जम्मू-कश्मीर फर्जी नियुक्ति घोटाला: स्वास्थ्य विभाग का सीनियर असिस्टेंट गिरफ्तार, 2017 FIR में EOW की कार्रवाई

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जम्मू-कश्मीर फर्जी नियुक्ति घोटाला: स्वास्थ्य विभाग का सीनियर असिस्टेंट गिरफ्तार, 2017 FIR में EOW की कार्रवाई

सारांश

जम्मू-कश्मीर में फर्जी दस्तावेजों से सरकारी नौकरी पाने के एक पुराने घोटाले में EOW कश्मीर ने स्वास्थ्य विभाग के सीनियर असिस्टेंट शहनवाज अहमद मीर को गिरफ्तार किया है। 2017 की FIR में यह कार्रवाई बताती है कि यह नेटवर्क वर्षों से सक्रिय था और सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचाता रहा।

मुख्य बातें

EOW कश्मीर ने 5 मई 2026 को शहनवाज अहमद मीर को गिरफ्तार किया, जो स्वास्थ्य विभाग में सीनियर असिस्टेंट के पद पर कार्यरत है।
मामला वर्ष 2017 में दर्ज FIR से जुड़ा है; पहले क्राइम ब्रांच कश्मीर में दर्ज था, अब EOW कश्मीर के अधीन।
बशीर अहमद सोफी ने नकली ट्रांसफर ऑर्डर और फर्जी 'लास्ट पे सर्टिफिकेट' से हेल्थ एजुकेटर पद पर नियुक्ति पाई और बारामुला के ब्लॉक शीरी में वेतन उठाया।
अधिकारियों के अनुसार शहनवाज अहमद मीर आदतन आरोपी है; कुछ मामलों में चार्जशीट दाखिल, कुछ में जाँच जारी।
पुलिस पूरे नेटवर्क की जाँच कर रही है; और गिरफ्तारियाँ संभव।

जम्मू-कश्मीर पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) कश्मीर ने 5 मई 2026 को फर्जी नियुक्ति घोटाले से जुड़े एक सरकारी कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी शहनवाज अहमद मीर, श्रीनगर के टंकीपोरा, शहीद गंज निवासी है और स्वास्थ्य विभाग में सीनियर असिस्टेंट के पद पर कार्यरत है। यह कार्रवाई वर्ष 2017 में दर्ज एफआईआर के तहत की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब कश्मीर के डिप्टी डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज की ओर से एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि बडगाम के मझामा निवासी बशीर अहमद सोफी ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए हेल्थ एजुकेटर के पद पर सरकारी नौकरी हासिल की। अधिकारियों के अनुसार, उसने नकली ट्रांसफर ऑर्डर और फर्जी 'लास्ट पे सर्टिफिकेट' प्रस्तुत कर यह नियुक्ति पाई।

मुख्य घटनाक्रम

जाँच में सामने आया कि बशीर अहमद सोफी ने बारामुला के ब्लॉक शीरी में अवैध रूप से नौकरी हासिल की और लंबे समय तक सरकारी वेतन भी उठाया, जिससे सरकारी खजाने को सीधा नुकसान पहुँचा। इसी जाँच के दौरान शहनवाज अहमद मीर की भूमिका उजागर हुई, जिसे अधिकारियों के मुताबिक इस फर्जीवाड़े में सहयोगी या मुख्य कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि यह मामला पहले पुलिस स्टेशन क्राइम ब्रांच कश्मीर में दर्ज था, जिसे अब EOW कश्मीर के रूप में नामित किया गया है। क्राइम ब्रांच जम्मू के अधिकारियों ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है।

आरोपी की आपराधिक पृष्ठभूमि

अधिकारियों ने बताया कि शहनवाज अहमद मीर एक आदतन आरोपी है और इस प्रकार के कई मामलों में उसकी संलिप्तता पहले भी सामने आ चुकी है। कुछ मामलों में जाँच अभी जारी है, जबकि कुछ में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को लेकर सवाल पहले से उठते रहे हैं।

आम जनता और सरकारी तंत्र पर असर

इस घोटाले से स्पष्ट होता है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरी पाना और वर्षों तक वेतन उठाना न केवल योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय है, बल्कि इससे सरकारी खजाने को भी सीधा नुकसान होता है। इस प्रकार के नेटवर्क के उजागर होने से भर्ती प्रक्रिया में और सख्ती की माँग भी उठ रही है।

आगे की जाँच

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जाँच जारी है ताकि इस घोटाले से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान की जा सके और उन्हें कानून के दायरे में लाया जा सके। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ भी संभव हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर फर्जी नियुक्ति घोटाले में किसे गिरफ्तार किया गया है?
EOW कश्मीर ने स्वास्थ्य विभाग के सीनियर असिस्टेंट शहनवाज अहमद मीर को गिरफ्तार किया है, जो श्रीनगर के टंकीपोरा, शहीद गंज के निवासी हैं। उन्हें 2017 में दर्ज FIR के तहत इस फर्जीवाड़े में सहयोगी के रूप में गिरफ्तार किया गया है।
बशीर अहमद सोफी ने किस तरह फर्जी नौकरी हासिल की?
बडगाम के मझामा निवासी बशीर अहमद सोफी ने नकली ट्रांसफर ऑर्डर और फर्जी 'लास्ट पे सर्टिफिकेट' प्रस्तुत कर हेल्थ एजुकेटर के पद पर नियुक्ति पाई। इसके बाद उसने बारामुला के ब्लॉक शीरी में लंबे समय तक सरकारी वेतन भी उठाया।
यह मामला पहले कहाँ दर्ज था और अब किसके पास है?
यह मामला मूल रूप से 2017 में पुलिस स्टेशन क्राइम ब्रांच कश्मीर में दर्ज किया गया था। अब इसे EOW (आर्थिक अपराध शाखा) कश्मीर के रूप में नामित इकाई को सौंपा गया है, जो इसकी जाँच कर रही है।
शहनवाज अहमद मीर की इस घोटाले में क्या भूमिका बताई जा रही है?
अधिकारियों के अनुसार शहनवाज अहमद मीर को इस फर्जीवाड़े में सहयोगी या मुख्य कड़ी माना जा रहा है। वह एक आदतन आरोपी बताए जा रहे हैं और इस प्रकार के कई मामलों में उनकी संलिप्तता पहले भी सामने आ चुकी है।
इस घोटाले की जाँच आगे कहाँ तक जा सकती है?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूरे नेटवर्क की गहराई से जाँच जारी है और इससे जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान की कोशिश हो रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ भी संभव हैं।
राष्ट्र प्रेस
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