22 अक्टूबर 2026
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इंडी गठबंधन को भंग कर देना चाहिए — जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन का तीखा हमला

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इंडी गठबंधन को भंग कर देना चाहिए — जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन का तीखा हमला

सारांश

जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने इंडी गठबंधन को 'मौकापरस्ती का जमावड़ा' बताते हुए इसे भंग करने की माँग की। पश्चिम बंगाल से यूपी तक — हर चुनाव में दल एक-दूसरे के खिलाफ खड़े होते हैं। जदयू महासचिव श्याम रजक का तंज: 'बस कॉफी पीते हैं और घर लौट जाते हैं।'

मुख्य बातें

जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने 22 अक्टूबर 2026 को इंडी गठबंधन को तत्काल भंग करने की माँग की।
रंजन ने आरोप लगाया कि गठबंधन में नेतृत्व, मुद्दे और सीट-बँटवारा — कुछ भी तय नहीं है।
पश्चिम बंगाल चुनाव में कांग्रेस और TMC के आमने-सामने होने का उदाहरण देकर गठबंधन की अव्यावहारिकता दर्शाई।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना — लोकसभा में 37 सीटें मिलने के बाद 'भ्रम' में होने का आरोप।
जदयू महासचिव श्याम रजक ने कहा — गठबंधन के नेता 'केवल कॉफी पीते हैं, जनता से कोई नाता नहीं।' यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में NDA को स्पष्ट बढ़त का दावा।

जनता दल (यूनाइटेड) के नेताओं ने 22 अक्टूबर 2026 को इंडी गठबंधन पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि इस गठबंधन का कोई भविष्य नहीं है और इसे तत्काल भंग कर देना चाहिए। बिहार के जदयू नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि गठबंधन के दल केवल चुनावी मौकापरस्ती के आधार पर एकत्रित होते हैं और चुनाव बीतते ही एक-दूसरे के विरोधी बन जाते हैं।

राजीव रंजन का सीधा आरोप

जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि इंडी गठबंधन को विघटित कर देना चाहिए। उनके अनुसार, 'यह गठबंधन किस वजह से कायम है, यह अब समझ से परे हो गया है।' रंजन ने आरोप लगाया कि गठबंधन के नेताओं में ही आपस में कई बार टकराव हो चुका है और जब भी किसी राज्य में चुनाव आता है, ये दल एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में उतर जाते हैं।

रंजन ने उदाहरण देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विरुद्ध लड़ी थी, जबकि आज दोनों दल राष्ट्रीय स्तर पर एक मंच पर दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि उस चुनाव में कांग्रेस और TMC के बीच का वैमनस्य, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और TMC के टकराव से कम नहीं था। 'अगर देश में कहीं भी चुनाव हो, यही स्थिति दोहराई जाएगी,' रंजन ने कहा।

उन्होंने यह भी कहा कि जिस गठबंधन में मुद्दों पर सहमति न हो, नेतृत्व का निर्धारण न हो, और चुनाव में कौन प्रत्याशी उतारेगा यह भी तय न हो — ऐसे गठबंधन का औचित्य ही क्या रह जाता है।

अखिलेश यादव पर निशाना

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सीट-बँटवारे के सवाल पर राजीव रंजन ने कहा कि लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) को 37 सीटें मिलने के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव 'भ्रम के शिकार' हो गए थे। उन्होंने कहा कि अब उस भ्रम का निस्तारण हो रहा है, क्योंकि जनता अखिलेश की राजनीति में विकास को कहीं नहीं देखती — केवल राजनीतिक चालबाज़ी दिखती है।

रंजन ने यह भी आरोप लगाया कि अखिलेश यादव 'पी से पंडित' और 'पी से पिछड़ा' जैसे नारों के ज़रिए लोगों को गुमराह कर रहे हैं। उनके अनुसार, जनता ने इन नारों को कभी गंभीरता से नहीं लिया और आगे भी नहीं लेगी। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को स्पष्ट बढ़त दिख रही है और प्रदेश में एक बार फिर योगी सरकार बनने जा रही है।

श्याम रजक का तंज — 'बस कॉफी पीते हैं'

जदयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने इंडी गठबंधन की बैठकों पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि 'ये लोग केवल बैठक पर बैठक करते हैं, कॉफी पीते हैं और घर लौट जाते हैं।' रजक के अनुसार, इस गठबंधन का जनता से कोई नाता नहीं है — न कोई विचार है, न कोई कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि जो दल जनता से दूर हो जाता है, वह राजनीति में भी दूर चला जाता है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब इंडी गठबंधन के भीतर विभिन्न राज्यों में सीट-बँटवारे को लेकर खींचतान की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। गौरतलब है कि बिहार में जदयू, NDA का हिस्सा है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी के नेताओं का इंडी गठबंधन पर यह हमला राज्य की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले समय में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह बयानबाज़ी और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि राज्य-स्तरीय चुनावों में खुलकर एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते हैं। यह ढांचागत कमज़ोरी है, न कि महज़ विपक्षी प्रचार। हालाँकि NDA भी कई राज्यों में सहयोगी दलों के साथ तनाव से अछूता नहीं रहा है — इसलिए गठबंधन-राजनीति की आलोचना करते वक्त यह संतुलन ज़रूरी है कि जवाबदेही दोनों तरफ देखी जाए।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जदयू ने इंडी गठबंधन को भंग करने की माँग क्यों की?
जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि इंडी गठबंधन में न नेतृत्व तय है, न मुद्दों पर सहमति है और न ही सीट-बँटवारे का कोई ठोस ढाँचा है। उनके अनुसार, गठबंधन के दल चुनाव आने पर एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते हैं, जिससे इसका कोई औचित्य नहीं बचता।
राजीव रंजन ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण क्यों दिया?
रंजन ने बताया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और TMC एक-दूसरे के विरुद्ध थे, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर दोनों इंडी गठबंधन में साथ हैं। यह उदाहरण गठबंधन की आंतरिक असंगति को उजागर करता है।
जदयू के नेताओं ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए?
राजीव रंजन ने कहा कि लोकसभा में 37 सीटें मिलने के बाद अखिलेश यादव 'भ्रम के शिकार' हो गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अखिलेश जाति-आधारित नारों से लोगों को गुमराह कर रहे हैं, लेकिन जनता इसे गंभीरता से नहीं लेती।
जदयू महासचिव श्याम रजक ने इंडी गठबंधन की बैठकों पर क्या कहा?
श्याम रजक ने कहा कि इंडी गठबंधन के नेता 'केवल बैठक पर बैठक करते हैं, कॉफी पीते हैं और घर लौट जाते हैं।' उनके अनुसार, इन नेताओं का जनता से कोई सरोकार नहीं है और जो दल जनता से दूर होता है, वह राजनीति में भी हाशिए पर चला जाता है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में NDA की स्थिति पर जदयू का क्या रुख है?
जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने दावा किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में NDA को यूपी में स्पष्ट बढ़त दिख रही है और प्रदेश में एक बार फिर योगी सरकार बनने जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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