1 जुलाई 2026
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पूर्वी सिंहभूम में मलेरिया से 4 मौतें, झारखंड सरकार ने जारी किया राज्यव्यापी अलर्ट

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पूर्वी सिंहभूम में मलेरिया से 4 मौतें, झारखंड सरकार ने जारी किया राज्यव्यापी अलर्ट

सारांश

पूर्वी सिंहभूम में मलेरिया से 4 मौतें — और झारखंड सरकार हरकत में आई। अपर मुख्य सचिव ने सभी उपायुक्तों को युद्धस्तरीय अभियान, RDT किट वितरण और त्रिस्तरीय समीक्षा के निर्देश दिए। मानसून में मच्छरजनित बीमारियों का यह खतरा राज्य के आदिवासी जिलों के लिए हर साल की कड़वी सच्चाई है।

मुख्य बातें

पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया से कम से कम 4 लोगों की मौत की पुष्टि के बाद झारखंड सरकार ने 1 जुलाई 2026 को राज्यव्यापी अलर्ट जारी किया।
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने सभी उपायुक्तों को तत्काल युद्धस्तरीय कार्ययोजना बनाने और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए।
बुखार-प्रभावित इलाकों में MPW और सहियाओं के ज़रिए सक्रिय सर्वेक्षण; प्रत्येक नए मामले पर मास/फीवर सर्वे अनिवार्य।
अधिक प्रभावित गाँवों में सहियाओं को RDT किट और मलेरिया-रोधी दवाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी; कीटनाशी छिड़काव में तेज़ी के निर्देश।
निगरानी के लिए त्रिस्तरीय समीक्षा व्यवस्था — साप्ताहिक, पखवाड़ेवार और मासिक जिला-स्तरीय बैठकें।

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया संक्रमण से कम से कम 4 लोगों की मौत और मामलों में तेज़ी से हो रही वृद्धि के बाद झारखंड सरकार ने 1 जुलाई 2026 को राज्यभर में स्वास्थ्य आपातकालीन अलर्ट जारी किया। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने प्रदेश के सभी उपायुक्तों को मलेरिया की रोकथाम और नियंत्रण के लिए तत्काल युद्धस्तरीय अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य निर्देश और कार्ययोजना

जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन क्षेत्रों में मलेरिया के मामले सामने आ रहे हैं, वहाँ तत्काल निगरानी बढ़ाई जाए और प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही तय की जाए। बुखार के अधिक मामलों वाले इलाकों में बहुद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (MPW) और सहियाओं के ज़रिए सक्रिय सर्वेक्षण कराया जाएगा। मलेरिया की आशंका वाले प्रत्येक मरीज़ की तत्काल जाँच और संक्रमण की पुष्टि होने पर बिना देरी उपचार शुरू करना अनिवार्य किया गया है।

गंभीर रोगियों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कर आवश्यक चिकित्सा सुविधा देने तथा सभी मरीज़ों के उपचार और फॉलो-अप की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है। किसी भी क्षेत्र में नया मामला मिलने पर पूरे इलाके में मास सर्वे या फीवर सर्वे अनिवार्य रूप से चलाया जाएगा।

डेटा संग्रह और दवा आपूर्ति

निर्देश के अनुसार, प्रत्येक गाँव का ग्रामवार मलेरिया डेटा तैयार किया जाएगा। अधिक प्रभावित गाँवों की सहियाओं को रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT) किट और आवश्यक दवाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त जाँच सामग्री और मलेरिया-रोधी दवाओं का भंडारण सुनिश्चित करने के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में कीटनाशी दवाओं का छिड़काव और लार्वा नियंत्रण गतिविधियों में तेज़ी लाने को कहा गया है।

जनजागरूकता अभियान

सरकार ने मलेरिया से बचाव के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया है ताकि लोग समय पर जाँच कराएँ और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएँ। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के मौसम में मच्छरजनित बीमारियों का खतरा पूरे झारखंड में बढ़ जाता है, और पूर्वी सिंहभूम जैसे आदिवासी-बहुल जिले ऐतिहासिक रूप से अधिक संवेदनशील रहे हैं।

त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था

विभाग ने मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रमों की निगरानी के लिए त्रिस्तरीय समीक्षा व्यवस्था लागू की है। इसके तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर साप्ताहिक, सिविल सर्जन स्तर पर पखवाड़ेवार और उपायुक्त की अध्यक्षता में मासिक जिला-स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित होगी। अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने सभी उपायुक्तों से मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रमों की व्यक्तिगत निगरानी सुनिश्चित करने को कहा है।

आगे की राह

गौरतलब है कि झारखंड के आदिवासी और वनांचल क्षेत्रों में हर मानसून मलेरिया एक बड़ी चुनौती बनता है। इस बार 4 मौतों के बाद सरकार की प्रतिक्रिया की गति और ज़मीनी क्रियान्वयन यह तय करेगा कि संक्रमण की यह लहर और कितने जिलों तक फैलती है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अगले कुछ सप्ताह निर्णायक होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि यह प्रतिक्रिया मौतों के बाद क्यों आई — पहले क्यों नहीं। झारखंड के आदिवासी जिलों में मलेरिया हर मानसून में उभरता है, और हर बार निर्देश जारी होते हैं, फिर भी ज़मीनी तैयारी अपर्याप्त रहती है। त्रिस्तरीय समीक्षा व्यवस्था कागज़ पर मज़बूत दिखती है, लेकिन दूरदराज़ के गाँवों तक RDT किट और दवाओं की वास्तविक पहुँच ही असली कसौटी होगी। जब तक मानसून-पूर्व तैयारी को संस्थागत रूप नहीं दिया जाता, यह चक्र हर साल दोहराता रहेगा।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्वी सिंहभूम में मलेरिया से कितनी मौतें हुई हैं?
झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया संक्रमण से कम से कम 4 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इसके बाद झारखंड सरकार ने 1 जुलाई 2026 को राज्यव्यापी अलर्ट जारी किया।
झारखंड सरकार ने मलेरिया नियंत्रण के लिए क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने सभी उपायुक्तों को युद्धस्तरीय अभियान चलाने, MPW और सहियाओं के ज़रिए सक्रिय सर्वेक्षण करने, RDT किट और दवाएँ वितरित करने तथा कीटनाशी छिड़काव तेज़ करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही त्रिस्तरीय समीक्षा व्यवस्था भी लागू की गई है।
मलेरिया नियंत्रण के लिए त्रिस्तरीय समीक्षा व्यवस्था क्या है?
इस व्यवस्था के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर साप्ताहिक, सिविल सर्जन स्तर पर पखवाड़ेवार और उपायुक्त की अध्यक्षता में मासिक जिला-स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित होगी। यह व्यवस्था मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रमों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।
सहियाओं की इस अभियान में क्या भूमिका होगी?
सहियाओं को रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT) किट और मलेरिया-रोधी दवाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि वे गाँव स्तर पर तत्काल जाँच और प्रारंभिक उपचार कर सकें। बुखार के अधिक मामलों वाले इलाकों में वे MPW के साथ मिलकर सक्रिय सर्वेक्षण भी करेंगी।
झारखंड में मानसून के दौरान मलेरिया इतना गंभीर क्यों होता है?
झारखंड के आदिवासी और वनांचल जिले — विशेषकर पूर्वी सिंहभूम जैसे क्षेत्र — मानसून में जलभराव और घने जंगलों के कारण मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण बन जाते हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं तक सीमित पहुँच और देरी से जाँच के कारण संक्रमण गंभीर रूप ले लेता है।
राष्ट्र प्रेस
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