11 अक्टूबर 2026
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जेपी जयंती 2026: शिवराज, गडकरी, योगी समेत दर्जनभर नेताओं ने लोकनायक को किया नमन

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जेपी जयंती 2026: शिवराज, गडकरी, योगी समेत दर्जनभर नेताओं ने लोकनायक को किया नमन

सारांश

जेपी जयंती पर देश के शीर्ष नेता एकजुट — शिवराज, गडकरी, योगी, भजनलाल और दर्जनभर अन्य ने एक्स पर लोकनायक जयप्रकाश नारायण को नमन किया और उनके सम्पूर्ण क्रांति के आह्वान को याद किया। जेपी की विरासत आज भी दलीय सीमाओं से परे भारतीय लोकतंत्र की आत्मा में जीवित है।

मुख्य बातें

11 अक्टूबर 2026 को भारत रत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर देशभर में श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान , मंत्री नितिन गडकरी , मनोहर लाल , हरदीप सिंह पुरी और अर्जुनराम मेघवाल ने एक्स पर नमन किया।
मुख्यमंत्रियों में योगी आदित्यनाथ (उत्तर प्रदेश), भजनलाल शर्मा (राजस्थान), रेखा गुप्ता (दिल्ली), पुष्कर सिंह धामी (उत्तराखंड) और सम्राट चौधरी (बिहार) ने श्रद्धांजलि दी।
नेताओं ने जेपी के सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन और 1975 के आपातकाल के विरुद्ध संघर्ष को विशेष रूप से याद किया।
जयप्रकाश नारायण को 1999 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

भारत रत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर 11 अक्टूबर 2026 को देशभर के केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने जेपी के 'सम्पूर्ण क्रांति' के आह्वान और लोकतंत्र की रक्षा में उनकी अटूट भूमिका को याद किया। यह श्रद्धांजलि ऐसे समय में आई है जब लोकनायक की विरासत को लेकर राजनीतिक विमर्श देश में निरंतर प्रासंगिक बना हुआ है।

केंद्रीय मंत्रियों की श्रद्धांजलि

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर लिखा, 'भारतीय लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए 'सम्पूर्ण क्रांति' का आह्वान करने वाले राजनीति के युगपुरुष, भारत रत्न, लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर कोटि-कोटि नमन करता हूं! आपके प्रखर विचार और आदर्श जीवन सदैव भावी पीढ़ियों को अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए प्रेरित करते रहेंगे।'

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा, 'आजीवन लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पित सम्पूर्ण क्रांति के प्रणेता, भारत रत्न, लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं। चाहे वह देश का स्वतंत्रता आंदोलन हो या फिर 1975 का दमनकारी आपातकाल, उन्होंने जनता को जनतंत्र की शक्ति का बोध कराया।'

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लिखा, 'लोकनायक जयप्रकाश नारायण लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक समरसता के प्रतीक थे। लोकतंत्र के काले अध्याय आपातकाल के विरुद्ध उनका संपूर्ण क्रांति का बिगुल सभी के लिए हमेशा प्रेरणा का केंद्र बना रहेगा।'

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जेपी को 'निडर स्वतंत्रता सेनानी और दूरदर्शी नेता' बताते हुए कहा कि उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में अहम भूमिका निभाई और बाद में आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की सशक्त आवाज बने। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने उन्हें 'प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक' और 'लोकतांत्रिक मूल्यों के सजग प्रहरी' कहकर नमन किया।

मुख्यमंत्रियों ने किया स्मरण

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जेपी को 'भारतीय राजनीति का युगपुरुष' बताते हुए कहा कि आपातकाल के कठिन दौर में उनकी आवाज लोकतांत्रिक चेतना का सशक्त स्वर बनी। उन्होंने कहा, 'उनका निर्भीक संघर्ष एवं त्यागमय जीवन हमें सत्ता से ऊपर संविधान, पद से ऊपर सिद्धांत और स्वयं से ऊपर राष्ट्रहित रखने की प्रेरणा देता है।'

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने लिखा कि जेपी का समर्पित जीवन जनाधिकारों, लोकतांत्रिक चेतना और सामाजिक परिवर्तन के दृढ़ संकल्प का प्रतीक रहा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने याद दिलाया कि जब कांग्रेस ने आपातकाल थोपकर नागरिक अधिकारों को कुचलने का प्रयास किया, तब लोकनायक ने जनजागरण का शंखनाद किया।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जेपी को 'महान स्वतंत्रता सेनानी, समाजवादी विचारक और प्रखर जननेता' बताया। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राष्ट्र के प्रति जेपी का समर्पण और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता सदैव देशवासियों को प्रेरित करती रहेगी। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उन्हें 'सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन का नायक' कहते हुए नमन किया।

लोकनायक की विरासत और राजनीतिक प्रासंगिकता

गौरतलब है कि जयप्रकाश नारायण को 1999 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। उनकी 1974-75 की 'सम्पूर्ण क्रांति' — जो 1975 में लगाए गए आपातकाल के विरुद्ध थी — भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक निर्णायक अध्याय है। उनकी इस विरासत को विभिन्न दलों के नेता अपने-अपने ढंग से याद करते हैं, जो दर्शाता है कि जेपी का व्यक्तित्व दलीय सीमाओं से परे जनमानस में गहरे पैठा हुआ है। प्रत्येक वर्ष उनकी जयंती पर इस तरह की सार्वजनिक श्रद्धांजलियाँ लोकतंत्र और जनसंघर्ष के प्रति जेपी के योगदान की समकालीन प्रासंगिकता को रेखांकित करती हैं। आने वाले वर्षों में भी उनके विचार भारतीय राजनीति और सामाजिक आंदोलनों को दिशा देते रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे जेपी को सबसे ऊँची आवाज़ में याद करते हैं, जबकि कांग्रेस — जिसने वह आपातकाल लगाया था — इस दिन प्रायः किनारे रहती है। यह श्रद्धांजलि-राजनीति का एक स्थापित वार्षिक अनुष्ठान बन चुका है। असली सवाल यह है कि क्या जेपी के 'सम्पूर्ण क्रांति' के मूल्य — सत्ता का विकेंद्रीकरण, जनता की भागीदारी, संस्थागत जवाबदेही — आज की नीतियों में परिलक्षित होते हैं, या ये पोस्ट महज़ वार्षिक औपचारिकता हैं।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोकनायक जयप्रकाश नारायण कौन थे?
जयप्रकाश नारायण एक महान स्वतंत्रता सेनानी, समाजवादी विचारक और जननेता थे, जिन्हें मरणोपरांत 1999 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उन्होंने 1974-75 में 'सम्पूर्ण क्रांति' आंदोलन का नेतृत्व किया और 1975 के आपातकाल के विरुद्ध लोकतंत्र की आवाज़ बने।
जेपी जयंती 2026 पर किन-किन नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
11 अक्टूबर 2026 को शिवराज सिंह चौहान, नितिन गडकरी, मनोहर लाल, हरदीप सिंह पुरी, अर्जुनराम मेघवाल (केंद्रीय मंत्री) और योगी आदित्यनाथ, भजनलाल शर्मा, रेखा गुप्ता, पुष्कर सिंह धामी, सम्राट चौधरी (मुख्यमंत्री) सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी।
सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन क्या था?
सम्पूर्ण क्रांति जयप्रकाश नारायण द्वारा 1974-75 में शुरू किया गया जन-आंदोलन था, जिसका उद्देश्य सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था में मूलभूत परिवर्तन लाना था। यह आंदोलन 1975 में इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल के विरोध का केंद्र बन गया।
जयप्रकाश नारायण को भारत रत्न कब मिला?
जयप्रकाश नारायण को 1999 में मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाज़ा गया। उनका निधन 8 अक्टूबर 1979 को हुआ था।
नेताओं ने जेपी की कौन-सी विशेषताओं को विशेष रूप से याद किया?
नेताओं ने मुख्य रूप से जेपी के सम्पूर्ण क्रांति के आह्वान, आपातकाल के विरुद्ध संघर्ष, भारत छोड़ो आंदोलन में भूमिका, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण और त्यागमय जीवन को याद किया। कई नेताओं ने उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
राष्ट्र प्रेस
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