5 अक्टूबर 2026
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जयशंकर का ऐलान: भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट देगा अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा

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जयशंकर का ऐलान: भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट देगा अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर का कौटिल्य कॉन्क्लेव में स्पष्ट संदेश — भारत-अमेरिका ट्रेड डील सिर्फ एक द्विपक्षीय समझौता नहीं, बल्कि परिपक्व और उच्च क्रय-शक्ति वाले बाज़ारों की ओर भारत की रणनीतिक विविधता का हिस्सा है। EU, UK और EFTA के बाद अब वाशिंगटन की बारी है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 5 अक्टूबर 2026 को कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट को अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा बढ़ावा बताया।
अमेरिका को भारत का प्रमुख आर्थिक, व्यापारिक और रक्षा साझेदार करार दिया।
EU, UK और EFTA के साथ हालिया व्यापार समझौतों को भारत के व्यापारिक संतुलन के लिए सकारात्मक बताया।
भारत की 'मल्टी-अलाइनमेंट' नीति के तहत चीन, रूस और खाड़ी देशों के साथ संबंध भी मज़बूत किए गए हैं।
रेड सी, ब्लैक सी और खाड़ी में जहाज़ों पर हमलों को भारत ने 'पूरी तरह अस्वीकार्य' बताया।
रूस-यूक्रेन विवाद के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति पर जोर दिया।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट अपार संभावनाओं से भरा एक निर्णायक कदम है, जो दुनिया के सबसे बड़े बाज़ारों में से एक तक पहुँच बढ़ाकर भारतीय अर्थव्यवस्था को उल्लेखनीय गति दे सकता है। उन्होंने यह बात 'इंडिया एंड द वर्ल्ड: अडैप्टिव बाय डिज़ाइन' विषय पर आयोजित कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में कही।

ट्रेड एग्रीमेंट की अहमियत

जयशंकर ने रेखांकित किया कि अमेरिका भारत का सबसे अहम आर्थिक, व्यापारिक और रक्षा साझेदार है। उन्होंने कहा कि हाल ही में यूरोपीय संघ (EU), यूनाइटेड किंगडम (UK) और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के साथ संपन्न व्यापार समझौते भारत के व्यापारिक रिश्तों में बेहतर संतुलन लाने में सहायक सिद्ध होंगे। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था में उथल-पुथल मची है और भारत अपने निर्यात आधार को विविध बनाने की दिशा में सक्रिय है।

ग्लोबल ट्रेड सिस्टम पर संतुलित नज़रिया

मंत्री ने स्पष्ट किया कि वैश्विक व्यापार प्रणाली की सभी खामियों के लिए वाशिंगटन को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उनके अनुसार, बाज़ार में कई विकृतियाँ अमेरिका के अलावा अन्य स्रोतों से भी उत्पन्न हुई हैं और उनका निष्पक्ष मूल्यांकन ज़रूरी है। गौरतलब है कि भारत के पिछले मुक्त व्यापार समझौते (FTA) मुख्यतः आसियान देशों, जापान और दक्षिण कोरिया तक सीमित रहे हैं।

अधिक परिपक्व बाज़ारों की ओर विविधीकरण

जयशंकर ने कहा कि भारत के लिए अब अधिक पारदर्शी, परिपक्व और उच्च क्रय-शक्ति वाली अर्थव्यवस्थाओं की ओर व्यापारिक विविधता लाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी एक साझेदार के साथ संबंध प्रगाढ़ करने से अन्य मोर्चों पर भारत के हितों को आगे बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

मल्टी-अलाइनमेंट नीति और भू-राजनीतिक रुख

विदेश मंत्री ने भारत की 'मल्टी-अलाइनमेंट' नीति को रेखांकित करते हुए कहा कि देश ने चीन, रूस और खाड़ी देशों के साथ संबंधों को भी मज़बूत किया है। यह दृष्टिकोण अवसरों और चुनौतियों के आधार पर एक साथ कई संबंधों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने पर टिका है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत ब्लैक सी, रेड सी और खाड़ी क्षेत्र में आम नागरिकों के जहाज़ों पर हमलों को 'पूरी तरह अस्वीकार्य' मानता है।

रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत का स्पष्ट संदेश

जयशंकर ने रूस-यूक्रेन विवाद पर भारत का परंपरागत रुख दोहराते हुए कहा कि इस संघर्ष का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के रास्ते से ही संभव है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब युद्ध के तीसरे वर्ष में भी शांति वार्ता की संभावनाएँ सीमित बनी हुई हैं। आने वाले महीनों में भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की रूपरेखा स्पष्ट होने की उम्मीद है, जिस पर उद्योग जगत की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो रणनीतिक रूप से सही दिशा है। लेकिन भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता वर्षों से बौद्धिक संपदा, कृषि सब्सिडी और डेटा स्थानीयकरण जैसे मुद्दों पर अटकती रही है — महज़ एक कॉन्क्लेव का उत्साह इन संरचनात्मक बाधाओं को दूर नहीं करता। 'मल्टी-अलाइनमेंट' की नीति भारत को लचीलापन देती है, परंतु वाशिंगटन को यह कूटनीतिक संतुलन कब तक स्वीकार्य रहेगा, यह देखना होगा। असली परीक्षा तब होगी जब वार्ता की मेज पर ठोस शर्तें तय होंगी।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट क्या है और इसकी मौजूदा स्थिति क्या है?
यह भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच बाज़ार पहुँच बढ़ाना और व्यापारिक संबंध प्रगाढ़ करना है। विदेश मंत्री जयशंकर ने 5 अक्टूबर 2026 को कहा कि यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था को उल्लेखनीय बढ़ावा देने की क्षमता रखता है।
जयशंकर ने कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में और क्या कहा?
जयशंकर ने कहा कि वैश्विक व्यापार प्रणाली की सभी समस्याओं के लिए अमेरिका जिम्मेदार नहीं है और भारत को परिपक्व व उच्च क्रय-शक्ति वाले बाज़ारों की ओर व्यापारिक विविधता लानी चाहिए। उन्होंने EU, UK और EFTA के साथ हाल के समझौतों को इसी दिशा में सकारात्मक कदम बताया।
भारत की 'मल्टी-अलाइनमेंट' नीति क्या है?
मल्टी-अलाइनमेंट भारत की वह विदेश नीति है जिसके तहत देश एक साथ कई देशों — जैसे अमेरिका, रूस, चीन और खाड़ी देशों — के साथ संतुलित संबंध बनाए रखता है। जयशंकर के अनुसार, यह नीति अवसरों और चुनौतियों के आधार पर एकाधिक रिश्तों को एक साथ आगे बढ़ाने पर केंद्रित है।
जहाज़ों पर हमलों को लेकर भारत का क्या रुख है?
विदेश मंत्री जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत ब्लैक सी, रेड सी और खाड़ी क्षेत्र में आम नागरिकों के जहाज़ों पर किसी भी हमले को 'पूरी तरह अस्वीकार्य' मानता है। यह बयान वैश्विक शिपिंग मार्गों पर बढ़ते हमलों की पृष्ठभूमि में दिया गया।
रूस-यूक्रेन विवाद पर भारत का क्या रुख है?
जयशंकर ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के माध्यम से संभव है। भारत इस विवाद में किसी एक पक्ष का समर्थन करने से बचता रहा है और शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर है।
राष्ट्र प्रेस
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