कर्नाटक में स्टिंग ऑपरेशन विवाद: केंद्रीय मंत्री करंदलाजे ने एसआईटी जांच की माँग की, सिद्दारमैया पर लगाया गंभीर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने 19 अक्टूबर 2026 को मैसूरु में मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार सत्ता में बने रहने के लिए कथित तौर पर ब्लैकमेल का सहारा ले रही है। लघु एवं मध्यम उद्यम तथा श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री ने राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाकर किए गए कथित स्टिंग ऑपरेशनों की तत्काल विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की माँग की।
मुख्य आरोप और दावे
करंदलाजे ने दावा किया कि सत्ताधारी दल और राज्य सरकार के भीतर राजनीतिक मामलों को साधने के लिए स्टिंग ऑपरेशनों का कथित तौर पर दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आपत्तिजनक सामग्री वाली कथित सीडी का इस्तेमाल लोगों को डराने-धमकाने के लिए हो रहा है।
सबसे गंभीर आरोप यह था कि पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य सिद्दारमैया को कथित तौर पर इन्हीं स्टिंग ऑपरेशनों का इस्तेमाल करके मुख्यमंत्री पद छोड़ने पर मजबूर किया गया था। हालाँकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
भाजपा की माँग और राजनीतिक दबाव
कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी (BJP) अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने भी मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से आग्रह किया कि स्टिंग ऑपरेशन मामले को गंभीरता से लेकर व्यापक जांच कराई जाए और इसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाया जाए। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पहले से ही कई विवादों के घेरे में है।
करंदलाजे ने सीधे मुख्यमंत्री शिवकुमार को संबोधित करते हुए कहा, 'लोग आप पर उंगली उठा रहे हैं, ऐसे में मामले की एसआईटी जांच कराई जाए।' उन्होंने इस कथित प्रवृत्ति को राज्य के लिए एक कलंक बताया।
पुलिस जांच और यूट्यूब नोटिस
अधिकारियों के अनुसार, कर्नाटक पुलिस स्टिंग ऑपरेशन विवाद और सिद्दारमैया से कथित तौर पर जुड़े एक वीडियो के अपलोड होने की तकनीकी जांच पहले से कर रही है। पुलिस ने यूट्यूब को पत्र लिखकर उस आईपी एड्रेस का विवरण माँगा है जिससे विवादित वीडियो अपलोड किया गया था, साथ ही अपलोडकर्ता की पहचान भी माँगी गई है।
गौरतलब है कि यह विवाद अब कर्नाटक की सीमाओं से बाहर भी चर्चा का विषय बन चुका है। करंदलाजे ने कहा कि अन्य राज्यों के लोग भी सवाल पूछ रहे हैं कि राज्य में आखिर चल क्या रहा है।
आगे क्या होगा
केंद्रीय मंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दोनों की एसआईटी जांच की माँग से राज्य सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ा है। अब यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार इन माँगों पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या कर्नाटक सरकार स्वतंत्र एसआईटी गठन की दिशा में कोई कदम उठाती है।