जालंधर में RTI एक्टिविस्ट सिमरनजीत सिंह की गोली मारकर हत्या, कोटली बोले — पंजाब में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त
सारांश
मुख्य बातें
जालंधर के चहेरू इलाके में LPU जालंधर-लुधियाना हाईवे के पास 30 मई 2025 को अज्ञात हमलावरों ने RTI एक्टिविस्ट और वकील सिमरनजीत सिंह पर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसाईं, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। पुलिस के अनुसार हमलावर पहले से घात लगाकर बैठे थे और जैसे ही सिमरनजीत सिंह वहाँ से गुज़रे, उन पर हमला कर दिया गया। इस हत्याकांड के बाद पूरे पंजाब में तनाव का माहौल है और राज्य की कानून-व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है।
मुख्य घटनाक्रम
बताया जा रहा है कि सिमरनजीत सिंह जब चहेरू इलाके के नज़दीक से गुज़र रहे थे, तभी पहले से घात लगाए बैठे अज्ञात हमलावरों ने उन पर गोलियाँ चलाईं। हमले में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। फ़िलहाल हत्या के पीछे की असली वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है और संदिग्धों की तलाश जारी है।
गौरतलब है कि सिमरनजीत सिंह एक सक्रिय RTI एक्टिविस्ट और वकील थे। उनकी दिनदहाड़े हत्या ने न केवल स्थानीय लोगों में दहशत फैलाई है, बल्कि राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
कोटली की तीखी प्रतिक्रिया
पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) नेता गुरकीरत सिंह कोटली ने शनिवार को इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'यह बहुत दुखद घटना है कि एक RTI एक्टिविस्ट की सरेआम हत्या कर दी गई। पंजाब में लॉ एंड ऑर्डर का बहुत बुरा हाल है।'
कोटली ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं और यह कोई पहला मामला नहीं है। उनका कहना था कि पंजाब में गैंगस्टर कल्चर लगातार बढ़ रहा है और सरकार इस पर लगाम लगाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है।
खन्ना की घटनाओं का हवाला
गुरकीरत सिंह कोटली ने खन्ना में हुई फायरिंग की घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि खन्ना में प्रसिद्ध प्रेम ढाबे और देव कलेक्शन पर खुलेआम फायरिंग की घटनाएँ हो चुकी हैं, जो यह साबित करती हैं कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक सरकार सख्त कदम नहीं उठाती, तब तक इस तरह की वारदातें रुकना मुश्किल है।
आम जनता पर असर
दिनदहाड़े हुई इस हत्या ने स्थानीय लोगों में भय का माहौल पैदा कर दिया है। आलोचकों का कहना है कि जब एक RTI एक्टिविस्ट और वकील जैसे जागरूक नागरिक भी सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में गैंगस्टर-संबंधी हिंसा की घटनाएँ लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं।
क्या होगा आगे
पुलिस ने मामले की जाँच तेज़ कर दी है और अज्ञात हमलावरों की पहचान के प्रयास जारी हैं। हत्या के पीछे की वजह अभी तक सामने नहीं आई है। राजनीतिक दबाव बढ़ने के साथ राज्य सरकार पर यह साबित करने की ज़िम्मेदारी है कि वह कानून-व्यवस्था बहाल करने में सक्षम है।