4 अगस्त 2026
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जम्मू-कश्मीर: एलजी मनोज सिन्हा ने आतंकी संबंधों के कारण पीडीडी इंस्पेक्टर को बर्खास्त किया, 2019 से अब तक 91 कर्मचारी हटाए

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जम्मू-कश्मीर: एलजी मनोज सिन्हा ने आतंकी संबंधों के कारण पीडीडी इंस्पेक्टर को बर्खास्त किया, 2019 से अब तक 91 कर्मचारी हटाए

सारांश

जम्मू-कश्मीर में एलजी मनोज सिन्हा की आतंकी-संपर्क विरोधी मुहिम जारी है — पीडीडी इंस्पेक्टर मोहम्मद शफी की बर्खास्तगी इस वर्ष की नौवीं और 2019 से कुल 91वीं कार्रवाई है। अनुच्छेद 311(2)(सी) के तहत बिना विभागीय जाँच के की जा रही ये बर्खास्तगियाँ जम्मू-कश्मीर प्रशासन की सुरक्षा-केंद्रित नीति का स्पष्ट संकेत हैं।

मुख्य बातें

एलजी मनोज सिन्हा ने 18 जून 2026 को पीडीडी इंस्पेक्टर मोहम्मद शफी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया।
51 वर्षीय शफी, बिजबेहरा के अरवानी गांव के निवासी, के खिलाफ 2017-18 में तीन एफआईआर दर्ज थीं।
यह इस वर्ष की नौवीं और 2019 से कुल 91वीं बर्खास्तगी है।
बर्खास्तगी संविधान के अनुच्छेद 311(2)(सी) के तहत, बिना औपचारिक विभागीय जाँच के की गई।
इससे पहले लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन से कथित संपर्क के कारण शिक्षक, तकनीशियन और स्वास्थ्य कर्मचारी भी हटाए जा चुके हैं।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 18 जून 2026 को पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट (PDD) में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात मोहम्मद शफी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, शफी पर आतंकवादी संगठनों से कथित संबंध होने के आरोप थे। यह इस वर्ष नौकरी से हटाए जाने वाले नौवें सरकारी कर्मचारी हैं।

मुख्य घटनाक्रम

बिजबेहरा के अरवानी गांव के निवासी 51 वर्षीय मोहम्मद शफी का नाम 2017 और 2018 के बीच बिजबेहरा पुलिस स्टेशन में रणबीर दंड संहिता और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज तीन एफआईआर में शामिल था। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने उनकी कथित संलिप्तता का विवरण देते हुए एक डोजियर तैयार किया था।

अधिकारियों के अनुसार, इस डोजियर में विद्रोहियों को लॉजिस्टिकल और वित्तीय सहायता प्रदान करने जैसी गतिविधियों का उल्लेख था। इन्हीं आधारों पर एलजी प्रशासन ने कार्रवाई की।

संवैधानिक प्रावधान और प्रक्रिया

यह बर्खास्तगी संविधान के अनुच्छेद 311(2)(सी) के तहत की गई है, जो उपराज्यपाल प्रशासन को राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में औपचारिक विभागीय जाँच के बिना सरकारी कर्मचारियों को हटाने का अधिकार देता है। गौरतलब है कि यह प्रावधान सामान्य सेवा नियमों की तुलना में कहीं अधिक त्वरित कार्रवाई को संभव बनाता है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 2019 से अपनाई गई इस नीति का उद्देश्य उन सरकारी कर्मचारियों की पहचान करना और उन्हें हटाना है जो कथित तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हानिकारक गतिविधियों में शामिल पाए गए हों।

इस वर्ष की कार्रवाइयाँ

एलजी प्रशासन ने जनवरी 2026 में पाँच सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की थीं, जबकि मार्च में तीन और कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया। इस प्रकार शफी इस वर्ष नौकरी से हटाए जाने वाले नौवें कर्मचारी बने। इससे पहले जनवरी और अप्रैल में एक स्कूल शिक्षक, एक प्रयोगशाला तकनीशियन और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को कथित तौर पर लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे प्रतिबंधित संगठनों से संपर्क बनाए रखने के कारण बर्खास्त किया गया था।

2019 से अब तक का लेखा-जोखा

2019 से अब तक एलजी प्रशासन कथित आतंकी संबंधों और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के आरोप में 91 सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से हटा चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा तंत्र को और अधिक सुदृढ़ करने के प्रयास लगातार जारी हैं।

आगे की दिशा

सुरक्षा और खुफिया एजेंसियाँ अन्य सरकारी कर्मचारियों की जाँच जारी रखे हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह प्रक्रिया तब तक चलती रहेगी जब तक प्रशासनिक ढाँचे से कथित आतंकी संपर्क वाले तत्वों को पूरी तरह हटाया नहीं जाता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनमें प्रक्रियागत पारदर्शिता का अभाव एक बड़ा सवाल खड़ा करता है — क्या खुफिया डोजियर की समीक्षा के लिए कोई स्वतंत्र तंत्र मौजूद है? 2019 से 91 बर्खास्तगियों का यह सिलसिला दर्शाता है कि प्रशासन ने इसे एक नीतिगत उपकरण के रूप में स्थापित कर लिया है, परंतु न्यायिक समीक्षा और अपील के अधिकार पर स्पष्टता अभी भी अनुत्तरित है। राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच इस संतुलन पर सार्वजनिक बहस अपरिहार्य है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहम्मद शफी को नौकरी से क्यों हटाया गया?
अधिकारियों के अनुसार, पीडीडी इंस्पेक्टर मोहम्मद शफी पर आतंकवादी संगठनों से कथित संबंध होने के आरोप थे। उनके खिलाफ 2017-18 के बीच बिजबेहरा पुलिस स्टेशन में रणबीर दंड संहिता और शस्त्र अधिनियम के तहत तीन एफआईआर दर्ज थीं।
अनुच्छेद 311(2)(सी) क्या है और यह बर्खास्तगी में कैसे लागू होता है?
संविधान का अनुच्छेद 311(2)(सी) एलजी प्रशासन को राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में औपचारिक विभागीय जाँच के बिना सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त करने का अधिकार देता है। जम्मू-कश्मीर में 2019 से इसी प्रावधान के तहत कथित आतंकी संबंध वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है।
2019 से जम्मू-कश्मीर में कुल कितने कर्मचारी बर्खास्त हुए हैं?
2019 से अब तक जम्मू-कश्मीर प्रशासन कथित आतंकी संबंधों और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के आरोप में 91 सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से हटा चुका है। मोहम्मद शफी इस वर्ष बर्खास्त होने वाले नौवें कर्मचारी हैं।
किन आतंकी संगठनों से संबंध के कारण कर्मचारियों को हटाया गया है?
अधिकारियों के अनुसार, बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में कुछ पर लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे प्रतिबंधित संगठनों से कथित संपर्क के आरोप थे। इनमें स्कूल शिक्षक, प्रयोगशाला तकनीशियन और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी भी शामिल रहे हैं।
सुरक्षा एजेंसियाँ इन कर्मचारियों की संलिप्तता कैसे साबित करती हैं?
सुरक्षा और खुफिया एजेंसियाँ कर्मचारियों की कथित संलिप्तता का विवरण देते हुए डोजियर तैयार करती हैं। इन डोजियर में विद्रोहियों को लॉजिस्टिकल और वित्तीय सहायता प्रदान करने जैसी गतिविधियों का उल्लेख होता है, जिसके आधार पर एलजी प्रशासन कार्रवाई करता है।
राष्ट्र प्रेस
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