जालंधर में RTI एक्टिविस्ट-वकील सिमरनजीत सिंह की गोली मारकर हत्या, LPU गेट के पास घात लगाकर किया हमला
सारांश
मुख्य बातें
जालंधर में 30 मई 2026 को आरटीआई कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता सिमरनजीत सिंह की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के लॉ गेट के निकट गोली मारकर हत्या कर दी गई। हमलावरों ने पहले से घात लगाकर उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की और वारदात के बाद मौके से फरार हो गए।
घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार हमलावर पहले से ही घटनास्थल पर प्रतीक्षा में थे और जैसे ही सिमरनजीत सिंह वहाँ से गुजरे, उन पर अंधाधुंध गोलियाँ चला दी गईं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जालंधर रेंज के डीआईजी नवीन सिंगला ने बताया कि कपूरथला कंट्रोल रूम को घटनास्थल पर शव पड़े होने की सूचना मिली थी, जिसके बाद तत्काल कार्रवाई की गई।
बरामदगी और जाँच
पुलिस को घटनास्थल से .32 बोर की पिस्तौल और 123 बोर की बंदूक बरामद हुई है। जाँच दल आसपास के लोगों से पूछताछ कर रहा है और घटनास्थल के नज़दीक लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। अब तक पुलिस को हत्या का कोई ठोस सुराग नहीं मिला है, हालाँकि अधिकारियों का दावा है कि शीघ्र ही मामले का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिमरनजीत सिंह की तस्वीर साझा करते हुए राज्य की भगवंत मान सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, 'एक और चौंकाने वाली घटना ने पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब कार्यकर्ता, वकील और नागरिक अपनी आवाज उठाने पर अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, तो सरकार को जवाब देना होगा।' वारिंग ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सुरक्षित पंजाब का वादा किया था, लेकिन गोलीबारी, गिरोह हिंसा और लक्षित हमले जारी हैं।
आम जनता और कार्यकर्ताओं पर असर
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पंजाब में सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से भ्रष्टाचार उजागर करने वाले कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर पहले से ही चिंताएँ व्यक्त की जाती रही हैं। सिमरनजीत सिंह एक वकील होने के साथ-साथ सक्रिय RTI कार्यकर्ता भी थे, जो सार्वजनिक हित के मामलों में सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करते थे। आलोचकों का कहना है कि लक्षित हत्याओं की ऐसी घटनाएँ नागरिक समाज और जवाबदेही तंत्र को कमज़ोर करती हैं।
आगे क्या
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जाँच जारी है। हत्या के उद्देश्य और आरोपियों की पहचान को लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। राजनीतिक दबाव बढ़ने के साथ राज्य सरकार पर शीघ्र गिरफ्तारी और पारदर्शी जाँच सुनिश्चित करने की माँग तेज होने की संभावना है।