जम्मू में ड्रोन ड्रॉप मामले में दो गिरफ्तार: बेरेटा पिस्तौल, 500 ग्राम हेरोइन और 500 ग्राम अफीम बरामद
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 6 अक्टूबर 2026 को जम्मू जिले के अरनिया सेक्टर में सीमा पार से ड्रोन के ज़रिए हथियार और नशीले पदार्थ गिराने के एक संदिग्ध मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके कब्ज़े से इटली निर्मित बेरेटा पिस्तौल, दो मैगज़ीन, चार कारतूस, 500 ग्राम हेरोइन और 500 ग्राम अफीम बरामद की गई। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उन्हें ड्रोन के ज़रिए दो खेप प्राप्त हुई थीं।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस ने बताया कि इंटरनेशनल बॉर्डर के पार से ड्रोन द्वारा सामान गिराए जाने की सूचना पर जाँच शुरू की गई और उसी क्रम में अरनिया सेक्टर में दोनों आरोपियों को पकड़ा गया। पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ कि ड्रोन से प्राप्त दो अलग-अलग खेपों में यह हथियार और नशीले पदार्थ भेजे गए थे। संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आगे की जाँच जारी है।
जम्मू-कश्मीर में बढ़ता ड्रोन खतरा
सुरक्षा विशेषज्ञों और एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के ज़रिए हथियार और नशीले पदार्थ भेजना जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के लिए एक गंभीर और लगातार बढ़ती चुनौती बनता जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत की पश्चिमी सीमा पर ड्रोन घुसपैठ की 791 घटनाएँ दर्ज की गईं, और सुरक्षा बलों ने इन हवाई खतरों से निपटने के लिए जैमर एवं स्पूफर का उपयोग किया।
यह ऐसे समय में आया है जब इस वर्ष जुलाई में इंटरनेशनल बॉर्डर और लाइन ऑफ कंट्रोल के पास संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन देखे जाने के बाद सेना और पुलिस ने सांबा के नंदपुर तथा राजौरी के नौशेरा में संयुक्त तलाशी अभियान चलाए थे।
पिछली प्रमुख घटनाएँ
1 मार्च को कई क्वाडकॉप्टर और एक संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन के दिगवार और पुंछ सेक्टर में एलओसी पार करने पर सेना ने गोलीबारी कर ड्रोन-रोधी उपाय अपनाए। 10 जनवरी को बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) और जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप की संयुक्त टीम ने सांबा के पालूरा गाँव में एक नाले के किनारे पीले टेप में लिपटा हथियारों का पैकेट बरामद किया, जिसे कथित तौर पर सीमा पार से ड्रोन द्वारा गिराया गया था। गौरतलब है कि जनवरी में ही पुंछ, राजौरी और सांबा में ड्रोन घुसपैठ की अनेक घटनाएँ सामने आई थीं।
नार्को-फाइनेंसिंग और हथियारों की तस्करी
सुरक्षा एजेंसियों ने संकेत दिया है कि ड्रोन ड्रॉप का उपयोग केवल नशीले पदार्थों तक सीमित नहीं है — इन्हीं माध्यमों से पिस्तौल, ग्रेनेड, आईईडी, मैग्नेटिक बम और एके-47 के कारतूस भी पहुँचाए जा चुके हैं। एजेंसियों ने हेरोइन, अफीम और सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी को नार्को-फाइनेंसिंग से जोड़ा है, जिससे आतंकवादी नेटवर्कों को धन मिलता है। अरनिया, सांबा, कठुआ, अखनूर, राजौरी और पुंछ जैसे इलाके ऐसी गतिविधियों के केंद्र के रूप में बार-बार सामने आए हैं।
आगे क्या होगा
पुलिस ने पुष्टि की है कि दोनों गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके नेटवर्क की पहचान की कोशिश की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की गिरफ्तारियाँ ड्रोन-आधारित तस्करी के व्यापक नेटवर्क की एक कड़ी मात्र हैं और जब तक सीमा पर तकनीकी निगरानी को और मज़बूत नहीं किया जाता, यह खतरा बना रहेगा।