UP लोकायुक्त की स्वर्ण जयंती पर CM योगी बोले — शिकायतों का निष्पक्ष और समयबद्ध निस्तारण ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 14 सितंबर 2026 को लखनऊ में उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि लोकायुक्त जैसी संवैधानिक संस्थाओं में जनविश्वास सुशासन की बुनियाद है और प्रत्येक शिकायत का निस्तारण जाति, मत या संप्रदाय से परे केवल मेरिट के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोक सेवकों की जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना 'गुड गवर्नेंस' का लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता।
लोकायुक्त संस्था का महत्त्व
मुख्यमंत्री योगी ने रामचरितमानस की पंक्ति 'प्रभुता पाई काहि मद नाहीं' का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्ता मिलते ही कुछ लोग उच्छृंखल व्यवहार करने लगते हैं — इसीलिए एक ऐसे अंकुश की आवश्यकता है जो मर्यादाओं का पालन सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की असली कसौटी तब होती है जब अंतिम पायदान का नागरिक भी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति विश्वास और गौरव का अनुभव करे।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल संस्था का गठन करना पर्याप्त नहीं — आम नागरिक बेझिझक अपनी समस्या लेकर आए और नियमानुसार उसका समयबद्ध समाधान अपनी आँखों के सामने देखे, यही वास्तविक व्यवस्था है। साथ ही उन्होंने चेताया कि झूठी और निराधार शिकायतें न केवल सिस्टम का समय बर्बाद करती हैं, बल्कि वास्तविक पीड़ितों के न्याय में भी देरी करती हैं।
तकनीक से बदली शिकायतों की तस्वीर
मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि 2017 में सत्ता संभालने के बाद जनता दर्शन में आने वाली लगभग 60 प्रतिशत शिकायतें सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जुड़ी होती थीं। राज्य की करीब 80 हज़ार उचित दर की दुकानों पर ई-पॉस मशीनें लगाने और तकनीकी निगरानी लागू करने के बाद हेराफेरी की गुंजाइश समाप्त हुई है। आज 16 करोड़ लोगों को राशन मिल रहा है और पीडीएस से जुड़ी शिकायतें लगभग शून्य हो गई हैं।
राजस्व विभाग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 2017 में भूमि विवाद, पैमाइश, वरासत और नामांतरण से संबंधित 34 लाख मामले लंबित थे। पिछले साढ़े नौ वर्षों में इन सभी मामलों का समाधान किया गया, हालाँकि इस दौरान 9 लाख नए मामले भी सामने आए। अब प्रत्येक तहसील में कोऑर्डिनेट-आधारित पैमाइश उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे भूमि रिकॉर्ड में हेरफेर की संभावना नगण्य हो गई है।
जनधन और DBT — बिचौलियों का अंत
योगी ने जनधन खातों और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) को सुशासन के सबसे प्रभावी उपकरण बताया। उन्होंने कहा कि पहले वृद्धावस्था और विधवा पेंशन में भी बिचौलिये हिस्सा लेते थे, लेकिन अब 1.10 करोड़ लाभार्थियों को सालाना ₹12,000 सीधे उनके बैंक खातों में भेजे जा रहे हैं — बिना किसी मध्यस्थ या दलाली के।
लोकायुक्त की आवाज़ और सुझाव
लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र ने कहा कि संगठन की 50 वर्षों की यात्रा विश्वसनीयता और जनविश्वास की यात्रा है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि यह राष्ट्रीय चरित्र का प्रश्न है और इसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों को स्मरण कराया कि एक सही निर्णय किसी नागरिक का अधिकार सुनिश्चित कर सकता है, जबकि एक गलत निर्णय पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर सकता है।
उप लोकायुक्त सुरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि लोकायुक्त के पास अधिकांश शिकायतें गाँवों से मनरेगा में फर्जी उपस्थिति, आवास एवं शौचालय आवंटन में कथित भ्रष्टाचार, राशन कार्ड, पेंशन और भूमि अभिलेखों में हेराफेरी से जुड़ी आती हैं। चीनी मिल श्रमिकों का बकाया दिलाने से लेकर स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग की शिकायतों पर भी जाँच और कार्रवाई हुई है।
आगे की राह
मुख्यमंत्री योगी ने सुझाव दिया कि उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन अपनी 50 वर्षों की पूरी यात्रा का दस्तावेज़ीकरण करे — कितने मामले आए, कितनों का निस्तारण हुआ और किन मामलों में क्या कार्रवाई की गई, इसका व्यापक प्रस्तुतीकरण तैयार किया जाए। उन्होंने देशभर के लोकायुक्तों और भारत के लोकपाल को आमंत्रित कर एक बड़े राष्ट्रीय आयोजन की भी पैरवी की, जिसमें श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों पर विचार-विमर्श हो। स्वर्ण जयंती को अगले 50 वर्षों के मज़बूत रोडमैप का प्रारंभिक बिंदु बनाना संगठन की प्राथमिकता होनी चाहिए।