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झारखंड JSSC-CGL पेपर लीक: पटना के गुप्त ठिकाने पर 3 घंटे में 370 सवाल रटवाए, फिर जलाए प्रश्नपत्र

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झारखंड JSSC-CGL पेपर लीक: पटना के गुप्त ठिकाने पर 3 घंटे में 370 सवाल रटवाए, फिर जलाए प्रश्नपत्र

सारांश

झारखंड JSSC-CGL पेपर लीक कांड में SIT जांच ने चौंकाने वाला खुलासा किया — परीक्षा से पहले पटना के गुप्त ठिकाने पर अभ्यर्थियों को 3 घंटे में 370 सवाल रटवाए गए, फिर सबूत जलाए गए। शैक्षणिक प्रमाणपत्र और ब्लैंक चेक गिरवी रखकर भारी रकम वसूलने की योजना थी।

मुख्य बातें

SIT जांच के अनुसार, 20 सितंबर 2024 को अभ्यर्थियों को पटना के गुप्त ठिकाने पर ले जाकर 3 घंटे में 370 सवाल रटवाए गए।
रटवाने के बाद तीनों प्रश्नपत्र और उत्तर-सेट कथित तौर पर जला दिए गए — सबूत मिटाने के लिए।
कृष्णा डिफेंस एकेडमी, भीखना पहाड़ी, पटना के संचालक राकेश रंजन और आरोपी संजय कुमार की मुख्य भूमिका सामने आई।
अमित कुमार ने दिसंबर 2024 में संजय कुमार के खाते में ₹3 लाख ट्रांसफर किए; नकद भुगतान के भी साक्ष्य मिले।
चयन की गारंटी के बदले अभ्यर्थियों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र और ब्लैंक चेक गिरवी रखे गए थे।
एसआईटी नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन और अन्य संलिप्त बिचौलियों की जांच जारी रखे हुए है।

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय (JSSC-CGL) भर्ती परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले में विशेष जांच टीम (SIT) की जांच रिपोर्ट ने एक गंभीर तस्वीर उजागर की है। रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा से ठीक पहले अभ्यर्थियों को पटना के एक गुप्त ठिकाने पर ले जाकर तीन अलग-अलग प्रश्नपत्रों के कुल 370 सवालों के जवाब महज तीन घंटे में रटवाए गए। सबूत मिटाने के लिए बाद में उन प्रश्नपत्रों को कथित तौर पर जला दिया गया।

मुख्य घटनाक्रम

20 सितंबर 2024 को विभिन्न स्थानों से अभ्यर्थियों को पटना बुलाया गया। उन्हें पहले गांधी मैदान और बुद्ध स्मृति पार्क के आसपास छोटे-छोटे समूहों में इकट्ठा किया गया, फिर एक सुरक्षित मकान में ले जाया गया। वहाँ तीनों प्रश्नपत्रों के उत्तरों के तीन सेट अभ्यर्थियों को सौंपे गए और उन्हें याद करने के लिए करीब तीन घंटे का समय दिया गया।

रटवाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, एसआईटी के अनुसार, प्रश्नपत्रों और उत्तर-सेटों को कथित तौर पर जला दिया गया। इसके बाद अभ्यर्थियों को अलग-अलग समूहों में परीक्षा केंद्रों की ओर रवाना किया गया।

रैकेट का संचालन और गिरफ्तार आरोपी

जांच एजेंसी के मुताबिक इस रैकेट का मुख्य संचालन पटना के भीखना पहाड़ी स्थित कृष्णा डिफेंस एकेडमी के संचालक राकेश रंजन और अन्य बिचौलियों द्वारा किया जा रहा था। गिरफ्तार आरोपी संजय कुमार की इस नेटवर्क में मुख्य भूमिका सामने आई है।

एसआईटी की जांच में अनिल कुमार, विजय यादव, उत्तम कुमार, त्रिभुवन यादव, राम कृष्ण कुमार सिंह और अमित कुमार सहित कई ऐसे अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं, जिन्हें कथित तौर पर इस नेटवर्क का लाभ मिला। जांच के अनुसार, अमित कुमार ने दिसंबर 2024 में आरोपी संजय कुमार के बैंक खाते में करीब ₹3 लाख ट्रांसफर किए थे, जबकि अन्य अभ्यर्थियों द्वारा नकद भुगतान के साक्ष्य भी मिले हैं।

गिरोह की रणनीति: प्रमाणपत्र और ब्लैंक चेक गिरवी

गिरोह की सोची-समझी रणनीति यह थी कि परिणाम घोषित होने से पहले पूरी रकम न वसूली जाए। गिरफ्तार अभियुक्तों के बयानों के अनुसार, चयन की गारंटी के बदले अभ्यर्थियों से उनके शैक्षणिक प्रमाणपत्र और ब्लैंक चेक गिरवी रखे गए थे। परिणाम घोषित होने के बाद इन दस्तावेजों के जरिये उनसे भारी-भरकम राशि वसूली जाती थी।

यह प्रणाली इस तरह बनाई गई थी कि अभ्यर्थी बाद में मुकर न सकें — उनके खिलाफ ही उनके दस्तावेज हथियार की तरह इस्तेमाल होते। गौरतलब है कि यह रैकेट भारत में परीक्षा-धोखाधड़ी के उस व्यापक पैटर्न का हिस्सा है, जिसमें अभ्यर्थियों की आर्थिक और भावनात्मक कमजोरियों का शोषण किया जाता है।

आम अभ्यर्थियों पर असर

यह कांड उन हजारों ईमानदार अभ्यर्थियों के लिए बड़ा धक्का है, जिन्होंने JSSC-CGL परीक्षा की तैयारी में महीनों-सालों की मेहनत लगाई। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की माँग को लेकर अभ्यर्थियों में व्यापक आक्रोश है।

आगे क्या होगा

एसआईटी फिलहाल इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन, अन्य संलिप्त बिचौलियों और अभ्यर्थियों की भूमिका की गहराई से पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसी के अनुसार आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं। इस मामले में न्यायिक और प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा अगले कुछ हफ्तों में और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जितनी बाहरी बिचौलियों की। जब तक भर्ती प्रणाली में संरचनात्मक सुधार नहीं होता, ऐसे रैकेट केवल नाम और चेहरे बदलकर चलते रहेंगे।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

JSSC-CGL पेपर लीक मामले में SIT ने क्या खुलासा किया है?
SIT जांच रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा से पहले 20 सितंबर 2024 को अभ्यर्थियों को पटना के एक गुप्त ठिकाने पर ले जाकर तीन प्रश्नपत्रों के 370 सवालों के जवाब तीन घंटे में रटवाए गए। सबूत मिटाने के लिए बाद में प्रश्नपत्र और उत्तर-सेट कथित तौर पर जला दिए गए।
इस रैकेट का मुख्य आरोपी कौन है?
जांच एजेंसी के अनुसार, इस रैकेट का मुख्य संचालन पटना के भीखना पहाड़ी स्थित कृष्णा डिफेंस एकेडमी के संचालक राकेश रंजन और बिचौलिए संजय कुमार द्वारा किया जा रहा था। अमित कुमार सहित कई अभ्यर्थियों के नाम भी सामने आए हैं जिन्होंने कथित तौर पर इस नेटवर्क का लाभ उठाया।
गिरोह ने अभ्यर्थियों से पैसे कैसे वसूले?
गिरोह ने चयन की गारंटी देकर अभ्यर्थियों से शैक्षणिक प्रमाणपत्र और ब्लैंक चेक गिरवी रखे। परिणाम घोषित होने के बाद इन दस्तावेजों के जरिये भारी रकम वसूली जाती थी; परीक्षा से पहले पूरी राशि नहीं ली जाती थी ताकि अभ्यर्थी बाद में मना न कर सकें।
इस मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है और जांच कहाँ तक पहुँची है?
अब तक राकेश रंजन और संजय कुमार सहित कई आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। SIT अभी भी नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन, अन्य बिचौलियों और लाभान्वित अभ्यर्थियों की भूमिका की गहराई से पड़ताल कर रही है, और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।
क्या JSSC-CGL परीक्षा रद्द होगी?
इस मामले में परीक्षा को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं हुई है। SIT जांच चल रही है और न्यायिक व प्रशासनिक निर्णय की दिशा आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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