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क्या उत्तर प्रदेश में 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत जौनपुर की महिलाएं ध्वज का निर्माण कर रही हैं?

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क्या उत्तर प्रदेश में 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत जौनपुर की महिलाएं ध्वज का निर्माण कर रही हैं?

सारांश

जौनपुर की महिलाएं स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 'हर घर तिरंगा' अभियान में झंडे बनाने में जुटी हैं। एनआरएलएम के तहत लाखों झंडे बनाए जा रहे हैं, जिससे देशभक्ति की भावना को बढ़ावा मिलता है। क्या आप जानते हैं कि ये महिलाएं कैसे योगदान दे रही हैं?

मुख्य बातें

स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं का योगदान महत्वपूर्ण है।
सात लाख झंडे बनाने का लक्ष्य है।
प्रति झंडा 20 रुपए का भुगतान किया जा रहा है।
झंडे तीन आकारों में बनाए जा रहे हैं।
यह अभियान देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देता है।

जौनपुर, 10 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। स्वतंत्रता दिवस के नजदीक आते ही जौनपुर के ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की महिलाएं 'हर घर तिरंगा' अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

केंद्र प्रायोजित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत, 13, 14 और 15 अगस्त को होने वाले सरकार के विशाल राष्ट्रव्यापी ध्वजारोहण अभियान से पहले, 68 स्वयं सहायता समूहों ने राष्ट्रीय ध्वज बनाने का कार्य प्रारंभ किया है। जिले के लिए सात लाख झंडे बनाने का लक्ष्य रखा गया है, और ये झंडे सभी ब्लॉकों के स्वयं सहायता समूहों की लगभग 350 महिलाएं बना रही हैं।

सरकार द्वारा प्रत्येक महिला को प्रति झंडा 20 रुपए का भुगतान किया जा रहा है। झंडे तीन आकारों में सूती या पॉलिएस्टर कपड़े से बनाए जा रहे हैं, जो सीधे एनआरएलएम द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

स्वरोजगार उपायुक्त जितेंद्र प्रताप सिंह ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान अभियान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने स्वयं सहायता समूहों को सात लाख झंडे तैयार करने का लक्ष्य दिया है। सभी ब्‍लॉकों में 203 सेंटर संचालित हैं, जिसमें लगभग 350 स्वयं सहायता समूह की महिलाएं काम कर रही हैं। एक सप्‍ताह से तिरंगा झंडा बनाने का कार्य चल रहा है। इस दौरान पांच लाख झंडे बन चुके हैं। चार लाख के करीब बिक चुके हैं। अब तक, हमने लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा कर लिया है, और शेष 20 प्रतिशत अगले दो दिनों में पूरा हो जाएगा। समय सीमा को पूरा करने के लिए काम चौबीसों घंटे चल रहा है।

उन्होंने कहा कि समय पर उत्पादन पूरा हो, यह सुनिश्चित करने के लिए, ब्लॉक मिशन प्रबंधकों (बीएमएम) को प्रतिदिन प्रगति की निगरानी और रिपोर्ट करने का कार्य सौंपा गया है। मुख्य सचिव के निर्देश के बाद अभियान में तेजी आई है, जिससे पूरी प्रशासनिक मशीनरी इसकी सफलता के लिए काम करने के लिए प्रेरित हुई है।

एक स्वयं सहायता समूह की सदस्य संगीता काला ने कहा कि स्वयं सहायता समूह में 15 महिलाएं काम कर रही हैं। 25 हजार झंडे बनाने थे, जिसमें से 15 हजार बन चुके हैं। मानदेय के तहत प्रति झंडे पर 20 रुपए मिलेंगे और मिले हुए रुपए को समूह की 15 महिलाओं में बांटा जाएगा।

'हर घर तिरंगा' पहल का उद्देश्य नागरिकों को अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रोत्साहित करना है, जिससे भारत के 78वें स्वतंत्रता दिवस से पहले देशभक्ति की भावना पैदा हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह अभियान न केवल महिलाओं के आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम है, बल्कि यह हमारे देश की एकता और अखंडता को भी दर्शाता है। ऐसे प्रयासों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह अभियान कब शुरू हुआ?
यह अभियान स्वतंत्रता दिवस के नजदीक, 10 अगस्त को शुरू हुआ था।
कितने झंडे बनाए जा रहे हैं?
इस अभियान के तहत जौनपुर में सात लाख झंडे बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
झंडे बनाने वाली महिलाएं कौन हैं?
ये महिलाएं ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों की सदस्य हैं।
झंडा बनाने के लिए महिलाओं को क्या भुगतान किया जा रहा है?
प्रति झंडा महिलाओं को 20 रुपए का भुगतान किया जा रहा है।
सरकार का इस अभियान में क्या योगदान है?
सरकार ने एनआरएलएम के तहत आवश्यक सामग्री और दिशा-निर्देश प्रदान किए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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