जोधपुर नगर निगम: भाजपा के विजय सिंह पंवार उप महापौर निर्वाचित, कांग्रेस के अब्दुल करीम जॉनी को 4 वोटों से हराया
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पार्षद विजय सिंह पंवार को 26 सितंबर 2026 को जोधपुर नगर निगम का उप महापौर चुना गया। उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी और पूर्व उप महापौर अब्दुल करीम जॉनी को 4 मतों के अंतर से पराजित किया। इस जीत के साथ ही भाजपा ने निगम के दोनों शीर्ष पदों — महापौर और उप महापौर — पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है।
मतगणना और परिणाम
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, पंवार को 52 मत मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी अब्दुल करीम जॉनी को 48 मत प्राप्त हुए। उप महापौर पद के लिए मतदान दोपहर 2:30 बजे प्रारंभ हुआ। पार्षदों के सत्यापन के पश्चात सभी ने नगर कार्यालय में पहुँचकर अपने मत डाले और मतगणना के तुरंत बाद परिणाम घोषित कर दिया गया।
भाजपा की रणनीतिक बढ़त
यह चुनाव परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भाजपा के प्रसन्नचंद मेहता के जोधपुर के महापौर निर्वाचित होने के ठीक एक दिन बाद आया। भाजपा ने नगर निगम चुनाव में कुल 45 सीटें जीती थीं और बाद में 7 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन प्राप्त कर अपनी संख्या 52 तक पहुँचा दी। 101 सदस्यीय सदन में बहुमत का आँकड़ा 51 है, जिसे भाजपा ने पार कर लिया। कांग्रेस के पास 44 पार्षद हैं, जबकि 10 निर्दलीय और एक राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के पार्षद भी निर्वाचित हैं।
सरदारपुरा से दोनों विजेता
गौरतलब है कि नवनिर्वाचित महापौर प्रसन्नचंद मेहता और उप महापौर विजय सिंह पंवार — दोनों सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र से पार्षद हैं। मेहता वार्ड-82 और पंवार वार्ड-98 से विजयी हुए हैं। उल्लेखनीय है कि सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत करते हैं, जो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। भाजपा का उनके गढ़ में यह प्रदर्शन राजनीतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।
पराजित उम्मीदवार का अनुभव
चुनाव हारने वाले अब्दुल करीम जॉनी पाँचवीं बार पार्षद चुने गए हैं और पूर्व में उप महापौर का पद भी संभाल चुके हैं। कांग्रेस ने उन्हें इस उम्मीद से फिर से मैदान में उतारा था कि उनका अनुभव और पहचान बाज़ी पलट सकती है, लेकिन निर्दलीय पार्षदों के भाजपा के पाले में जाने से गणित बदल गया।
आगे की स्थिति
भाजपा के लिए महापौर और उप महापौर दोनों पदों पर काबिज होना जोधपुर में पार्टी की सांगठनिक मज़बूती का संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में भाजपा राज्य सरकार भी चला रही है, जिससे केंद्र और स्थानीय निकाय के बीच नीतिगत समन्वय की संभावनाएँ प्रबल होती हैं। अब सभी की नज़र इस बात पर होगी कि नई निगम नेतृत्व टीम शहरी विकास परियोजनाओं को किस दिशा में ले जाती है।