कर्नाटक स्टिंग ऑपरेशन विवाद: बसवराज बोम्मई ने की सीबीआई जांच की मांग, पुलिस पर जताया अविश्वास
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने 21 अक्टूबर 2026 को हावेरी में मीडिया से बात करते हुए राज्य में चर्चित स्टिंग ऑपरेशन विवाद की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की माँग की। बोम्मई ने आरोप लगाया कि कर्नाटक पुलिस इस मामले में निष्पक्ष जांच करने में सक्षम नहीं है और राज्य की विशेष जांच टीमों (SIT) की विश्वसनीयता पर पहले से ही प्रश्नचिह्न लगे हुए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
हावेरी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बोम्मई ने कहा कि फिलहाल जो जांच चल रही है वह केवल मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की एकल शिकायत पर आधारित है, जिससे यह व्यापक नहीं रह पाती। उन्होंने कहा, 'सिर्फ बयानों से कुछ सामने नहीं आएगा। जांच होनी चाहिए। फिलहाल सिद्दारमैया की ओर से दी गई एक शिकायत के आधार पर जांच चल रही है। इसलिए यह कोई गंभीर या व्यापक जांच नहीं है।'
बोम्मई ने यह भी कहा कि स्टिंग ऑपरेशन में कई व्यक्ति शामिल हैं और विवाद के सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल होनी चाहिए। उनके अनुसार केवल एक संपूर्ण जांच ही तथ्यों को उजागर कर जनता का भरोसा बहाल कर सकती है।
सरकार की प्रतिक्रिया
राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने पहले ही स्पष्ट किया था कि कर्नाटक पुलिस सही ढंग से जांच कर रही है और सीबीआई जांच की कोई आवश्यकता नहीं है। इस पर पलटवार करते हुए बोम्मई ने कहा, 'गृह मंत्री सिर्फ यह कहकर जांच को संतोषजनक नहीं बता सकते। उनके ट्रैक रिकॉर्ड को देखा जाना चाहिए। कर्नाटक पुलिस एसआईटी के ज़रिए जो जांच करती है वह व्यापक नहीं होती और इस मामले में पुलिस के दबाव में आने की भी संभावना है।'
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार कथित तौर पर आंतरिक सत्ता हस्तांतरण की अटकलों से भी जूझ रही है, जिससे इस विवाद का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है।
सिद्दारमैया और सत्ता हस्तांतरण का प्रश्न
जब बोम्मई से पूछा गया कि क्या यह स्टिंग ऑपरेशन राज्य में सत्ता परिवर्तन से जुड़ा है, तो उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने अपने राजनीतिक जीवन में हमेशा एक स्वतंत्र और कभी-कभी बागी रुख अपनाया है। बोम्मई ने कहा, 'उनके राजनीतिक बैकग्राउंड को देखते हुए और सत्ता हस्तांतरण से जुड़े हालात पर गौर करें — खासकर यह देखते हुए कि खुद मुख्यमंत्री ने ही अब यह मुद्दा उठाया है — तो कई सवाल खड़े होते हैं। इन सवालों के जवाब एक उचित जांच के ज़रिए ही मिल सकते हैं।'
स्टिंग ऑपरेशन में कथित ब्लैकमेलिंग के सवाल पर बोम्मई ने कहा कि इस पर स्वयं सिद्दारमैया को स्पष्टीकरण देना होगा।
भाजपा एकता पर बोम्मई का संदेश
गौरतलब है कि BJP से निष्कासित विधायक बसनागौड़ा पाटिल और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र के बीच हुई हालिया मुलाकात पर बोम्मई ने एकता का संदेश देते हुए कहा, 'राजनीति में कोई भी हमेशा के लिए दुश्मन नहीं होता। मेरी नजर में तो कोई दुश्मन होता ही नहीं, बस प्रतिस्पर्धा होती है।'
उन्होंने आश्वस्त किया कि यदि भाजपा एक सुर में आगे बढ़े तो पार्टी को बड़ी जीत मिल सकती है। यह बयान आने वाले विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में BJP की आंतरिक एकजुटता की कोशिशों का संकेत माना जा रहा है।
क्या होगा आगे
कर्नाटक का यह स्टिंग ऑपरेशन विवाद राज्य की राजनीति में लंबे समय तक गूंजता रह सकता है। सीबीआई जांच की माँग को लेकर BJP के रुख के बाद यह देखना होगा कि क्या विपक्ष केंद्र सरकार के समक्ष भी इसे उठाता है। आलोचकों का कहना है कि SIT की विश्वसनीयता पर बार-बार उठने वाले सवाल राज्य की जांच एजेंसियों की स्वायत्तता पर एक बड़ी बहस को जन्म दे सकते हैं।