पूर्वी सिंहभूम में सेरेब्रल मलेरिया का प्रकोप: 48 घंटे में 3 बच्चों की मौत, 20 से अधिक एमजीएम अस्पताल में भर्ती
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड में सेरेब्रल (ब्रेन) मलेरिया ने गंभीर रूप धारण कर लिया है — मात्र 48 घंटों के भीतर तीन बच्चों की मौत हो चुकी है और 20 से अधिक मरीज जमशेदपुर के महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती हैं। 28 जून 2026 तक प्रभावित गाँवों में नए संक्रमित लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग ने युद्धस्तर पर अभियान छेड़ दिया है।
मृत बच्चों की पहचान और गंभीर मामले
जिन तीन बच्चों की मौत हुई है, उनमें पीएमश्री कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की सातवीं कक्षा की छात्रा लख्खी सरदार, दौड़दोड़िया गाँव का आठ वर्षीय राहुल सरदार और कंदर गाँव की आठ वर्षीय सुबोला सरदार शामिल हैं। मृतका सुबोला की एक वर्षीय बहन खुशबू सरदार भी इस गंभीर संक्रमण की चपेट में है — उसे एमजीएम अस्पताल की पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है।
मुख्य घटनाक्रम और स्क्रीनिंग अभियान
जिला सर्विलांस पदाधिकारी असद ने बताया कि मानसून की शुरुआत के साथ ही पोटका प्रखंड के नौ गाँवों में मलेरिया और सेरेब्रल मलेरिया के मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने बच्चों की मौत की पुष्टि की है। सघन स्क्रीनिंग अभियान में कस्तूरबा गांधी विद्यालय की तीन छात्राओं और आदिम जनजाति सबर समुदाय की नौ माह की एक बच्ची समेत 14 से अधिक नए संक्रमितों की पहचान हो चुकी है। अब तक 600 से अधिक ग्रामीणों की जाँच की जा चुकी है।
निजी क्लीनिक सील, कारण बताओ नोटिस जारी
मृत छात्रा लख्खी सरदार के इलाज में कथित लापरवाही बरतने के आरोप में प्रशासन ने पोटका स्थित एक निजी क्लीनिक को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया है। जाँच में सामने आया कि छात्रा में ब्रेन मलेरिया के स्पष्ट लक्षण होने के बावजूद उसे उचित उपचार नहीं दिया गया। प्रशासन ने क्लीनिक संचालक को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है।
सरकार की प्रतिक्रिया और संसाधन तैनाती
स्वास्थ्य विभाग की एक उच्चस्तरीय टीम ने पोटका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया और संसाधनों की कमी पर नाराजगी जताई। टीम ने अतिरिक्त स्प्रे पंप, रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (आरडीटी) किट और जीवनरक्षक दवाओं की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रभावित क्षेत्रों में मास फीवर सर्वे, घर-घर स्क्रीनिंग और मच्छरजनित रोग नियंत्रण अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है।
आम जनता के लिए स्वास्थ्य सलाह
चिकित्सा अधिकारियों ने अपील की है कि तेज बुखार, कंपकंपी, सिरदर्द, उल्टी, बेहोशी या दौरे जैसे लक्षण दिखते ही तत्काल निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में जाँच कराएँ। ग्रामीणों को मच्छरदानी का नियमित उपयोग करने, पूरी बाँह के कपड़े पहनने और घरों के आसपास पानी जमा न होने देने की सख्त सलाह दी जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड के आदिवासी बहुल इलाकों में हर मानसून सीजन में मलेरिया का प्रकोप एक बड़ी चुनौती बनता है।