गढ़वा में पेट्रोल पंप सील: गैलन में ईंधन के लिए अतिरिक्त वसूली का वीडियो वायरल, SDM ने की कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के गढ़वा जिले में एक पेट्रोल पंप पर गैलन में पेट्रोल और डीजल देने के बदले अतिरिक्त पैसे वसूले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उस पेट्रोल पंप को 18 मई 2026 को सील कर दिया। गढ़वा के उप-विभागीय दंडाधिकारी (SDM) संजय पांडे ने पुष्टि की कि जाँच रिपोर्ट सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया।
मुख्य घटनाक्रम
वायरल वीडियो में पेट्रोल पंप का एक कर्मचारी गैलन में ईंधन देने के लिए ग्राहकों से निर्धारित दर से अधिक पैसे माँगता दिख रहा था। कृषि कार्यों में उपयोग होने वाले डीजल के लिए भी अतिरिक्त राशि वसूली जा रही थी। वीडियो सामने आते ही प्रशासनिक अमले में हलचल मच गई और जाँच के आदेश जारी किए गए।
SDM संजय पांडे के अनुसार, वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए प्रशासन ने पहले ही जाँच शुरू कर दी थी। इसी दौरान उच्च अधिकारियों की ओर से भी इस मामले की जाँच के निर्देश प्राप्त हुए।
जाँच और कार्रवाई की प्रक्रिया
जाँच की जिम्मेदारी सर्किल अधिकारी और प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी को सौंपी गई थी। जाँच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO), आंचल अधिकारी और थाना प्रभारी सहित कई अधिकारी मौके पर पहुँचे और पेट्रोल पंप को सील कर दिया।
जाँच के दौरान पेट्रोल पंप के स्टॉक की भी जाँच की गई, जिसमें स्टॉक निर्धारित मात्रा से कम पाया गया। यह तथ्य मामले को और गंभीर बनाता है, क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि ईंधन की आपूर्ति में अनियमितता व्यापक हो सकती है।
इंडियन ऑयल को भी सूचना
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों को भी इस मामले की जानकारी दी गई है। कंपनी ने संबंधित पेट्रोल पंप को नोटिस जारी कर दिया है। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि डीलरशिप स्तर पर भी उचित कार्रवाई हो।
आम जनता पर असर और प्रशासन की सफाई
SDM संजय पांडे ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में पेट्रोल-डीजल की कोई समग्र किल्लत नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी एक पंप पर ईंधन उपलब्ध न हो, तो निकट के दूसरे पंप पर आपूर्ति सुनिश्चित है। प्रशासन ने सभी पेट्रोल पंप संचालकों के साथ बैठक कर यह निर्देश दिया है कि जिस पंप पर ईंधन उपलब्ध न हो, वहाँ अनिवार्य रूप से सूचना बोर्ड लगाया जाए।
क्या होगा आगे
पेट्रोल पंप को सील करने के बाद अब यह देखना होगा कि इंडियन ऑयल और जिला प्रशासन मिलकर डीलरशिप के विरुद्ध क्या दीर्घकालिक कदम उठाते हैं। गौरतलब है कि ईंधन में मूल्य-अनियमितता के ऐसे मामले उपभोक्ता संरक्षण और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दंडनीय हैं। यह मामला इस बात का भी उदाहरण है कि किस प्रकार सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो प्रशासनिक जवाबदेही को तेज़ कर सकते हैं।