जम्मू-कश्मीर: एलजी मनोज सिन्हा ने आतंकी संबंधों के कारण पीडीडी इंस्पेक्टर को बर्खास्त किया, 2019 से अब तक 91 कर्मचारी हटाए
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 18 जून 2026 को पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट (PDD) में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात मोहम्मद शफी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, शफी पर आतंकवादी संगठनों से कथित संबंध होने के आरोप थे। यह इस वर्ष नौकरी से हटाए जाने वाले नौवें सरकारी कर्मचारी हैं।
मुख्य घटनाक्रम
बिजबेहरा के अरवानी गांव के निवासी 51 वर्षीय मोहम्मद शफी का नाम 2017 और 2018 के बीच बिजबेहरा पुलिस स्टेशन में रणबीर दंड संहिता और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज तीन एफआईआर में शामिल था। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने उनकी कथित संलिप्तता का विवरण देते हुए एक डोजियर तैयार किया था।
अधिकारियों के अनुसार, इस डोजियर में विद्रोहियों को लॉजिस्टिकल और वित्तीय सहायता प्रदान करने जैसी गतिविधियों का उल्लेख था। इन्हीं आधारों पर एलजी प्रशासन ने कार्रवाई की।
संवैधानिक प्रावधान और प्रक्रिया
यह बर्खास्तगी संविधान के अनुच्छेद 311(2)(सी) के तहत की गई है, जो उपराज्यपाल प्रशासन को राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में औपचारिक विभागीय जाँच के बिना सरकारी कर्मचारियों को हटाने का अधिकार देता है। गौरतलब है कि यह प्रावधान सामान्य सेवा नियमों की तुलना में कहीं अधिक त्वरित कार्रवाई को संभव बनाता है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 2019 से अपनाई गई इस नीति का उद्देश्य उन सरकारी कर्मचारियों की पहचान करना और उन्हें हटाना है जो कथित तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हानिकारक गतिविधियों में शामिल पाए गए हों।
इस वर्ष की कार्रवाइयाँ
एलजी प्रशासन ने जनवरी 2026 में पाँच सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की थीं, जबकि मार्च में तीन और कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया। इस प्रकार शफी इस वर्ष नौकरी से हटाए जाने वाले नौवें कर्मचारी बने। इससे पहले जनवरी और अप्रैल में एक स्कूल शिक्षक, एक प्रयोगशाला तकनीशियन और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को कथित तौर पर लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे प्रतिबंधित संगठनों से संपर्क बनाए रखने के कारण बर्खास्त किया गया था।
2019 से अब तक का लेखा-जोखा
2019 से अब तक एलजी प्रशासन कथित आतंकी संबंधों और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के आरोप में 91 सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से हटा चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा तंत्र को और अधिक सुदृढ़ करने के प्रयास लगातार जारी हैं।
आगे की दिशा
सुरक्षा और खुफिया एजेंसियाँ अन्य सरकारी कर्मचारियों की जाँच जारी रखे हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह प्रक्रिया तब तक चलती रहेगी जब तक प्रशासनिक ढाँचे से कथित आतंकी संपर्क वाले तत्वों को पूरी तरह हटाया नहीं जाता।