जंतर-मंतर हिंसा जाँच: HPEC ने शिकायत पोर्टल लॉन्च किया, पीड़ितों को मिलेगी गोपनीय सुरक्षा
सारांश
मुख्य बातें
उच्चाधिकार प्राप्त जाँच समिति (HPEC) ने 17 अक्टूबर 2026 को एक आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल 'hpec.nic.in' लॉन्च किया है, जिसके माध्यम से जुलाई 2026 में जंतर-मंतर, नई दिल्ली तथा देश के अन्य हिस्सों में हुई हिंसा की घटनाओं से प्रभावित व्यक्ति — जिनमें पुलिसकर्मी भी शामिल हैं — अपनी शिकायतें और अभ्यावेदन दर्ज करा सकते हैं। यह पोर्टल सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर गठित समिति की जाँच प्रक्रिया को सुलभ और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
HPEC का गठन और जाँच का दायरा
सर्वोच्च न्यायालय ने जुलाई 2026 में जंतर-मंतर और दिल्ली के बाहर विभिन्न स्थानों पर हुई हिंसा की व्यापक जाँच के लिए इस उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया था। समिति को न्यायालय के 18 अगस्त 2026 के आदेश के पैराग्राफ 12 और 13, तथा 10 सितंबर 2026 के आदेश के पैराग्राफ 5(i) में उल्लिखित सभी मुद्दों की जाँच करने का अधिकार दिया गया है।
जाँच के दायरे में विशेष रूप से पैलेट गन के उपयोग, लक्षित हिंसा, महिला प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न तथा दोनों पक्षों की ओर से की गई अत्यधिक हिंसा और संपत्ति क्षति से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी। यह व्यापक दायरा दर्शाता है कि समिति एकपक्षीय नहीं, बल्कि संपूर्ण घटनाक्रम की पड़ताल करेगी।
पोर्टल की विशेषताएँ और गोपनीयता सुरक्षा
नया पोर्टल hpec.nic.in विशेष रूप से संवेदनशील गवाहों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है। यदि कोई प्रभावित व्यक्ति चाहे, तो उसकी पहचान पूरी तरह गोपनीय और गुप्त रखी जा सकती है। प्रभावित व्यक्तियों और अन्य हितधारकों को प्रोत्साहित किया गया है कि वे पोर्टल पर उपलब्ध उपयुक्त प्रारूपों का उपयोग कर अपनी शिकायतें या अभ्यावेदन अपलोड करें।
गौरतलब है कि यह पोर्टल न केवल सीधे पीड़ितों के लिए, बल्कि उन सभी के लिए खुला है जो इन घटनाओं से जुड़ी कोई भी जानकारी या सुझाव समिति तक पहुँचाना चाहते हैं।
व्यक्तिगत रूप से शिकायत दर्ज कराने की सुविधा
जो लोग ऑनलाइन पोर्टल की बजाय सीधे कार्यालय में जाकर दस्तावेज जमा करना चाहते हैं, वे शिक्षा सदन, 17, राउज एवेन्यू इंस्टीट्यूशनल एरिया, नई दिल्ली — 110002 स्थित HPEC के कार्यालय में सभी कार्य-दिवसों के दौरान दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे के बीच उपस्थित हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, शिकायतें और संबंधित सामग्री उक्त पते पर डाक या ईमेल के माध्यम से भी भेजी जा सकती हैं।
आम जनता और पीड़ितों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब जुलाई 2026 की हिंसा से प्रभावित सैकड़ों लोग — नागरिक और पुलिसकर्मी, दोनों — न्याय और राहत की प्रतीक्षा में हैं। पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की सुविधा से उन्हें बिना कानूनी जटिलताओं के अपनी बात समिति तक पहुँचाने का अवसर मिलेगा।
आलोचकों का कहना है कि इस तरह की जाँच समितियों की विश्वसनीयता तभी सिद्ध होती है जब गवाहों को पर्याप्त सुरक्षा मिले और परिणाम सार्वजनिक हों। गोपनीयता का प्रावधान इस दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
आगे की प्रक्रिया
HPEC अब पोर्टल और कार्यालय दोनों माध्यमों से प्राप्त शिकायतों की समीक्षा करेगी और सर्वोच्च न्यायालय को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। समिति की अंतिम रिपोर्ट और उसकी सिफारिशें यह तय करेंगी कि हिंसा के पीड़ितों को किस तरह का न्याय और मुआवज़ा मिलेगा।