4 नवंबर 2026
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धीरेंद्र शास्त्री विवाद: अखिलेश यादव बोले — उप्र-मप्र सीमा पर लगे 'ईशनिंदा करने वालों का प्रवेश वर्जित' का बोर्ड

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धीरेंद्र शास्त्री विवाद: अखिलेश यादव बोले — उप्र-मप्र सीमा पर लगे 'ईशनिंदा करने वालों का प्रवेश वर्जित' का बोर्ड

सारांश

कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री की राम-कृष्ण तुलना वाली टिप्पणी ने राजनीतिक आग भड़का दी है। अखिलेश यादव ने उप्र-मप्र सीमा पर 'ईशनिंदा करने वालों का प्रवेश वर्जित' बोर्ड की माँग की। माफी के बावजूद विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा और 2027 चुनावों से पहले यह धार्मिक-राजनीतिक टकराव नई करवट ले रहा है।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने 4 नवंबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर धीरेंद्र शास्त्री पर बिना नाम लिए निशाना साधा।
यादव ने उप्र-मप्र सीमा पर 'ईशनिंदा करने वालों का प्रवेश वर्जित' का बोर्ड लगाने की माँग की।
विवाद की जड़ शास्त्री की वह टिप्पणी है जिसमें उन्होंने भगवान राम को 'सीधा' और भगवान श्रीकृष्ण को 'टेढ़ा' बताया था।
धीरेंद्र शास्त्री ने विवाद बढ़ने के बाद हाथ जोड़कर माफी माँगी और कहा कि राम-कृष्ण में कोई भेद नहीं।
अखिलेश ने इसे उत्तर प्रदेश में 'बाहरी इशारे पर राजनीतिक-धार्मिक सत्ता को चुनौती' देने का प्रयास बताया।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 4 नवंबर 2026 को बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री पर बिना नाम लिए तीखा प्रहार किया और माँग की कि उत्तर प्रदेश-मध्य प्रदेश की सीमा पर एक बोर्ड लगाया जाए जिस पर लिखा हो कि 'ईशनिंदा करने वालों का उत्तर प्रदेश की धर्म-भूमि पर प्रवेश वर्जित है।' यह विवाद मध्य प्रदेश में आयोजित एक श्रीराम कथा के दौरान शास्त्री की उस टिप्पणी के बाद भड़का, जिसमें उन्होंने भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण की तुलना की थी।

क्या था विवाद की जड़

मध्य प्रदेश में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए कहा था कि 'उनके राम सीधे हैं, जबकि कृष्ण टेढ़े।' उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के नाम, स्वरूप और चाल-ढाल को टेढ़ा बताया, जबकि भगवान राम को हर लिहाज से सीधा कहा। इस बयान के सामने आते ही धार्मिक और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएँ शुरू हो गईं।

अखिलेश यादव की तीखी प्रतिक्रिया

सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'इन्होंने यदुवंशियों और रघुवंशियों दोनों की भावनाएँ आहत की हैं। अब इन्हें न ब्रज में प्रवेश मिलेगा, न अवध में। अब न तो कोई सच्चा रघुवंशी इनका स्वागत करेगा, न सच्चा यदुवंशी। उप्र-मप्र के बॉर्डर पर इनकी नाकाबंदी का बोर्ड लग जाना चाहिए, जिस पर लिखा हो — ईशनिंदा करने वालों का उप्र की धर्म-भूमि पर प्रवेश वर्जित है।'

यादव ने आगे चेतावनी देते हुए लिखा, 'जिसने धर्म-मजहब नहीं छोड़ा, वो अगली बार सम्प्रदायों पर छींटाकशी करने से बाज नहीं आएगा। नेपाल बॉर्डर भी बंद करना पड़ेगा, नहीं तो उधर से इधर आना अधिक पास पड़ेगा।'

राजनीतिक-धार्मिक टकराव का आरोप

अखिलेश यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को व्यापक राजनीतिक संदर्भ से जोड़ते हुए कहा, 'लगता है उत्तर प्रदेश में किसी बाहरी के इशारे पर किसी की राजनीतिक-धार्मिक सत्ता को चुनौती देने का काम हो रहा है। आपस की टकराहट में सियासी लोग भगवान को क्यों ला रहे हैं।' यह बयान यूपी की राजनीति में धर्म के बढ़ते उपयोग को लेकर उनकी चिंता को दर्शाता है। गौरतलब है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले इस तरह के धार्मिक विवाद राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो जाते हैं।

धीरेंद्र शास्त्री की माफी

विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने अपने बयान पर खेद जताते हुए हाथ जोड़कर माफी माँगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण एक ही हैं और दोनों के बीच किसी प्रकार का अंतर नहीं है। उनका कहना था कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य दोनों आराध्यों के बीच भेद पैदा करना या किसी तरह का विभाजन करना कदापि नहीं था।

आगे क्या

माफी के बावजूद राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ थमती नहीं दिख रहीं। सपा के अलावा अन्य दलों और धार्मिक संगठनों की ओर से भी प्रतिक्रियाएँ आने की संभावना है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार और भाजपा इस विवाद पर आधिकारिक रुख अपनाती है या इसे धार्मिक संवेदनशीलता के रूप में अनदेखा करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे स्वयं ब्रज और अवध की 'धर्म-भूमि' का हवाला देकर वही काम कर रहे हैं। धीरेंद्र शास्त्री की माफी के बाद भी विवाद को जीवित रखना यह दर्शाता है कि सपा इस मुद्दे को चुनावी पूँजी में बदलने की कोशिश में है। मुख्यधारा की कवरेज माफी पर केंद्रित है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या उप्र में धार्मिक भावनाएँ किसी एक दल की एकाधिकार संपत्ति बन रही हैं।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान कृष्ण के बारे में क्या विवादित बात कही थी?
मध्य प्रदेश में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए कहा था कि 'उनके राम सीधे हैं, जबकि कृष्ण टेढ़े।' उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के नाम, स्वरूप और चाल-ढाल को भी इसी संदर्भ में टेढ़ा बताया था।
अखिलेश यादव ने धीरेंद्र शास्त्री पर क्या माँग की?
अखिलेश यादव ने माँग की कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर एक बोर्ड लगाया जाए जिस पर लिखा हो कि 'ईशनिंदा करने वालों का उप्र की धर्म-भूमि पर प्रवेश वर्जित है।' उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे लोगों को न ब्रज में प्रवेश मिलेगा और न अवध में।
क्या धीरेंद्र शास्त्री ने अपने बयान पर माफी माँगी?
हाँ, विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने हाथ जोड़कर माफी माँगी और खेद जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान राम और श्रीकृष्ण एक ही हैं और उनकी टिप्पणी का उद्देश्य दोनों आराध्यों में भेद करना नहीं था।
अखिलेश यादव ने इस विवाद को राजनीतिक रूप से कैसे जोड़ा?
अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में किसी बाहरी के इशारे पर किसी की राजनीतिक-धार्मिक सत्ता को चुनौती देने का काम हो रहा है। उन्होंने सवाल किया कि आपसी टकराहट में सियासी लोग भगवान को क्यों ला रहे हैं।
इस विवाद का उत्तर प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले यह धार्मिक विवाद यदुवंशी और रघुवंशी मतदाताओं को प्रभावित कर सकता है। समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को सत्ताधारी दल के खिलाफ भावनात्मक लाभ उठाने के लिए उपयोग करती दिख रही है।
राष्ट्र प्रेस
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