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न्यायमूर्ति विक्रम नाथ का आह्वान: करुणा और संवेदनशीलता को दैनिक जीवन में अपनाएं — RMLNLU दीक्षांत 2026

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न्यायमूर्ति विक्रम नाथ का आह्वान: करुणा और संवेदनशीलता को दैनिक जीवन में अपनाएं — RMLNLU दीक्षांत 2026

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने RMLNLU लखनऊ के पंचम दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों से करुणा और संवेदनशीलता को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। 20 वर्षों में 250 से अधिक न्यायिक अधिकारी देने वाले इस संस्थान के मंच से उच्च न्यायपालिका ने कानून के शासन को सुदृढ़ करने का आग्रह किया।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने RMLNLU लखनऊ के पंचम दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित किया।
न्यायमूर्ति नाथ ने कहा — डिग्री मंजिल नहीं, नई यात्रा की शुरुआत है; करुणा और संवेदनशीलता दैनिक जीवन में अपनाएं।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने RMLNLU को विधि शिक्षा में विशिष्ट स्थान देने वाला संस्थान बताया।
अमर पाल सिंह ने बताया — विश्वविद्यालय ने 20 वर्षों में 250 से अधिक न्यायिक अधिकारी दिए।
प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को मेडल एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने 18 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (RMLNLU) के पंचम दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों से करुणा और संवेदनशीलता को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस समारोह में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को मेडल एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ का संदेश

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि डिग्री हासिल करना मंजिल नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि विद्यार्थियों के परिश्रम, समर्पण, अनुशासन और ज्ञान-प्राप्ति के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतिफल है — और यह गर्व केवल विद्यार्थियों का नहीं, उनके माता-पिता, शिक्षकों और संस्थान का भी है।

न्यायमूर्ति नाथ ने कहा कि शिक्षा की वास्तविक परीक्षा विश्वविद्यालय परिसर की दहलीज़ पार करने के बाद शुरू होती है, जब दुनिया की जटिलताएँ और चुनौतियाँ सामने आती हैं। उनके अनुसार, किसी व्यक्ति की सफलता का आकलन इस बात से होगा कि वह दूसरों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव ला सका।

उन्होंने विद्यार्थियों से जिम्मेदार नागरिक बनने और संवैधानिक मूल्यों का पालन करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय से विदा लेते समय संस्थान के मूल्यों को हृदय में और आदर्शों को आचरण में धारण करना आवश्यक है, ताकि इन्हें समाज और देश तक पहुँचाया जा सके।

मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली का उद्बोधन

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने कहा कि देश में विधि शिक्षा के क्षेत्र में RMLNLU का विशेष और विशिष्ट स्थान है। उन्होंने रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश के केंद्र में गुणवत्तापूर्ण विधि शिक्षा सुलभ कराने के उद्देश्य से स्थापित इस संस्थान ने न्यायपालिका, विधि शिक्षा और लोकसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

न्यायमूर्ति भंसाली ने विश्वास जताया कि यहाँ से उपाधि प्राप्त विद्यार्थी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों की उच्च परंपराओं और मानकों को आगे बढ़ाते हुए देश में कानून के शासन को सुदृढ़ करने में सार्थक भूमिका निभाएंगे।

RMLNLU की उपलब्धियाँ: कुलपति का वक्तव्य

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह ने बताया कि संस्थान ने अपने 20 वर्षों की यात्रा में उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों की न्यायिक सेवाओं को 250 से अधिक अधिकारी प्रदान किए हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ से शिक्षित विधि विशेषज्ञ विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं। प्रो. सिंह ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि विधि शिक्षा केवल भौतिक सफलता का माध्यम नहीं, बल्कि समाज सेवा का साधन भी है और इसका उपयोग वंचित वर्गों के कल्याण में होना चाहिए।

समारोह का महत्व और आगे की दिशा

यह ऐसे समय में आया है जब देश में विधि शिक्षा की गुणवत्ता और युवा अधिवक्ताओं की सामाजिक जिम्मेदारी पर व्यापक चर्चा हो रही है। गौरतलब है कि RMLNLU जैसे राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों से निकले स्नातक न्यायपालिका, नीति-निर्माण और कॉरपोरेट विधि — तीनों मोर्चों पर देश की दिशा तय करते हैं। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति भंसाली का यह संयुक्त संदेश उच्च न्यायपालिका की उस व्यापक चिंता को दर्शाता है कि तकनीकी दक्षता के साथ-साथ नैतिक चेतना और सामाजिक संवेदनशीलता भी अनिवार्य है। आने वाले समय में इन स्नातकों के व्यावसायिक आचरण से ही तय होगा कि दीक्षांत मंच से दिए गए ये आदर्श व्यवहार में कितने उतरते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों का पाठ्यक्रम इन मूल्यों को वास्तव में आत्मसात कराता है। देश में शीर्ष विधि स्नातकों का एक बड़ा हिस्सा कॉरपोरेट और कमर्शियल लॉ की ओर जाता है, जबकि वंचित वर्गों को न्याय दिलाने वाली 'पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन' और विधिक सहायता की पहुँच अभी भी सीमित है। 250 न्यायिक अधिकारियों का आँकड़ा प्रभावशाली है, लेकिन यह भी देखा जाना चाहिए कि इनमें से कितने ग्रामीण और अर्ध-शहरी न्यायालयों में सेवारत हैं जहाँ न्याय की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है। मंच से करुणा का आह्वान तब सार्थक होगा जब संस्थान अपनी प्लेसमेंट नीतियों और पाठ्यक्रम में भी इसी संवेदनशीलता को प्रतिबिंबित करे।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने RMLNLU दीक्षांत समारोह में क्या कहा?
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने विद्यार्थियों से करुणा और संवेदनशीलता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया और कहा कि डिग्री मंजिल नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है। उन्होंने जोर दिया कि सफलता का असली माप इस बात से होगा कि वे दूसरों के जीवन में कितना सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
RMLNLU लखनऊ का पंचम दीक्षांत समारोह कब और कहाँ हुआ?
डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ का पंचम दीक्षांत समारोह 17 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में आयोजित हुआ। इस समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
RMLNLU ने अब तक कितने न्यायिक अधिकारी दिए हैं?
कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह के अनुसार, विश्वविद्यालय ने अपने 20 वर्षों की यात्रा में उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों की न्यायिक सेवाओं को 250 से अधिक अधिकारी प्रदान किए हैं। इसके अलावा यहाँ से शिक्षित विधि विशेषज्ञ विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने RMLNLU के बारे में क्या कहा?
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने कहा कि देश में विधि शिक्षा के क्षेत्र में RMLNLU का विशिष्ट स्थान है और इसने न्यायपालिका, विधि शिक्षा और लोकसेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने विश्वास जताया कि यहाँ के स्नातक देश में कानून के शासन को मजबूत करने में सार्थक भूमिका निभाएंगे।
विधि शिक्षा और समाज सेवा का क्या संबंध है?
कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह ने इस दीक्षांत समारोह में स्पष्ट किया कि विधि शिक्षा केवल भौतिक सफलता का माध्यम नहीं, बल्कि समाज सेवा का साधन भी है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इसका उपयोग वंचित वर्गों के कल्याण में होना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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