पश्चिम बंगाल बनेगा इलेक्ट्रॉनिक्स और AI का हब: केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने 29 सितंबर 2026 को कोलकाता चैंबर ऑफ कॉमर्स के मंच से घोषणा की कि पश्चिम बंगाल को केंद्र सरकार की मेगा इंडस्ट्रियल परियोजनाओं के लिए प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बंगाल को देश का 'टैलेंट कैपिटल' बताते हुए कहा कि यहाँ इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर जैसे बड़े निवेश लाने की भरपूर संभावनाएँ हैं।
मुख्य घोषणाएँ
मंत्री प्रसाद ने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है जिसके तहत औद्योगिक नगर (इंडस्ट्रियल सिटी) विकसित किए जाएंगे — जहाँ कंपनियाँ निवेश करेंगी और नई फ़ैक्ट्रियाँ स्थापित होंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार इसके लिए प्रोत्साहन योजनाएँ भी लाएगी।
प्रसाद ने कहा कि AI और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में युवाओं की स्किलिंग सुनिश्चित की जाएगी तथा डेटा सेंटर के लिए उपयुक्त स्थान की तलाश की जाएगी, ताकि निवेश, उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग राज्य में आए और स्थानीय युवाओं को रोज़गार मिले।
डबल इंजन सरकार का संदेश
केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'ये बंगाल का स्वर्णिम काल है, जहाँ दशकों बाद डबल इंजन चल रहा है।' उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में राज्य — दोनों सरकारों के समन्वय को बंगाल के औद्योगिक पुनरुत्थान की बुनियाद बताया।
प्रसाद ने आश्वस्त किया कि 'बंगाल प्राथमिकता पर रहेगा' और राज्य के बुनियादी ढाँचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) में केंद्र सरकार का पूरा सहयोग होगा। उन्होंने कहा कि जो कमियाँ रही हैं, उन्हें तेज़ी से दूर किया जा रहा है।
IT, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्टार्टअप पर ज़ोर
मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि पश्चिम बंगाल में युवा वर्ग तकनीक और स्टार्टअप क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी चाहते हैं, और उन्हें पूरा प्रोत्साहन दिया जाएगा। IT और इलेक्ट्रॉनिक्स में भारत की तेज़ प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बंगाल को इस क्षेत्र का बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की क्षमता बताई।
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में सेमीकंडक्टर मिशन और PLI योजनाओं के विस्तार पर केंद्र सरकार का फोकस बढ़ा है। पश्चिम बंगाल पारंपरिक रूप से बड़े औद्योगिक निवेश में पीछे रहा है, और इस संदर्भ में केंद्रीय मंत्री की यह घोषणा राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आगे क्या होगा
फिलहाल इंडस्ट्रियल सिटी की योजना और डेटा सेंटर के लिए स्थान-चयन प्रक्रिया की रूपरेखा सार्वजनिक नहीं की गई है। कारोबारी जगत की नज़र अब इस बात पर है कि वाणिज्य मंत्रालय इन घोषणाओं को ठोस नीतिगत दस्तावेज़ में कब और कैसे बदलता है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक विस्तृत क्रियान्वयन योजना सामने नहीं आती, निवेशक 'प्रतीक्षा करो और देखो' की नीति पर चलेंगे।