27 जुलाई 2026
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इंस्टाग्राम पर फर्जी ज्वेलरी बेचकर ₹1.16 लाख की ठगी, दिल्ली साइबर पुलिस ने हरियाणा से आरोपी दबोचा

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इंस्टाग्राम पर फर्जी ज्वेलरी बेचकर ₹1.16 लाख की ठगी, दिल्ली साइबर पुलिस ने हरियाणा से आरोपी दबोचा

सारांश

इंस्टाग्राम पर फर्जी ज्वेलरी का विज्ञापन, व्हाट्सएप पर भरोसा और फिर ₹1.16 लाख की ठगी — दिल्ली साइबर पुलिस ने हरियाणा के होडल से अंकित ठाकुर को दबोचा। गिरोह का मास्टरमाइंड शमीम अभी भी फरार है और जाँच जारी है।

मुख्य बातें

दिल्ली सेंट्रल जिला साइबर पुलिस ने अंकित ठाकुर (26) , निवासी होडल, पलवल, हरियाणा , को गिरफ्तार किया।
आरोपी गिरोह ने इंस्टाग्राम पर फर्जी ज्वेलरी विज्ञापन के जरिए एक महिला से ₹1,16,975 की ठगी की।
ठगी की रकम में से ₹97,580 कोटक महिंद्रा बैंक क्रेडिट कार्ड और ₹19,395 अन्य क्रेडिट कार्ड के बकाया चुकाने में इस्तेमाल हुए।
अंकित को ठगी का केवल 10% मिलता था; शेष 90% फरार साथी शमीम के पास जाता था।
राखी नामक महिला के नाम के सिम कार्ड और क्रेडिट कार्ड का दुरुपयोग; उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई।
फरार आरोपी शमीम और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी।

नई दिल्ली की सेंट्रल जिला साइबर थाना पुलिस ने 27 जुलाई 2026 को इंस्टाग्राम पर फर्जी ज्वेलरी का विज्ञापन देकर एक महिला से ₹1,16,975 की ठगी करने के आरोप में एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान हरियाणा के पलवल जिले के होडल निवासी 26 वर्षीय अंकित ठाकुर के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके पास से एक मोबाइल फोन बरामद कर जब्त किया है, जबकि इस मामले का मुख्य साथी शमीम अभी भी फरार है।

शिकायत और घटनाक्रम

15 फरवरी 2026 को एक महिला ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के अनुसार, महिला ने इंस्टाग्राम पर ज्वेलरी का एक आकर्षक विज्ञापन देखा और उसमें दिए गए नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की, परंतु कॉल नहीं लगी। कुछ समय बाद एक अलग नंबर से उसे वापस फोन आया और कॉल करने वाले ने खुद को ज्वेलरी विक्रेता का प्रतिनिधि बताया। इसके बाद व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क बनाए रखा गया और ज्वेलरी भेजने का भरोसा दिलाया गया।

आरोपियों की बातों पर विश्वास करते हुए महिला ने 14 फरवरी 2026 को कई यूपीआई और पेटीएम लेन-देन के जरिए कुल ₹1,16,975 ट्रांसफर कर दिए। लंबे इंतजार के बाद जब ज्वेलरी नहीं पहुँची, तब महिला को ठगी का अहसास हुआ और उसने पुलिस का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

तकनीकी जाँच में खुला ठगी का जाल

जाँच के दौरान साइबर पुलिस ने इंस्टाग्राम खाते, मोबाइल नंबरों और वित्तीय लेन-देन का विस्तृत तकनीकी विश्लेषण किया। जाँच में सामने आया कि ठगी की रकम में से ₹97,580 एक व्यक्ति के नाम पर जारी कोटक महिंद्रा बैंक के क्रेडिट कार्ड का बकाया चुकाने में इस्तेमाल किए गए, जबकि शेष ₹19,395 किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर जारी एक और क्रेडिट कार्ड के भुगतान में लगाए गए।

यह भी पता चला कि इनमें से एक क्रेडिट कार्ड और उससे जुड़ा सिम कार्ड राखी नामक एक महिला के नाम पर था, लेकिन उसका वास्तविक उपयोग अंकित ठाकुर कर रहा था। पूछताछ में अंकित ने स्वीकार किया कि वह उस सिम पर आने वाले ओटीपी प्राप्त करता था और धोखाधड़ी वाले लेन-देन को अंजाम देता था। इसके बदले वह राखी को ₹5,000 से ₹10,000 तक देता था।

गिरोह की कार्यप्रणाली

अंकित ने पूछताछ में यह भी खुलासा किया कि ठगी की कुल रकम का केवल 10 प्रतिशत हिस्सा उसे मिलता था, जबकि शेष 90 प्रतिशत उसका साथी शमीम अपने पास रखता था। गिरोह जानबूझकर ठगी की रकम सीधे बैंक खातों में न रखकर दूसरों के नाम पर जारी क्रेडिट कार्ड के बकाया भुगतान में लगाता था, ताकि वित्तीय लेन-देन की डिजिटल ट्रेल को उलझाया जा सके।

गौरतलब है कि इस गिरोह का तरीका इंस्टाग्राम पर आकर्षक ज्वेलरी विज्ञापन, व्हाट्सएप पर विश्वास-निर्माण और फिर डिजिटल माध्यमों से भुगतान लेने पर आधारित था — एक ऐसी रणनीति जो आज के सोशल-कॉमर्स के दौर में तेजी से आम होती जा रही है।

गिरफ्तारी और आगे की जाँच

तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने हरियाणा के होडल में छापेमारी कर अंकित ठाकुर को गिरफ्तार किया। राखी के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की गई है। अब पुलिस फरार आरोपी शमीम और इस साइबर गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों की तलाश में जुटी है। पूरे नेटवर्क की जाँच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सोशल-कॉमर्स धोखाधड़ी की उस व्यापक प्रवृत्ति का संकेत है जिसमें इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता को हथियार बनाया जा रहा है। गिरोह द्वारा दूसरों के नाम के क्रेडिट कार्ड में रकम खपाने की तकनीक बताती है कि साइबर अपराधी अब वित्तीय ट्रेल छिपाने में भी माहिर हो रहे हैं। असली सवाल यह है कि इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म फर्जी ज्वेलरी विज्ञापनों की पड़ताल के लिए क्या कदम उठा रहे हैं — क्योंकि गिरफ्तारी के बाद भी ऐसे विज्ञापन अनगिनत खातों से चलते रहते हैं। जब तक प्लेटफॉर्म-स्तरीय जवाबदेही तय नहीं होती, पुलिसिया कार्रवाई इस समस्या का स्थायी हल नहीं बन सकती।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली इंस्टाग्राम ज्वेलरी ठगी मामला क्या है?
यह एक साइबर धोखाधड़ी का मामला है जिसमें आरोपियों ने इंस्टाग्राम पर फर्जी ज्वेलरी का विज्ञापन देकर एक महिला को व्हाट्सएप के जरिए विश्वास में लिया और यूपीआई व पेटीएम के माध्यम से 14 फरवरी 2026 को ₹1,16,975 ठग लिए। दिल्ली साइबर पुलिस ने जाँच के बाद 27 जुलाई 2026 को मुख्य आरोपी अंकित ठाकुर को हरियाणा के होडल से गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपी अंकित ठाकुर कौन है?
अंकित ठाकुर हरियाणा के पलवल जिले के होडल का 26 वर्षीय निवासी है। वह गिरोह में दूसरों के नाम के सिम कार्ड पर आने वाले ओटीपी प्राप्त कर धोखाधड़ी वाले लेन-देन पूरे करता था और इसके बदले ठगी की रकम का 10 प्रतिशत हिस्सा लेता था।
ठगी की रकम का क्या हुआ?
₹1,16,975 में से ₹97,580 कोटक महिंद्रा बैंक के एक क्रेडिट कार्ड का बकाया चुकाने में और ₹19,395 किसी अन्य क्रेडिट कार्ड के भुगतान में इस्तेमाल किए गए। गिरोह ने जानबूझकर रकम सीधे बैंक खातों में न रखकर क्रेडिट कार्ड भुगतान में लगाई ताकि डिजिटल ट्रेल को उलझाया जा सके।
फरार आरोपी शमीम की क्या भूमिका थी?
पूछताछ के अनुसार शमीम इस गिरोह का मुख्य साझेदार था जो ठगी की कुल रकम का 90 प्रतिशत हिस्सा अपने पास रखता था। पुलिस अभी शमीम और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
ऑनलाइन ज्वेलरी ठगी से बचने के लिए क्या सावधानी बरतें?
किसी भी सोशल मीडिया विज्ञापन के आधार पर भुगतान करने से पहले विक्रेता की आधिकारिक वेबसाइट और समीक्षाएँ जाँचें। अनजान नंबरों से आने वाले व्हाट्सएप संदेशों पर भरोसा न करें और यूपीआई भुगतान केवल सत्यापित प्लेटफॉर्म के माध्यम से करें। ठगी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें।
राष्ट्र प्रेस
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