6 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नेहा बोरा पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का हमला: 'माओवादी विचारधारा से प्रभावित, संविधान विरोधी संगठन'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नेहा बोरा पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का हमला: 'माओवादी विचारधारा से प्रभावित, संविधान विरोधी संगठन'

सारांश

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा को माओवादी विचारधारा से जोड़ा, विपक्षी नेताओं को 'पेशेवर आंदोलनकारी' कहा, और 1966 के गो हत्या विरोधी दंगों के ज़रिए कांग्रेस को घेरा। साथ ही बांग्लादेशी प्रवासियों के नाम मतदाता सूची से हटाने का बचाव किया।

मुख्य बातें

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने 6 नवंबर 2026 को आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा पर माओवादी विचारधारा से प्रभावित होने का आरोप लगाया।
दुबे का दावा — आइसा ने धारा 167 के तहत एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें कथित तौर पर सशस्त्र बल से सरकार बदलने की बात है।
उन्होंने प्रशांत भूषण, वृंदा करात और योगेंद्र यादव को 'पेशेवर आंदोलनकारी' करार दिया।
7 नवंबर 1966 के गो हत्या विरोधी दंगों और गोलवलकर की जाँच समिति में भूमिका का हवाला देकर राहुल गांधी को चुनौती दी।
बांग्लादेश से आए कथित चार करोड़ लोगों को मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया का बचाव किया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे ने शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा पर गंभीर आरोप लगाए। दुबे ने दावा किया कि नेहा बोरा माओवादी विचारधारा से प्रभावित हैं और उनका संगठन कथित तौर पर संविधान तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं का विरोध करता है। ये आरोप नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान लगाए गए।

मुख्य आरोप और दावे

दुबे ने आरोप लगाया कि आइसा के सदस्यों ने धारा 167 के तहत एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें कथित तौर पर सशस्त्र बल के ज़रिए सरकार बदलने की बात कही गई है। उन्होंने कहा, "उन्होंने धारा 167 के तहत एक प्रस्ताव पास किया, जिसमें कहा गया है कि वे संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ हैं और देश में सशस्त्र बल के ज़रिए सरकार बदलना चाहते हैं। वे चीन की 'रेड आर्मी' से प्रभावित हैं।"

गौरतलब है कि नेहा बोरा या आइसा की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। दुबे के ये आरोप राजनीतिक रूप से विवादास्पद हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है।

विपक्षी नेताओं पर 'पेशेवर आंदोलनकारी' का तंज़

दुबे ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों में शामिल रहने वाले कई जाने माने चेहरों को 'पेशेवर आंदोलनकारी' करार दिया। उन्होंने वकील प्रशांत भूषण, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की नेता वृंदा करात और राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि ये लोग परमाणु समझौते, नर्मदा आंदोलन सहित तमाम सरकार विरोधी प्रदर्शनों में नियमित रूप से शामिल होते हैं।

दुबे ने कहा, "जब भी कोई विरोध प्रदर्शन होता है तो ये लोग वहाँ ज़रूर दिखते हैं। इनमें से कुछ लोगों को विरोध प्रदर्शन करने की आदत सी हो गई है।"

कांग्रेस और आरएसएस पर ऐतिहासिक सवाल

दुबे ने 7 नवंबर 1966 के 'गो हत्या विरोधी दंगों' का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की ऐतिहासिक जवाबदेही पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसद के बाहर हुए उस प्रदर्शन में कथित तौर पर हज़ारों साधुओं की जान गई थी।

इस संदर्भ में उन्होंने एक विरोधाभास उजागर किया — कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मामले की जाँच के लिए बनी समिति में तत्कालीन आरएसएस सरसंघचालक एम.एस. गोलवलकर को शामिल किया था। दुबे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को चुनौती दी कि अगर कांग्रेस आरएसएस को अस्वीकार्य मानती है, तो उस समय गोलवलकर को समिति में क्यों शामिल किया गया?

मतदाता सूची पुनरीक्षण और अवैध प्रवासियों का मुद्दा

दुबे ने चुनाव आयोग (ECI) द्वारा चलाए जा रहे 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) का बचाव किया। उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश से आकर भारत में बसे कथित तौर पर चार करोड़ लोगों की पहचान की जा रही है, ताकि उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मृत मतदाताओं और दोहराव वाले नामों को भी इस प्रक्रिया में हटाया जाएगा।

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष एसआईआर प्रक्रिया पर मतदाताओं को बेवजह सूची से हटाने के आरोप लगा रहा है।

त्रिपुरा और कश्मीर: कांग्रेस के फैसलों पर हमला

दुबे ने टिपरा मोथा नेता प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देब बर्मा की टिप्पणियों का हवाला देते हुए पूर्व रियासत त्रिपुरा का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप था कि आज़ादी के वक्त शाही परिवार से उचित सलाह लिए बिना हिंदू बहुसंख्यक इलाकों को पाकिस्तान को सौंप दिया गया। उन्होंने कश्मीर और चीन के साथ सीमा विवादों की जड़ें भी कांग्रेसी निर्णयों में बताईं।

इन तमाम बयानों के बाद अब राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज़ होने की संभावना है, और विपक्ष की ओर से जवाबी हमले की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विपक्षी नेताओं को 'पेशेवर आंदोलनकारी' कहना और कांग्रेस आरएसएस के ऐतिहासिक संबंध का मुद्दा उठाना, ये सब एक ही भाषण में समेट देना — यह मुख्यधारा की रिपोर्टिंग में अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाता है। आरोप गंभीर हैं, लेकिन इन्हें किसी स्वतंत्र जाँच या न्यायिक प्रक्रिया का आधार नहीं बताया गया। आइसा या नेहा बोरा की प्रतिक्रिया के बिना यह एकतरफा बयानबाज़ी बनी रहेगी। एसआईआर पर दुबे का बचाव भी उस बड़े विवाद से अलग नहीं किया जा सकता जिसमें विपक्ष वैध मतदाताओं के नाम हटने की शिकायत कर रहा है।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निशिकांत दुबे ने नेहा बोरा पर क्या आरोप लगाए हैं?
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा पर माओवादी विचारधारा से प्रभावित होने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि आइसा ने धारा 167 के तहत एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें कथित तौर पर सशस्त्र बल के ज़रिए सरकार बदलने की बात कही गई है।
आइसा (AISA) क्या है और नेहा बोरा कौन हैं?
'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (आइसा) एक वाम झुकाव वाला छात्र संगठन है। नेहा बोरा इसकी वर्तमान अध्यक्ष हैं और वे हाल के समय में विभिन्न विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रही हैं।
दुबे ने गोलवलकर और कांग्रेस का मुद्दा क्यों उठाया?
दुबे ने 7 नवंबर 1966 के गो हत्या विरोधी दंगों की जाँच समिति में आरएसएस के तत्कालीन सरसंघचालक एम.एस. गोलवलकर की भूमिका का हवाला देकर कांग्रेस की 'आरएसएस विरोधी' छवि पर सवाल उठाया। उन्होंने राहुल गांधी को चुनौती दी कि अगर कांग्रेस आरएसएस को अस्वीकार्य मानती है, तो उस समय गोलवलकर को समिति में क्यों रखा गया।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर दुबे का क्या रुख है?
दुबे ने एसआईआर प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि इसका मकसद मृत मतदाताओं, दोहराव वाले नामों और कथित तौर पर बांग्लादेश से आए चार करोड़ अवैध प्रवासियों को सूची से हटाना है। उन्होंने कहा कि असली भारतीय मतदाताओं को इससे कोई खतरा नहीं है।
क्या नेहा बोरा या आइसा ने इन आरोपों का जवाब दिया है?
दुबे के बयान के तुरंत बाद नेहा बोरा या आइसा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। ये आरोप राजनीतिक हैं और इन्हें अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 3 सप्ताह पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले