जयशंकर का ऐलान: भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट देगा अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट अपार संभावनाओं से भरा एक निर्णायक कदम है, जो दुनिया के सबसे बड़े बाज़ारों में से एक तक पहुँच बढ़ाकर भारतीय अर्थव्यवस्था को उल्लेखनीय गति दे सकता है। उन्होंने यह बात 'इंडिया एंड द वर्ल्ड: अडैप्टिव बाय डिज़ाइन' विषय पर आयोजित कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में कही।
ट्रेड एग्रीमेंट की अहमियत
जयशंकर ने रेखांकित किया कि अमेरिका भारत का सबसे अहम आर्थिक, व्यापारिक और रक्षा साझेदार है। उन्होंने कहा कि हाल ही में यूरोपीय संघ (EU), यूनाइटेड किंगडम (UK) और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के साथ संपन्न व्यापार समझौते भारत के व्यापारिक रिश्तों में बेहतर संतुलन लाने में सहायक सिद्ध होंगे। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था में उथल-पुथल मची है और भारत अपने निर्यात आधार को विविध बनाने की दिशा में सक्रिय है।
ग्लोबल ट्रेड सिस्टम पर संतुलित नज़रिया
मंत्री ने स्पष्ट किया कि वैश्विक व्यापार प्रणाली की सभी खामियों के लिए वाशिंगटन को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उनके अनुसार, बाज़ार में कई विकृतियाँ अमेरिका के अलावा अन्य स्रोतों से भी उत्पन्न हुई हैं और उनका निष्पक्ष मूल्यांकन ज़रूरी है। गौरतलब है कि भारत के पिछले मुक्त व्यापार समझौते (FTA) मुख्यतः आसियान देशों, जापान और दक्षिण कोरिया तक सीमित रहे हैं।
अधिक परिपक्व बाज़ारों की ओर विविधीकरण
जयशंकर ने कहा कि भारत के लिए अब अधिक पारदर्शी, परिपक्व और उच्च क्रय-शक्ति वाली अर्थव्यवस्थाओं की ओर व्यापारिक विविधता लाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी एक साझेदार के साथ संबंध प्रगाढ़ करने से अन्य मोर्चों पर भारत के हितों को आगे बढ़ाने में भी मदद मिलती है।
मल्टी-अलाइनमेंट नीति और भू-राजनीतिक रुख
विदेश मंत्री ने भारत की 'मल्टी-अलाइनमेंट' नीति को रेखांकित करते हुए कहा कि देश ने चीन, रूस और खाड़ी देशों के साथ संबंधों को भी मज़बूत किया है। यह दृष्टिकोण अवसरों और चुनौतियों के आधार पर एक साथ कई संबंधों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने पर टिका है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत ब्लैक सी, रेड सी और खाड़ी क्षेत्र में आम नागरिकों के जहाज़ों पर हमलों को 'पूरी तरह अस्वीकार्य' मानता है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत का स्पष्ट संदेश
जयशंकर ने रूस-यूक्रेन विवाद पर भारत का परंपरागत रुख दोहराते हुए कहा कि इस संघर्ष का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के रास्ते से ही संभव है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब युद्ध के तीसरे वर्ष में भी शांति वार्ता की संभावनाएँ सीमित बनी हुई हैं। आने वाले महीनों में भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की रूपरेखा स्पष्ट होने की उम्मीद है, जिस पर उद्योग जगत की नज़रें टिकी हैं।