नेहा बोरा के 'बांग्लादेश क्रांति' बयान पर सियासी घमासान, भाजपा बोली — विदेशी फंडिंग से अस्थिरता की साज़िश
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष नेहा बोरा के बयान — 'बांग्लादेश ने क्रांति का रास्ता दिखाया है' — ने 15 अक्टूबर 2026 को देश की राजनीति में नया तूफ़ान खड़ा कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बयान को 'देश विरोधी' करार देते हुए विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक, आम आदमी पार्टी (AAP) और सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) पर विदेशी ताकतों के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है। यह विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ जारी विरोध-प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में और गहरा हो गया है।
भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया
कोलकाता से भाजपा सांसद राहुल सिन्हा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, 'राहुल गांधी जो कर रहे हैं, वह विदेशी ताकतों और विदेशी फंडिंग की मदद से देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश है। लेकिन यह बांग्लादेश, श्रीलंका या नेपाल नहीं है। यह भारत है। भारतीय लोगों के दिलों में लोकतंत्र गहराई से बसा हुआ है और हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके दिलों में एक खास जगह रखते हैं।' राहुल सिन्हा ने यह भी कहा कि 'बांग्लादेश अब पाकिस्तानी आतंकवादियों का अड्डा बन गया है और वहाँ की कट्टरपंथी सरकार आतंकवाद फैलाने का काम कर रही है। ऐसे मॉडल को भारत में लागू करने की बात करना दुर्भाग्यपूर्ण है।'
विदेशी फंडिंग का आरोप
मुंबई में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने इंडिया ब्लॉक के प्रदर्शनों पर सवाल उठाते हुए कहा, 'यह आंदोलन चार चीज़ों पर केंद्रित है — राहुल गांधी, नेहा बोरा, दीपके और अब इमरान खान। इन चारों का ताल्लुक भारत के हितों से नहीं है। ये विदेशी मॉड्यूल को अपनाकर, विदेशी ताकतों के इशारों पर और विदेशी फंडिंग से इन सभी प्रदर्शनों को चला रहे हैं।' कुंवर बासित अली ने आरोप लगाया कि इन प्रदर्शनों का मकसद लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमज़ोर करना है।
राहुल गांधी पर निशाना
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने मुंबई में कहा, 'करीब डेढ़ साल पहले राहुल गांधी ने अचानक कहा था कि 'मैं भारतीय राज्य के खिलाफ लड़ रहा हूँ।' आज उनके काम यह साबित कर रहे हैं कि उनका वह बयान कोई संयोग नहीं था, बल्कि एक प्रयोग था।' तुहिन सिन्हा ने यह भी कहा कि नेहा बोरा, जिन्होंने कई बार नेपाल और बांग्लादेश की तर्ज पर भारत में सत्ता परिवर्तन की बात कही है, आज राहुल गांधी की सबसे करीबी सहयोगी हैं।
पटना और रांची से भी हमला
पटना में भाजपा नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, 'लोकतंत्र में आंदोलन और प्रदर्शन पर कोई रोक नहीं है, लेकिन कोई आंदोलन के बहाने उपद्रव फैलाए और अराजकता की स्थिति पैदा करे, यह देश को मंज़ूर नहीं।' वहीं रांची में भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा, 'धीरे-धीरे सबके चेहरे सामने आ रहे हैं। CJP, AAP और इंडिया ब्लॉक की मिलीभगत से देश में अराजकता फैलाने की कोशिश हो रही है।'
विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह पूरा विवाद तब और तेज़ हुआ जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा मतदाता सूची के SIR के ऐलान के बाद विपक्षी दल सड़क पर उतर आए। आलोचकों का कहना है कि SIR प्रक्रिया से मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम काटे जा सकते हैं, जिसे विपक्ष 'लोकतंत्र पर हमला' बता रहा है। भाजपा ने इन प्रदर्शनों को चुनावी प्रक्रिया को अस्थिर करने की कोशिश बताया है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-बांग्लादेश संबंध पहले से ही तनावपूर्ण दौर से गुज़र रहे हैं।