6 अगस्त 2026
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नागालैंड बाढ़-भूस्खलन: जेपी नड्डा ने मोन जिले का दौरा किया, पीड़ित परिवारों को केंद्र की पूरी मदद का भरोसा

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नागालैंड बाढ़-भूस्खलन: जेपी नड्डा ने मोन जिले का दौरा किया, पीड़ित परिवारों को केंद्र की पूरी मदद का भरोसा

सारांश

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने नागालैंड के मोन जिले में बाढ़ और भूस्खलन से तबाह इलाकों का दौरा किया। 19-31 जुलाई के बीच 341 मिमी बारिश से हुई तबाही के बाद केंद्र ने राहत-पुनर्वास में पूरी मदद का भरोसा दिलाया है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने 5 अगस्त को नागालैंड के मोन जिले में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
19 और 20 जुलाई की भारी बारिश से मोन जिले में विनाशकारी भूस्खलन और बाढ़ आई, कई लोगों की जान गई और अनेक मकान नष्ट हुए।
19 जुलाई को 83.95 मिमी और 19-31 जुलाई के बीच कुल 341 मिमी बारिश दर्ज की गई।
नड्डा ने मृतकों के परिजनों और कोन्याक यूनियन कार्यालय में विस्थापित लोगों से मुलाकात की।
केंद्र सरकार ने राहत एवं पुनर्वास के लिए केंद्रीय टीम के शीघ्र दौरे का आश्वासन दिया।
SDRF , जिला प्रशासन, कोन्याक यूनियन और स्वयंसेवकों के राहत कार्यों की केंद्रीय मंत्री ने प्रशंसा की।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने 5 अगस्त को नागालैंड के मोन जिले में बाढ़ और भूस्खलन से तबाह हुए इलाकों का स्थलीय निरीक्षण किया और प्रभावित परिवारों को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार राहत एवं पुनर्वास में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार इस संकट की घड़ी में नागालैंड सरकार के साथ पूरी तरह समन्वय बनाए हुए है।

मुख्य घटनाक्रम

नड्डा ने असम के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अशोक सिंघल और नागालैंड से राज्यसभा सांसद फांगनोन कोन्याक के साथ मोन टाउन के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने डिफेंस कॉलोनी और तेचा वार्ड के आसपास के बुरी तरह क्षतिग्रस्त इलाकों का जायजा लिया।

केंद्रीय मंत्री ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और कोन्याक यूनियन कार्यालय में शरण लिए विस्थापित लोगों से सीधी बातचीत की। उन्होंने लोगों तक प्रधानमंत्री मोदी का संदेश पहुँचाया और कहा कि इस कठिन समय में वे अकेले नहीं हैं।

केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया

नड्डा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, 'मोन जिले के लोगों के प्रति केंद्र सरकार की गहरी संवेदना और अटूट प्रतिबद्धता व्यक्त करता हूं। राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए हर संभव सहायता दी जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार इस कठिन समय में नागालैंड सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है और यह सुनिश्चित करने के लिए संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है कि हर प्रभावित परिवार को आवश्यक सहायता मिले।'

उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र की एक विशेष टीम राहत कार्यों में सहयोग के लिए शीघ्र ही क्षेत्र का दौरा करेगी।

आपदा की भयावहता

अधिकारियों के अनुसार, 19 और 20 जुलाई को हुई लगातार मानसूनी बारिश के कारण मोन जिले में विनाशकारी भूस्खलन और अचानक बाढ़ आई। इन आपदाओं में कई लोगों की जान गई, अनेक मकान नष्ट हुए और कृषि भूमि को भारी क्षति पहुँची। 19 जुलाई को जिले में 83.95 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि 19 से 31 जुलाई के बीच मोन जिला मुख्यालय के स्वचालित मौसम केंद्र ने कुल 341 मिमी बारिश रिकॉर्ड की — जो मानसून की असाधारण तीव्रता को रेखांकित करती है।

डिफेंस कॉलोनी और आसपास के क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित रहे। कई स्थानों पर सड़क संपर्क बाधित हुआ और कुछ इलाकों में बिजली व पेयजल आपूर्ति भी अस्थायी रूप से ठप हो गई।

स्थानीय प्रयासों की सराहना

नड्डा ने उपायुक्त के नेतृत्व में जिला प्रशासन, कोन्याक यूनियन, कोन्याक स्टूडेंट्स यूनियन और कोन्याक न्युपुह शेको खोंग द्वारा राहत शिविरों में किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), नागरिक संगठनों और स्वयंसेवकों सहित सभी बचाव दलों के प्रयासों को भी सराहा।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत के कई राज्य मानसून की मार झेल रहे हैं और आपदा राहत की माँग लगातार बढ़ रही है। गौरतलब है कि मोन जिला पहले भी भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र रहा है। केंद्र सरकार के स्तर पर राज्य के साथ समन्वय जारी रहने और केंद्रीय टीम के शीघ्र दौरे से प्रभावित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि राहत राशि कितनी जल्दी और किस तंत्र के ज़रिए पीड़ितों तक पहुँचेगी। मोन जैसे दूरदराज़ और भूस्खलन-संवेदनशील जिलों में हर मानसून में तबाही होती है, फिर भी दीर्घकालिक आपदा-रोधी बुनियादी ढाँचे की कमी बनी रहती है। 341 मिमी बारिश का आँकड़ा असाधारण है, लेकिन पूर्वोत्तर में ऐसी 'असाधारण' घटनाएँ अब नियमित होती जा रही हैं — जो केंद्र और राज्य दोनों की आपदा-पूर्व तैयारी पर गंभीर सवाल उठाती हैं।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नागालैंड के मोन जिले में बाढ़ और भूस्खलन कब और क्यों आए?
अधिकारियों के अनुसार, 19 और 20 जुलाई को हुई लगातार मानसूनी बारिश के कारण मोन जिले में विनाशकारी भूस्खलन और अचानक बाढ़ आई। 19 जुलाई को अकेले 83.95 मिमी और 19 से 31 जुलाई के बीच कुल 341 मिमी बारिश दर्ज की गई।
जेपी नड्डा ने मोन जिले में क्या किया?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 5 अगस्त को डिफेंस कॉलोनी और तेचा वार्ड के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने मृतकों के परिजनों से मुलाकात की, विस्थापित लोगों से बातचीत की और केंद्र की ओर से पूरी मदद का आश्वासन दिया।
केंद्र सरकार नागालैंड बाढ़ पीड़ितों की क्या मदद करेगी?
नड्डा ने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार राहत और पुनर्वास कार्यों में कोई कसर नहीं छोड़ेगी और एक केंद्रीय टीम शीघ्र ही क्षेत्र का दौरा करेगी। केंद्र राज्य सरकार के साथ लगातार समन्वय में काम कर रही है ताकि हर प्रभावित परिवार तक सहायता पहुँचे।
मोन जिले में बाढ़ से कितना नुकसान हुआ?
आपदा में कई लोगों की जान गई, अनेक मकान नष्ट हुए और कृषि भूमि को भारी क्षति पहुँची। डिफेंस कॉलोनी और आसपास के क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित रहे, कई स्थानों पर सड़क संपर्क बाधित हुआ और बिजली व पेयजल आपूर्ति भी अस्थायी रूप से ठप हो गई।
राहत कार्यों में कौन-से संगठन शामिल हैं?
राहत कार्यों में जिला प्रशासन, राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), कोन्याक यूनियन, कोन्याक स्टूडेंट्स यूनियन, कोन्याक न्युपुह शेको खोंग और स्थानीय स्वयंसेवक शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने इन सभी के प्रयासों की सराहना की।
राष्ट्र प्रेस
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