' उनका यह बयान स्पष्ट रूप से 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) की ओर इशारा करता है, जिससे अमेरिका 2018 में एकतरफा हट गया था। यह ऐसे समय में आया है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच परमाणु कूटनीति का भविष्य अभी भी अधर में है।
क्षेत्रीय संकट और दबाव की रणनीति पर आरोप
ईरानी राष्ट्रपति ने गाज़ा, फिलिस्तीन, सीरिया, यमन और ईरान सहित विभिन्न क्षेत्रों में जारी घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि ये घटनाएँ दुनिया के सामने कई कड़वी वास्तविकताएँ उजागर कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान के विरोधी सैन्य माध्यमों से अपने उद्देश्य हासिल करने में विफल रहने के बाद अब अन्य तरीकों का सहारा ले रहे हैं।
पेजेश्कियन ने कहा, 'ईरान पर दबाव बनाने के लिए विरोधी ज़मीन और हवाई मार्गों को बाधित करने, आंतरिक विभाजन को बढ़ावा देने, मीडिया और जातीय समूहों का इस्तेमाल करने तथा देश की कमज़ोरियों का अधिकतम फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।' उनके अनुसार, इन प्रयासों का लक्ष्य ईरान को भीतर से कमज़ोर करना है।
विदेश मंत्री भी न्यूयॉर्क पहुँचे
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी न्यूयॉर्क पहुँच चुके हैं। इस यात्रा को मौजूदा क्षेत्रीय संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने ईरान का पक्ष रखने के एक अहम कूटनीतिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है और ईरान पर पश्चिमी प्रतिबंधों का दबाव लगातार बना हुआ है।
आगे क्या
पेजेश्कियन का UNGA संबोधन ईरान की कूटनीतिक दिशा का अगला अध्याय होगा — खासकर यह देखते हुए कि परमाणु वार्ता, क्षेत्रीय संघर्ष और आर्थिक प्रतिबंध तीनों एक साथ सक्रिय हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इस मंच का उपयोग वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों तक अपनी आवाज़ पहुँचाने के लिए करेगा।