8 अक्टूबर 2026
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जयप्रकाश नारायण पुण्यतिथि 2026: गडकरी, योगी समेत दर्जनों नेताओं ने 'लोकतंत्र के प्रहरी' को किया नमन

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जयप्रकाश नारायण पुण्यतिथि 2026: गडकरी, योगी समेत दर्जनों नेताओं ने 'लोकतंत्र के प्रहरी' को किया नमन

सारांश

जयप्रकाश नारायण की पुण्यतिथि पर राजनीतिक दलों की सीमाएँ धुंधली पड़ गईं — गडकरी से लेकर नीतीश तक, सभी ने 'लोकनायक' को नमन किया। आपातकाल में लोकतंत्र बचाने वाले इस नेता की विरासत आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।

मुख्य बातें

8 अक्टूबर 2026 को भारत रत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण की पुण्यतिथि पर देशभर में श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उन्हें 'पूर्ण क्रांति आंदोलन के प्रणेता' और जनसेवक के रूप में याद किया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जयप्रकाश नारायण ने आपातकाल में निरंकुशता के विरुद्ध निर्णायक संघर्ष का नेतृत्व किया।
पुष्कर सिंह धामी , भजनलाल शर्मा , नायब सिंह सैनी , सम्राट चौधरी और एकनाथ शिंदे सहित कई मुख्यमंत्रियों ने श्रद्धांजलि दी।
नीतीश कुमार ने उन्हें 'संपूर्ण क्रांति के अग्रदूत और प्रखर समाजवादी' बताते हुए नमन किया।
जयप्रकाश नारायण की विरासत 1975 के आपातकाल के विरुद्ध संघर्ष और संपूर्ण क्रांति आंदोलन के रूप में भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला मानी जाती है।

भारत रत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण की पुण्यतिथि पर 8 अक्टूबर 2026 को देशभर के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। केंद्रीय मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्रियों तक, राजनीतिक स्पेक्ट्रम के पार नेताओं ने उन्हें 'संपूर्ण क्रांति' के प्रणेता और आपातकाल के विरुद्ध लोकतंत्र की रक्षा करने वाले अप्रतिम योद्धा के रूप में याद किया। यह श्रद्धांजलि इस मायने में भी विशेष है कि जयप्रकाश नारायण की विरासत आज भी भारतीय लोकतांत्रिक चेतना का अभिन्न हिस्सा बनी हुई है।

मुख्य श्रद्धांजलियाँ और उद्गार

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'पूर्ण क्रांति आंदोलन के प्रणेता, भारत रत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र अभिवादन। जयप्रकाश नारायण ने सदैव अपना संपूर्ण जीवन एक जनसेवक के रूप में देशहित में समर्पित किया। आपातकाल में अराजकता और अन्याय के विरुद्ध देश को एक कर वो उनकी प्रखर आवाज बने। उनके विचार सभी देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणा बनके रहेंगे।'

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जयप्रकाश नारायण ने आपातकाल में निरंकुशता के विरुद्ध जनशक्ति को संगठित किया और लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए निर्णायक संघर्ष का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा, 'राष्ट्र और जनतंत्र के प्रति उनका त्यागपूर्ण जीवन सदैव लोकहित के लिए प्रेरित करता रहेगा।'

अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों की श्रद्धांजलि

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें 'महान स्वतंत्रता सेनानी और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रखर प्रहरी' बताते हुए कहा कि संपूर्ण क्रांति के माध्यम से उन्होंने जो संघर्ष किया, वह भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राष्ट्र निर्माण, जन-कल्याण और भारतीय लोकतंत्र की रक्षा के लिए जयप्रकाश नारायण का आजीवन संघर्ष और विचार देशवासियों को सदा प्रेरित करते रहेंगे। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी उन्हें नमन करते हुए कहा कि 'संपूर्ण क्रांति' का उनका आह्वान आज भी सामाजिक जागरूकता और जनभागीदारी की प्रेरणा देता है।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी उन्हें 'भारत रत्न से सम्मानित वरिष्ठ स्वतंत्रता सेनानी और सर्वोदय आंदोलन के प्रमुख नेता' के रूप में भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

केंद्रीय मंत्रियों और पार्टी नेताओं के उद्गार

केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री तथा उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष पंकज चौधरी ने उन्हें 'लोकतंत्र के सजग प्रहरी' और 'संपूर्ण क्रांति के जनक' के रूप में याद किया। बिहार सरकार में मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने उन्हें 'समाजवादी चिंतक और महान जननेता' बताते हुए नमन किया।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने उन्हें 'संपूर्ण क्रांति के अग्रदूत, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और प्रखर समाजवादी' कहते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। गौरतलब है कि जयप्रकाश नारायण का बिहार से गहरा ऐतिहासिक और भावनात्मक रिश्ता रहा है, जिससे बिहार के नेताओं की श्रद्धांजलि विशेष महत्व रखती है।

जयप्रकाश नारायण की विरासत और प्रासंगिकता

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रता को लेकर राष्ट्रीय बहस जारी है। 1975 के आपातकाल के विरुद्ध जयप्रकाश नारायण का नेतृत्व भारतीय राजनीति की स्मृति में एक निर्णायक अध्याय के रूप में दर्ज है — जब उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनशक्ति को एकजुट किया था। उनके 'संपूर्ण क्रांति' के नारे ने न केवल उस दौर की राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती दी, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक आदर्श भी स्थापित किया।

आज विभिन्न दलों के नेताओं का उन्हें एकसाथ नमन करना इस बात का प्रमाण है कि जयप्रकाश नारायण की छवि दलीय सीमाओं से परे एक राष्ट्रीय प्रेरणा-पुरुष की रही है। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और जनसेवा की राह दिखाती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उनमें से कई उन दलों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिनकी नीतियाँ जयप्रकाश नारायण के विकेंद्रीकरण और जनभागीदारी के आदर्शों से कहीं दूर हैं। असली श्रद्धांजलि तब होगी जब उनके 'संपूर्ण क्रांति' के मूल्यों — पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक स्वतंत्रता — को नीतिगत ढाँचे में उतारा जाए, न केवल सोशल मीडिया पोस्टों में।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयप्रकाश नारायण की पुण्यतिथि कब है?
जयप्रकाश नारायण की पुण्यतिथि प्रतिवर्ष 8 अक्टूबर को मनाई जाती है। इस दिन देशभर में उन्हें 'भारत रत्न' और 'लोकनायक' के रूप में याद किया जाता है।
संपूर्ण क्रांति आंदोलन क्या था?
संपूर्ण क्रांति वह आंदोलन था जो जयप्रकाश नारायण ने 1970 के दशक में तत्कालीन सरकार की नीतियों और आपातकाल के विरुद्ध छेड़ा था। इसका उद्देश्य राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था में आमूल परिवर्तन लाना था।
2026 की पुण्यतिथि पर किन-किन नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
8 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और नीतीश कुमार समेत अनेक नेताओं ने श्रद्धांजलि दी।
जयप्रकाश नारायण को 'भारत रत्न' कब दिया गया?
जयप्रकाश नारायण को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से नवाज़ा गया। उनका निधन 8 अक्टूबर 1979 को हुआ था।
जयप्रकाश नारायण की विरासत आज क्यों प्रासंगिक है?
जयप्रकाश नारायण की विरासत इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि उन्होंने 1975 के आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनशक्ति को एकजुट किया। उनके विचार — विकेंद्रीकरण, जनभागीदारी और सामाजिक न्याय — आज भी भारतीय लोकतंत्र की बहसों का केंद्र हैं।
राष्ट्र प्रेस
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