केशव प्रसाद मौर्य का अखिलेश पर हमला: 'धीरेंद्र शास्त्री पर टिप्पणी का अधिकार नहीं, माफी माँगें'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 6 नवंबर 2026 को लखनऊ में दीपावली पर्व की शुभकामनाएँ देते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा प्रहार किया। मौर्य ने कहा कि अखिलेश यादव को बागेश्वर धाम सरकार के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर राजनीतिक टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है और उन्होंने सपा प्रमुख से अपने बयान पर सार्वजनिक माफी माँगने की माँग की।
मुख्य घटनाक्रम
दीपावली पंचपर्व के अवसर पर मीडिया से बात करते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने अयोध्या धाम के दीपोत्सव और प्रयागराज स्थित महर्षि भारद्वाज आश्रम में आयोजित दीप पर्व का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह धार्मिक स्थल वह पवित्र भूमि है जहाँ भगवान श्रीराम ने महर्षि भारद्वाज से आशीर्वाद लिया था।
इसी संदर्भ में उन्होंने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और अखिलेश यादव के बीच हाल में हुई बयानबाज़ी को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। मौर्य ने कहा कि शास्त्री के प्रति देश और विदेश में बसे करोड़ों लोगों के मन में आस्था और श्रद्धा है, और ऐसे संत पर राजनीतिक टिप्पणी करना सर्वथा अनुचित है।
सनातन संस्कृति पर सवाल
मौर्य ने अखिलेश यादव से सीधा सवाल किया कि उन्हें भारतीय और सनातन संस्कृति की चिंता अचानक कब से होने लगी? उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव खुद को यदुवंशी कहलाने का अधिकार तो चाहते हैं, लेकिन जब भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का प्रश्न उठता है, तो वे मौन हो जाते हैं।
मौर्य ने यह भी स्पष्ट किया कि साधु-संतों के विचार धार्मिक क्षेत्र का विषय हैं, राजनीति का नहीं। उनके अनुसार किसी संत पर प्रतिक्रिया देने का अधिकार पूज्य आचार्यों और सनातन परंपरा के रखवालों को है, न कि राजनीतिक नेताओं को।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि आंदोलन में शामिल होने की चुनौती
उपमुख्यमंत्री ने अखिलेश यादव को एक सीधी चुनौती दी — यदि उन्हें वास्तव में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी आस्था की चिंता है, तो वे मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण से जुड़े आंदोलन में शामिल हों। मौर्य ने कहा कि यदि सपा प्रमुख ऐसा करते हैं, तो वे उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होंगे।
वोट बैंक की राजनीति पर आरोप
मौर्य ने अखिलेश यादव पर मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति और तुष्टिकरण का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख मुस्लिम वोट बैंक की चिंता के कारण कृष्ण भक्तों, शिव भक्तों और राम भक्तों का साथ देने में असमर्थ हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में धर्म और पहचान के मुद्दों को एक बार फिर केंद्र में ला रहे हैं।
आगे की राजनीतिक दिशा
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की रणनीतिक तैयारियाँ पृष्ठभूमि में जारी हैं। धार्मिक आस्था और राजनीतिक बयानबाज़ी का यह मेल आने वाले दिनों में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच टकराव की एक नई धुरी बन सकता है।