क्या जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के साथ संबंध रखने वाले कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हुई?

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क्या जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के साथ संबंध रखने वाले कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हुई?

सारांश

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से संबंध रखने वाले सरकारी कर्मचारियों की बर्खास्तगी ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठाए गए सवालों को फिर से जिंदा कर दिया है। जानें, कौन हैं ये कर्मचारी और किस तरह से इनका संबंध आतंकियों के साथ था।

Key Takeaways

  • आतंकी संबंधों के आरोप में पांच कर्मचारियों की बर्खास्तगी।
  • जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा को लेकर सरकार की सख्ती।
  • कर्मचारियों के आतंकियों से संबंधों की जांच की जा रही है।

जम्मू-कश्मीर, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर में आतंकी संबंधों के आरोप में एलजी मनोज सिन्हा के नेतृत्व वाली सरकार ने पांच सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है। इनमें शिक्षक, लाइनमैन और स्वास्थ्य विभाग का एक ड्राइवर भी शामिल है।

बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में शिक्षक मोहम्मद इश्तियाक, प्रयोगशाला तकनीशियन तारिक अहमद शाह, सहायक लाइनमैन बशीर अहमद मीर, वन विभाग में फील्ड वर्कर फारूक अहमद भट और स्वास्थ्य विभाग में ड्राइवर मोहम्मद यूसुफ शामिल हैं।

मोहम्मद इश्तियाक एक शिक्षक था और उसे रेहबर-ए-तालीम के रूप में नियुक्त किया गया था तथा 2013 में उसे शिक्षक के रूप में स्थायी किया गया था। जांचकर्ताओं ने पाया कि वह पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम करता था और लश्कर कमांडर मोहम्मद अमीन उर्फ अबू खुबैब के साथ नियमित संपर्क में था।

अप्रैल 2022 में उसे जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मरीन में एक घटना को अंजाम देने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। उसके साथी से हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया था।

लैब टेक्नीशियन तारिक अहमद राह को 2011 में एक संविदा लैब टेक्नीशियन के रूप में नियुक्त किया गया था और 2016 में सब-डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल, बिजबेहरा, अनंतनाग में स्थायी किया गया था। वह शुरू में हिजबुल मुजाहिदीन के प्रभाव में आया। तारिक के लिंक उसके चाचा अमीन बाबा के 2005 में पाकिस्तान भागने की राज्य जांच एजेंसी की जांच के दौरान सामने आए।

तारिक ने अमीन बाबा को अनंतनाग में रहने की सुविधा दी और अटारी-वाघा सीमा तक उसके परिवहन की व्यवस्था की। सूत्रों ने बताया, “तारिक ने एक वांछित आतंकवादी के देश से बाहर निकलने को सुनिश्चित किया, जिससे अमीन बाबा इस्लामाबाद पहुंचा और वहां आतंकियों को प्रशिक्षण देने में सफल हुआ।”

सहायक लाइनमैन बशीर अहमद मीर 1988 में पीएचई में शामिल हुआ और 1996 में नियमित हुआ। अपनी भूमिका के बावजूद, वह गुरेज, बांदीपोरा में लश्कर-ए-तैयबा का एक सक्रिय ऑन-ग्राउंड वर्कर बन गया, जो आतंकवादी गतिविधियों का मार्गदर्शन करता था, लॉजिस्टिक्स और पनाह देता था तथा सुरक्षा बलों की जानकारी साझा करता था।

उसकी भूमिका सितंबर 2021 में सामने आई, जब पुलिस ने इनपुट के आधार पर उसके घर पर एक एंटी-टेरर ऑपरेशन चलाया, जिसमें दो लश्कर आतंकवादियों को मार गिराया गया और दो एके-47 व गोला-बारूद बरामद किए गए। इसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया।

वन विभाग के फील्ड वर्कर फारूक अहमद भट ने पहले अनंतनाग में काम किया और हिजबुल मुजाहिदीन का सक्रिय रूप से समर्थन किया। उसने अनौपचारिक रूप से एचएम से जुड़े एक पूर्व विधायक की मदद की। जांचकर्ताओं ने कहा कि उसने तारिक अहमद राह को अमीन बाबा के पाकिस्तान भागने की योजना बनाने में मदद की, अपनी सरकारी आईडी का इस्तेमाल कर चेकपोस्टों को बाईपास किया और उसे अंतरराष्ट्रीय सीमा तक छोड़ा।

स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग में ड्राइवर मोहम्मद यूसुफ 2009 में नियुक्त हुआ और बेमिना, श्रीनगर में तैनात रहा। यूसुफ आतंकवादियों के साथ नियमित संपर्क में था, खासकर पाकिस्तान स्थित हिजबुल मुजाहिदीन हैंडलर बशीर अहमद भट के साथ।

बशीर के निर्देशों पर उसने अपनी आधिकारिक ड्राइवर की स्थिति का उपयोग करते हुए गांदरबल में हथियारों की खरीद, फंड ट्रांसपोर्ट और अन्य लॉजिस्टिक्स के लिए हिजबुल ऑपरेटिव्स से संपर्क किया। उसने पाकिस्तान से बातचीत के लिए जेल में बंद आतंकवादियों को फोन उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क की भी मदद की।

20 जुलाई 2024 को पुलिस ने उसके सहयोगी ईशान हामिद के साथ उसके वाहन को रोका, जिसमें से एक पिस्तौल, गोला-बारूद, ग्रेनेड और पांच लाख रुपए बरामद हुए। पूछताछ में पुष्टि हुई कि यह खेप उसके हैंडलर के निर्देश पर एक आतंकवादी के लिए थी।

Point of View

NationPress
27/03/2026

Frequently Asked Questions

क्यों बर्खास्त किए गए ये कर्मचारी?
इन कर्मचारियों पर पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से संबंध रखने का आरोप है।
इनमें से कौन-कौन से कर्मचारी शामिल हैं?
बर्खास्त कर्मचारियों में शिक्षक, लैब टेक्नीशियन, सहायक लाइनमैन और स्वास्थ्य विभाग का ड्राइवर शामिल है।
क्या सरकार का यह कदम सही है?
हां, यह कदम सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
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