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दिल्ली ईओडब्ल्यू ने ज्वेलरी किटी स्कीम से ₹1.5 करोड़ की ठगी के आरोपी को सूरत से गिरफ्तार किया

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दिल्ली ईओडब्ल्यू ने ज्वेलरी किटी स्कीम से ₹1.5 करोड़ की ठगी के आरोपी को सूरत से गिरफ्तार किया

सारांश

बुराड़ी के ज्वेलर पिता-पुत्र ने 10-12 साल तक किटी स्कीम की आड़ में 700 से अधिक लोगों से ₹1.5 करोड़ ठगे, फिर दुबई भाग गए। दिल्ली ईओडब्ल्यू ने आखिरकार बेटे अनिकेत को सूरत एयरपोर्ट पर पकड़ा; पिता अभी भी फरार।

मुख्य बातें

दिल्ली ईओडब्ल्यू ने 24 वर्षीय अनिकेत वर्मा को सूरत हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया।
आरोप है कि आरोपी और उसके पिता ने 700 से अधिक पीड़ितों से ज्वेलरी किटी स्कीम के ज़रिए ₹1.5 करोड़ ठगे।
सदस्यों से ₹1,000 प्रतिमाह जमा कराए जाते थे और 24 महीने बाद ₹28,000 के गहने देने का वादा था।
8 अक्टूबर 2025 को आईपीसी की धाराओं 420, 406 और 120बी के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी।
आरोपी दिल्ली में संपत्तियाँ बेचकर दुबई भाग गए थे; पिता नरेश कुमार वर्मा अभी भी फरार हैं।
ईओडब्ल्यू के अनुसार, कथित तौर पर कुल 1,200 लोगों के साथ धोखाधड़ी की गई।

दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) ने 14 सितंबर 2026 को 24 वर्षीय अनिकेत वर्मा को गिरफ्तार किया, जिस पर आरोप है कि उसने और उसके पिता ने बुराड़ी, नई दिल्ली में ज्वेलरी किटी स्कीम की आड़ में 700 से अधिक लोगों से कथित तौर पर ₹1.5 करोड़ की ठगी की। गिरफ्तारी सूरत हवाई अड्डे पर हिरासत में लिए जाने की सूचना के बाद ईओडब्ल्यू की एक विशेष टीम द्वारा की गई।

मुख्य घटनाक्रम

आरोपी अनिकेत वर्मा और उसके पिता नरेश कुमार वर्मा, जो यमुना विहार और बुराड़ी में 'बाबा श्याम गिरी ज्वेलर्स' नाम की दुकानें चलाते थे, पर आरोप है कि वे पिछले 10-12 वर्षों से किटी सोसाइटी और कमेटियाँ संचालित कर रहे थे। सदस्यों से हर महीने ₹1,000 जमा कराए जाते थे और 24 महीने बाद ₹28,000 मूल्य के गहने या समतुल्य राशि वापस देने का वादा किया जाता था। ईओडब्ल्यू के अनुसार, इस योजना में कथित तौर पर करीब 1,200 लोग शामिल थे।

एफआईआर और जाँच का ब्योरा

इस मामले में 8 अक्टूबर 2025 को आईपीसी की धाराओं 420, 406 और 120बी के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। जाँच के दौरान ईओडब्ल्यू को पीड़ितों से हस्तलिखित रसीदें मिलीं, जिन पर आरोपियों के हस्ताक्षर थे और जो कथित तौर पर जमा की गई किश्तों का दस्तावेजी प्रमाण हैं। ये रसीदें जब्त कर ली गई हैं।

दुबई फरारी और गिरफ्तारी

आरोप है कि दोनों आरोपियों ने दिल्ली में अपनी संपत्तियाँ बेच दीं और शहर से फरार हो गए। इसके बाद उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी किए गए। जाँच में पता चला कि वे दुबई चले गए थे, जहाँ वे अपने परिवार के साथ रह रहे थे। 10 सितंबर 2026 को ईओडब्ल्यू को सूचना मिली कि अनिकेत वर्मा को सूरत हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया है। इस पर एसीपी वीरेंद्र काद्यान की देखरेख में सब-इंस्पेक्टर राहुल तोमर और हेड कॉन्स्टेबल अनिल कुमार की टीम सूरत पहुँची और उसे विधिवत गिरफ्तार कर लिया।

सह-आरोपी अभी भी फरार

अनिकेत के पिता नरेश कुमार वर्मा अभी भी दुबई में हैं। पुलिस ने बताया कि उन्हें पकड़ने के लिए कानूनी और कूटनीतिक माध्यमों का सहारा लिया जा रहा है। गौरतलब है कि अनिकेत ने दिल्ली से 12वीं तक की पढ़ाई की है और उसका परिवार पहले यमुना विहार में रहता था।

आगे की जाँच

पुलिस के अनुसार, पीड़ितों की सटीक संख्या, कुल जमा राशि और इस कथित ठगी में संभावित अन्य लोगों की भूमिका की जाँच अभी जारी है। यह मामला उन शहरी किटी-स्कीम धोखाधड़ियों की श्रृंखला में नवीनतम है, जिनमें छोटे ज्वेलर्स और स्थानीय समितियाँ आम नागरिकों का विश्वास भुनाकर बड़ी रकम हड़प लेते हैं। आने वाले हफ्तों में नरेश कुमार वर्मा की गिरफ्तारी की दिशा में कूटनीतिक प्रयास तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ परिचय और भरोसे की आड़ में छोटे-छोटे निवेशक निशाना बनते हैं। 10-12 वर्षों तक चली यह योजना बताती है कि नियामकीय निगरानी की कितनी बड़ी कमी है — अनौपचारिक किटी समितियाँ किसी विनियमित ढाँचे के बाहर संचालित होती हैं। दुबई फरारी और एलओसी जारी होने के बावजूद देरी से गिरफ्तारी यह सवाल उठाती है कि इंटरपोल या द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधियों का इस्तेमाल कितना कारगर है। जब तक अनौपचारिक निवेश समितियों के लिए कोई कानूनी ढाँचा नहीं बनता, ऐसे मामले दोहराते रहेंगे।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ज्वेलरी किटी स्कीम धोखाधड़ी का यह मामला क्या है?
यह बुराड़ी, दिल्ली के 'बाबा श्याम गिरी ज्वेलर्स' के मालिक नरेश कुमार वर्मा और उनके बेटे अनिकेत वर्मा के खिलाफ दर्ज मामला है। आरोप है कि दोनों ने किटी स्कीम की आड़ में 700 से अधिक लोगों से ₹1.5 करोड़ ठगे और फिर दुबई भाग गए।
आरोपी अनिकेत वर्मा को कहाँ और कैसे गिरफ्तार किया गया?
10 सितंबर 2026 को सूरत हवाई अड्डे पर अनिकेत वर्मा को हिरासत में लिए जाने की जानकारी मिलने के बाद, दिल्ली ईओडब्ल्यू की एक टीम सूरत पहुँची और उसे गिरफ्तार कर लिया। टीम में सब-इंस्पेक्टर राहुल तोमर और हेड कॉन्स्टेबल अनिल कुमार शामिल थे, जो एसीपी वीरेंद्र काद्यान की देखरेख में काम कर रहे थे।
पीड़ितों को क्या झाँसा दिया गया था?
आरोपियों ने सदस्यों को हर महीने ₹1,000 जमा करने के लिए राजी किया और 24 महीने बाद ₹28,000 मूल्य के गहने या समतुल्य राशि लौटाने का वादा किया। ईओडब्ल्यू के अनुसार, इस योजना में कथित तौर पर करीब 1,200 लोग शामिल थे।
सह-आरोपी नरेश कुमार वर्मा का क्या हुआ?
नरेश कुमार वर्मा अभी भी दुबई में हैं और फरार हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया है और कानूनी व कूटनीतिक माध्यमों से उन्हें वापस लाने की कोशिश जारी है।
इस मामले में किन धाराओं के तहत मामला दर्ज है?
8 अक्टूबर 2025 को आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (आपराधिक विश्वासघात) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। कई पीड़ितों की शिकायत पर यह मुकदमा दर्ज हुआ था।
राष्ट्र प्रेस
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