न्यायमूर्ति विक्रम नाथ का आह्वान: करुणा और संवेदनशीलता को दैनिक जीवन में अपनाएं — RMLNLU दीक्षांत 2026
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने 18 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (RMLNLU) के पंचम दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों से करुणा और संवेदनशीलता को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस समारोह में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को मेडल एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ का संदेश
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि डिग्री हासिल करना मंजिल नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि विद्यार्थियों के परिश्रम, समर्पण, अनुशासन और ज्ञान-प्राप्ति के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतिफल है — और यह गर्व केवल विद्यार्थियों का नहीं, उनके माता-पिता, शिक्षकों और संस्थान का भी है।
न्यायमूर्ति नाथ ने कहा कि शिक्षा की वास्तविक परीक्षा विश्वविद्यालय परिसर की दहलीज़ पार करने के बाद शुरू होती है, जब दुनिया की जटिलताएँ और चुनौतियाँ सामने आती हैं। उनके अनुसार, किसी व्यक्ति की सफलता का आकलन इस बात से होगा कि वह दूसरों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव ला सका।
उन्होंने विद्यार्थियों से जिम्मेदार नागरिक बनने और संवैधानिक मूल्यों का पालन करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय से विदा लेते समय संस्थान के मूल्यों को हृदय में और आदर्शों को आचरण में धारण करना आवश्यक है, ताकि इन्हें समाज और देश तक पहुँचाया जा सके।
मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली का उद्बोधन
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने कहा कि देश में विधि शिक्षा के क्षेत्र में RMLNLU का विशेष और विशिष्ट स्थान है। उन्होंने रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश के केंद्र में गुणवत्तापूर्ण विधि शिक्षा सुलभ कराने के उद्देश्य से स्थापित इस संस्थान ने न्यायपालिका, विधि शिक्षा और लोकसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
न्यायमूर्ति भंसाली ने विश्वास जताया कि यहाँ से उपाधि प्राप्त विद्यार्थी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों की उच्च परंपराओं और मानकों को आगे बढ़ाते हुए देश में कानून के शासन को सुदृढ़ करने में सार्थक भूमिका निभाएंगे।
RMLNLU की उपलब्धियाँ: कुलपति का वक्तव्य
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह ने बताया कि संस्थान ने अपने 20 वर्षों की यात्रा में उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों की न्यायिक सेवाओं को 250 से अधिक अधिकारी प्रदान किए हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ से शिक्षित विधि विशेषज्ञ विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं। प्रो. सिंह ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि विधि शिक्षा केवल भौतिक सफलता का माध्यम नहीं, बल्कि समाज सेवा का साधन भी है और इसका उपयोग वंचित वर्गों के कल्याण में होना चाहिए।
समारोह का महत्व और आगे की दिशा
यह ऐसे समय में आया है जब देश में विधि शिक्षा की गुणवत्ता और युवा अधिवक्ताओं की सामाजिक जिम्मेदारी पर व्यापक चर्चा हो रही है। गौरतलब है कि RMLNLU जैसे राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों से निकले स्नातक न्यायपालिका, नीति-निर्माण और कॉरपोरेट विधि — तीनों मोर्चों पर देश की दिशा तय करते हैं। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति भंसाली का यह संयुक्त संदेश उच्च न्यायपालिका की उस व्यापक चिंता को दर्शाता है कि तकनीकी दक्षता के साथ-साथ नैतिक चेतना और सामाजिक संवेदनशीलता भी अनिवार्य है। आने वाले समय में इन स्नातकों के व्यावसायिक आचरण से ही तय होगा कि दीक्षांत मंच से दिए गए ये आदर्श व्यवहार में कितने उतरते हैं।