6 नवंबर 2026
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कल्पना फाइनेंशियल केस: ईडी की ओडिशा-बंगाल में 11 ठिकानों पर छापेमारी, ₹4.5 करोड़ फ्रीज़

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कल्पना फाइनेंशियल केस: ईडी की ओडिशा-बंगाल में 11 ठिकानों पर छापेमारी, ₹4.5 करोड़ फ्रीज़

सारांश

कल्पना फाइनेंशियल केस में ईडी ने ओडिशा-बंगाल में एक साथ 11 ठिकानों पर छापे मारे, ₹4.5 करोड़ फ्रीज़ किए और मुख्य आरोपी अमित मंडल को बेंगलुरु में ट्रेस किया। ₹120 करोड़ की कथित पोंज़ी स्कीम में हाथी के जबड़े भी बरामद — मामला जितना दिखता है उससे कहीं ज़्यादा पेचीदा है।

मुख्य बातें

ईडी ने 6 नवंबर 2026 को PMLA के तहत ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 11 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।
36 बैंक खातों में जमा ₹4.5 करोड़ और एक लॉकर फ्रीज़ किया गया; अहम दस्तावेज़ और डिजिटल डिवाइस ज़ब्त।
संदिग्ध ईश्वर चंद्र बिंधानी के घर से हाथी के जबड़े और सांभर हिरण के सींग मिले; वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत अलग कार्रवाई।
स्कीम में निवेशकों को 3.5% से 7% मासिक रिटर्न का वादा; संदिग्धों के खातों में कुल ₹120 करोड़ जमा पाए गए।
मुख्य आरोपी अमित मंडल को बेंगलुरु में ट्रेस कर PMLA के तहत बयान दर्ज किया गया।
मामला ओडिशा पुलिस EOW की एफआईआर के आधार पर; जाँच जारी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भुवनेश्वर जोनल ऑफिस ने 6 नवंबर 2026 को कल्पना फाइनेंशियल सर्विसेज से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 11 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई इस कार्रवाई में अलग-अलग बैंकों के 36 खातों में जमा लगभग ₹4.5 करोड़ की राशि और एक लॉकर को फ्रीज़ कर दिया गया।

छापेमारी में क्या मिला

ईडी ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि तलाशी के दौरान कई अहम दस्तावेज़ और डिजिटल डिवाइस ज़ब्त किए गए। संदिग्ध ईश्वर चंद्र बिंधानी के घर की तलाशी के दौरान वन्यजीवों के अवशेषों का संदेह पैदा करने वाली कुछ वस्तुएँ भी बरामद हुईं। इसकी सूचना तुरंत बारीपदा के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) को दी गई।

वन विभाग की जाँच में पाया गया कि ये वस्तुएँ हाथी के दो जबड़े और एक हड्डी तथा सांभर हिरण के सींगों के छह टुकड़े हो सकती हैं। इसके आधार पर वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत अलग कार्रवाई की गई — जो इस वित्तीय धोखाधड़ी मामले में एक अप्रत्याशित मोड़ है।

धोखाधड़ी की स्कीम कैसे काम करती थी

यह मामला कथित निवेश धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसमें लोगों को शेयर बाज़ार और ट्रेडिंग गतिविधियों के ज़रिए हर महीने 3.5% से 7% तक का निश्चित रिटर्न देने का लालच दिया गया। ईडी की जाँच के अनुसार, अमित मंडल ने कल्पना कंसल्टेंसी सर्विसेज, मुरली कंसल्टेंसी सर्विसेज, और कल्पमित कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों के ज़रिए यह स्कीम संचालित की।

निवेशकों को लुभाने के लिए प्रचार बैठकें, व्हाट्सएप पर संवाद और रेफरल नेटवर्क का सहारा लिया गया। एजेंटों, परिचयकर्ताओं और स्थानीय समन्वयकों का एक संगठित नेटवर्क तैयार किया गया था। निवेशकों को समझौते और भविष्य की तारीख वाले चेक दिए गए, और शुरुआती भुगतान ने और अधिक निवेश को प्रोत्साहित किया।

आरोपों के अनुसार, रिटर्न का भुगतान और मूल राशि की वापसी कथित तौर पर जुलाई 2024 के आसपास बंद हो गई। स्कीम के संचालन के दौरान संदिग्ध व्यक्तियों के खातों में कुल ₹120 करोड़ जमा पाए गए।

मुख्य आरोपी की तलाश और गिरफ्तारी

पश्चिम बंगाल के बांकुरा स्थित अमित मंडल के कार्यालय परिसर में तलाशी के दौरान पता चला कि वह वह जगह छोड़ चुका था और अपनी पहले से ज्ञात किसी भी जगह पर मौजूद नहीं था। इसके बाद तकनीकी निगरानी के ज़रिए उसका पता लगाया गया।

जाँच में सामने आया कि मंडल कर्नाटक के बेंगलुरु में था, जहाँ उसे ढूंढ लिया गया और PMLA के तहत उसका बयान दर्ज किया गया। यह मामला ओडिशा पुलिस की आर्थिक अपराध विंग (EOW), भुवनेश्वर द्वारा अमित मंडल, संजय कुमार सामल, ईश्वर चंद्र बिंधानी, श्रीकांत मल्लिक, पार्थ सारथी महापात्रा और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुआ था।

आगे की जाँच

ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले से संबंधित जाँच अभी जारी है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पोंज़ी और छद्म निवेश स्कीमों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियाँ सक्रियता से कार्रवाई कर रही हैं। ₹120 करोड़ की कथित धोखाधड़ी की व्यापकता और एकाधिक राज्यों में फैले नेटवर्क को देखते हुए, आगे और गिरफ्तारियाँ और संपत्ति कुर्की की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे बहु-एजेंसी समन्वय की ज़रूरत और स्पष्ट होती है। तलाशी में वन्यजीव अवशेषों का मिलना एक अलग आपराधिक आयाम उजागर करता है, जो जाँच को और जटिल बना सकता है। असली सवाल यह है कि जुलाई 2024 में भुगतान बंद होने के बाद भी ईडी की कार्रवाई में डेढ़ वर्ष से अधिक का समय क्यों लगा।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कल्पना फाइनेंशियल सर्विसेज केस क्या है?
यह ओडिशा और पश्चिम बंगाल में फैली एक कथित निवेश धोखाधड़ी का मामला है, जिसमें अमित मंडल और अन्य आरोपियों पर शेयर बाज़ार और ट्रेडिंग के नाम पर हर महीने 3.5% से 7% तक का निश्चित रिटर्न देने का वादा कर निवेशकों से पैसा लेने का आरोप है। संदिग्धों के खातों में कुल ₹120 करोड़ जमा पाए गए हैं।
ईडी ने किन-किन जगहों पर छापेमारी की?
ईडी के भुवनेश्वर जोनल ऑफिस ने 6 नवंबर 2026 को ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 11 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। बांकुरा (पश्चिम बंगाल) में मुख्य आरोपी अमित मंडल के कार्यालय परिसर सहित कई संदिग्धों के घर और कार्यालय इस अभियान में शामिल थे।
ईडी की छापेमारी में क्या बरामद हुआ?
तलाशी में कई अहम दस्तावेज़ और डिजिटल डिवाइस ज़ब्त किए गए तथा 36 बैंक खातों में जमा लगभग ₹4.5 करोड़ और एक लॉकर फ्रीज़ किया गया। इसके अलावा ईश्वर चंद्र बिंधानी के घर से हाथी के जबड़े और सांभर हिरण के सींग होने का संदेह पैदा करने वाली वस्तुएँ भी मिलीं, जिन पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अलग कार्रवाई की गई।
मुख्य आरोपी अमित मंडल को कहाँ और कैसे पकड़ा गया?
बांकुरा स्थित अमित मंडल का कार्यालय खाली मिला और वह अपनी ज्ञात जगहों पर भी नहीं था। तकनीकी निगरानी के ज़रिए पता चला कि वह कर्नाटक के बेंगलुरु में है, जहाँ उसे ट्रेस कर PMLA के तहत उसका बयान दर्ज किया गया।
इस मामले में किन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज है?
ओडिशा पुलिस की आर्थिक अपराध विंग (EOW), भुवनेश्वर ने अमित मंडल, संजय कुमार सामल, ईश्वर चंद्र बिंधानी, श्रीकांत मल्लिक, पार्थ सारथी महापात्रा और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की है। ईडी ने इसी FIR के आधार पर PMLA के तहत अपनी जाँच शुरू की है।
राष्ट्र प्रेस
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