धीरेंद्र शास्त्री की कृष्ण टिप्पणी पर सियासी तूफान, अखिलेश-तेजस्वी-महुआ ने घेरा; माफी के बाद भी विवाद जारी
सारांश
मुख्य बातें
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री द्वारा मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण की तुलना में की गई एक टिप्पणी ने देशव्यापी विवाद खड़ा कर दिया है। 3 नवंबर 2026 को यह मामला तब तूल पकड़ गया जब धीरेंद्र शास्त्री द्वारा भगवान कृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा को 'टेढ़ा' बताने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। बाद में उन्होंने हाथ जोड़कर माफी माँगी, लेकिन विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
विवाद की जड़ क्या है
करैरा में श्रीराम कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए कृष्ण के खड़े होने के अंदाज — जिसे आध्यात्मिक परंपरा में त्रिभंगी मुद्रा कहा जाता है — को 'टेढ़ा' बताया। इस बयान का वीडियो क्लिप वायरल होते ही धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर तीखी प्रतिक्रियाएँ शुरू हो गईं।
गौरतलब है कि त्रिभंगी मुद्रा — जिसमें भगवान कृष्ण तीन स्थानों पर मुड़कर खड़े होते हैं — वैष्णव परंपरा में सर्वोच्च भक्ति और माधुर्य भाव का प्रतीक मानी जाती है। आलोचकों का कहना है कि इस पवित्र स्वरूप की व्याख्या को सांसारिक भाषा में सीमित करना धार्मिक भावनाओं का अनादर है।
विपक्षी नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'मानवीय भूलों के लिए तो क्षमा किया जा सकता है, ईशनिंदा के लिए कभी नहीं।' उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के सभी कार्यक्रम रद्द करने, नई अनुमति न देने और सार्वजनिक बहिष्कार की माँग की। यादव ने वैधानिक कार्रवाई की भी अपील की।
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने लिखा कि भगवान श्रीकृष्ण पर की गई यह टिप्पणी 'अशोभनीय, अक्षम्य एवं अमर्यादित' है। उन्होंने आगे कहा कि 'राम और कृष्ण एक-दूसरे के पूरक हैं' और इस विवाद के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं तथा प्रधानमंत्री से सार्वजनिक माफी की माँग की।
शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने एक्स पर लिखा कि संत सूरदास और गोस्वामी तुलसीदास के संवाद में कभी एक अवतार को दूसरे से श्रेष्ठ नहीं बताया गया। उन्होंने कहा, 'पवित्र त्रिभंगी मुद्रा को टेढ़ापन कहना उसके गहन आध्यात्मिक सौंदर्य और भाव को छीन लेने जैसा है।'
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने एक्स पर BJP से सीधा सवाल किया कि यदि कोई और ऐसा कहता तो पार्टी हंगामा करती, लेकिन अभी 'खामोशी क्यों है?'
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस बयान की आलोचना करते हुए कहा कि 'हिंदू-हिंदू करते करते यह ढोंगी बाबा हिंदुओं के आराध्य देवी-देवताओं की खिल्ली उड़ाने लगा।'
धीरेंद्र शास्त्री की सफाई और माफी
विवाद के तेज होने पर धीरेंद्र शास्त्री ने एक वीडियो जारी कर हाथ जोड़कर माफी माँगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी बात का 'गलत अर्थ निकाला गया' और वे केवल विनोद तथा भक्ति रस में ऐसी बातें कह रहे थे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था।
हालाँकि यह सफाई विपक्षी दलों को संतुष्ट नहीं कर सकी। अखिलेश यादव ने माफी को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि 'अगर दुर्भावना से भरा ऐसा व्यक्ति जीवन भर भी एकांतवास करके पश्चाताप करे, तो भी कोई भी धर्मप्रधान आस्थावान उसे माफ नहीं करेगा।'
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य और व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब धार्मिक-राजनीतिक विमर्श पर देशभर में पहले से ही तीखी बहस चल रही है। धीरेंद्र शास्त्री पिछले कुछ वर्षों में अपने विवादास्पद बयानों के कारण चर्चा में रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस प्रकार के धार्मिक प्रवचन जब राजनीतिक संरक्षण के साए में दिए जाते हैं, तब उनका सामाजिक प्रभाव कहीं अधिक संवेदनशील हो जाता है।
विपक्षी दलों ने BJP से जवाब माँगा है कि वह अपने 'करीबी' माने जाने वाले धार्मिक व्यक्तित्वों के बयानों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे। अब तक BJP की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
आगे क्या होगा
माफी के बाद भी सोशल मीडिया पर विवाद जारी है और कई विपक्षी नेताओं ने वैधानिक कार्रवाई की माँग दोहराई है। यह देखना होगा कि क्या संबंधित राज्य या केंद्र सरकार इस मामले में कोई कदम उठाती है। धार्मिक भावनाओं और अभिव्यक्ति की सीमा से जुड़ी यह बहस आने वाले दिनों में और गहरी हो सकती है।