श्रीनगर में 4 वांछित आतंकवादियों के पोस्टर जारी, सूचना देने पर मिलेगा नकद इनाम
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 8 नवंबर 2026 को श्रीनगर में चार वांछित आतंकवादियों के पोस्टर सार्वजनिक स्थानों पर लगाए हैं और विश्वसनीय जानकारी देने वाले नागरिकों के लिए नकद इनाम की घोषणा की है। पोस्टरों में इन आतंकियों की तस्वीरें, नाम और पैतृक विवरण अंकित हैं तथा मुखबिरों की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखने का आश्वासन दिया गया है।
किन आतंकवादियों के पोस्टर जारी हुए
पुलिस द्वारा जारी पोस्टरों में चार संदिग्ध आतंकवादियों के नाम दर्ज हैं — बिलाल अहमद मीर (सोपोर), आबिद कयूम लोन (बारामूला), मोहम्मद लतीफ भट (कुलगाम) और मोहम्मद उमर मीर (सोपोर)। पोस्टर पर स्पष्ट लिखा है: 'जो कोई भी इन आतंकवादियों की गतिविधियों/उपस्थिति के बारे में विश्वसनीय जानकारी देगा, सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और विश्वसनीय जानकारी के लिए इनाम दिया जाएगा।'
कहाँ-कहाँ लगाए गए पोस्टर
स्थानीय नेटवर्क पर दबाव बनाने और जनसूचना जुटाने के उद्देश्य से ये पोस्टर श्रीनगर के एम.ए. रोड, नौगाम तथा दक्षिण कश्मीर के प्रमुख स्थानों — पुलवामा, कुलगाम और अनंतनाग — में प्रमुख सार्वजनिक और आवागमन मार्गों पर व्यवस्थित रूप से चिपकाए गए हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस उर्दू और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में पोस्टर जारी करती है।
इनाम की राशि और प्रक्रिया
कार्रवाई योग्य और गोपनीय सूचना के बदले आमतौर पर ₹5 लाख से ₹20 लाख तक का नकद इनाम दिया जाता है। पुलिस ने विशेष हेल्पलाइन नंबर और गुमनाम सूचना चैनल भी उपलब्ध कराए हैं ताकि आम नागरिक बिना किसी जोखिम के जानकारी साझा कर सकें।
पोस्टर अभियान की पृष्ठभूमि
जम्मू-कश्मीर पुलिस हिज़बुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के सक्रिय आतंकियों की पहचान, उनके ठिकानों का पता लगाने और आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए वांछित पोस्टर, लुकआउट नोटिस और सार्वजनिक इनाम घोषणाओं को आतंकवाद-विरोधी रणनीति के रूप में नियमित रूप से इस्तेमाल करती है। यह ऐसे समय में आया है जब घाटी में सुरक्षा एजेंसियाँ आतंकी घुसपैठ और स्लीपर नेटवर्क को लेकर पहले से सतर्क हैं।
गौरतलब है कि पहलगाम हमले जैसी बड़ी सुरक्षा घटनाओं के बाद भी दक्षिण कश्मीर में इसी तरह प्रमुख संदिग्धों के पोस्टर जारी किए गए थे और ₹20 लाख तक के इनाम घोषित हुए थे।
नौगाम में पिछला अनुभव — एक अहम मिसाल
अक्टूबर 2025 में श्रीनगर के नौगाम इलाके में 'कमांडर हंजला भाई' के हस्ताक्षर वाले जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर पुलिस के लिए एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक चेतावनी संकेत साबित हुए। सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण से यह पता चला कि पोस्टर किसने चिपकाए, और इसी से जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक बहु-राज्यीय आतंकी नेटवर्क और विस्फोटक सामग्री के नियोजित भंडारों से जुड़े एक ड्रोन मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया।
यह घटना यह दर्शाती है कि पोस्टर अभियान केवल जन-जागरूकता का साधन नहीं, बल्कि खुफिया जानकारी जुटाने और आतंकी संजाल को उखाड़ने का एक सक्रिय उपकरण भी है। आने वाले समय में सुरक्षा एजेंसियाँ इन चारों संदिग्धों पर मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर त्वरित कार्रवाई कर सकती हैं।