झारखंड के 100 सीएचसी होंगे हाईटेक: 24 घंटे सेवा के लिए 600 डॉक्टरों के नए पद, ग्रामीण स्वास्थ्य को मिलेगा बड़ा बल
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के 100 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से सुसज्जित करने की व्यापक योजना तैयार की है। इन केंद्रों पर 24 घंटे स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करने के लिए करीब 600 नए डॉक्टरों के साथ-साथ बड़ी संख्या में नर्स, तकनीकी और पैरामेडिकल कर्मियों के पद सृजित किए जाने की तैयारी है। रांची में 25 सितंबर 2026 को हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह रूपरेखा स्पष्ट की गई।
बैठक में क्या हुए निर्णय
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने शुक्रवार को प्रदेश के सभी जिलों के सिविल सर्जनों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने सभी अधिकारियों को इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव 10 दिनों के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम-से-कम एक सीएचसी को उन्नत सुविधाओं से लैस किया जाए।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग की विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा, डीआईसी डॉ. सिद्धार्थ सान्याल सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी प्रत्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।
पदों का पुनर्गठन और नई नियुक्तियाँ
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, उन्नत किए जाने वाले सीएचसी में मरीजों की आवश्यकता के अनुरूप चिकित्सकों, नर्सों, तकनीशियनों और पैरामेडिकल कर्मचारियों के पद सृजित किए जाएंगे। पुराने एवं अनुपयोगी पदों का पुनर्गठन कर उन्हें नई ज़रूरतों के अनुसार ढाला जाएगा। रांची जिले के बुंडू, नामकुम, सिल्ली, रातू, कांके और मांडर स्थित सीएचसी को भी इस योजना के अंतर्गत विकसित करने का प्रस्ताव है।
ट्रॉमा सेंटर और एमसीएच केंद्रों की भी समीक्षा
सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिले, इसके लिए तोपचांची, बरही, निरसा, हंसडीहा, बुंडू और चैनपुर के स्वास्थ्य केंद्रों को ट्रॉमा सेंटर के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा, बैठक में 30 और 50 बेड वाले प्रस्तावित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) केंद्रों तथा 100 बेड वाले जिला अस्पतालों के लिए आवश्यक मानव संसाधन की भी समीक्षा की गई।
आम जनता पर असर
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि सीएचसी स्तर पर ही जाँच, दवाइयाँ और आवश्यक इलाज की सुविधा उपलब्ध होने से ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए जिला अस्पताल या बड़े शहरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा। इससे न केवल समय पर उपचार सुनिश्चित होगा, बल्कि मरीजों और उनके परिवारों की आवागमन व उपचार संबंधी आर्थिक बोझ भी काफी हद तक कम होगी।
क्या होगा आगे
सभी जिलों के सिविल सर्जनों को 10 दिनों के भीतर अपने-अपने जिले से विस्तृत प्रस्ताव भेजने हैं, जिसके आधार पर पदों के पुनर्गठन और नई भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस योजना के क्रियान्वयन से झारखंड के दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है।