कर्नाटक: कांग्रेस विधायक एचसी महादेवप्पा ने भ्रष्टाचार के आरोपों को बताया 'राजनीतिक षड्यंत्र', मंत्रिमंडल विस्तार से जोड़ा समय
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के पूर्व सामाजिक कल्याण मंत्री और कांग्रेस विधायक एचसी महादेवप्पा ने बुधवार, 17 जून को अपने विरुद्ध लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें राजनीति से प्रेरित और निराधार करार दिया। यह बयान ऐसे समय आया है जब कर्नाटक में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें ज़ोरों पर हैं।
शिकायत में क्या लगाए गए हैं आरोप
बेंगलुरु के एक निवासी ने कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत को शिकायत सौंपकर महादेवप्पा के मंत्री कार्यकाल से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की स्वतंत्र जाँच की माँग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनके कार्यकाल के दौरान कल्याण निधि का दुरुपयोग, कर्नाटक आवासीय शैक्षणिक संस्थान सोसायटी (KREIS) द्वारा जारी निविदाओं में हेराफेरी, सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ और आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया गया।
गौरतलब है कि ये आरोप अभी तक कथित तौर पर एक नागरिक शिकायत के स्तर पर हैं और किसी जाँच एजेंसी द्वारा इनकी पुष्टि नहीं की गई है।
महादेवप्पा की प्रतिक्रिया
एक लिखित बयान में महादेवप्पा ने कहा, 'सार्वजनिक जीवन में लगभग चार दशकों के बाद मुझ पर लगाए जा रहे आरोप न केवल निराधार हैं, बल्कि हास्यास्पद भी हैं।' उन्होंने कहा, '40 वर्षों से मैंने अपना राजनीतिक जीवन संविधान और बाबासाहेब अंबेडकर के आदर्शों के अनुसार ही चलाया है। अब मुझ पर लगाए जा रहे निराधार आरोपों को सुनकर मुझे केवल हंसी आती है।'
महादेवप्पा ने यह भी स्वीकार किया कि कोई भी जनप्रतिनिधि जाँच से परे नहीं है, लेकिन उन्होंने कहा कि 'आलोचना को दुर्भावनापूर्ण प्रचार, झूठे आरोपों, असहिष्णुता या राजनीतिक षड्यंत्र की सीमा तक नहीं पहुँचना चाहिए।'
मंत्रिमंडल विस्तार से जोड़ा आरोपों का समय
महादेवप्पा ने आरोपों के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि मंत्रिमंडल में फेरबदल या विस्तार की चर्चा के साथ इन आरोपों का समय मेल खाना ही इनके पीछे के इरादे को स्पष्ट करता है। उन्होंने कहा, 'इन आरोपों के पीछे का मकसद इतना स्पष्ट है कि बच्चे भी इसे समझ सकते हैं।'
अंबेडकर के आदर्शों का दिया हवाला
महादेवप्पा ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा, 'संविधान निर्माता ने अपने पूरे जीवन में अपमान सहा, लेकिन राष्ट्र कल्याण के लिए काम करना जारी रखा। उनके आदर्शों का अनुसरण करने वाले व्यक्ति के रूप में, मैं किसी के प्रति द्वेष नहीं रख सकता।'
उन्होंने अपने मंत्री कार्यकाल पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी को मज़बूत करने और जनकल्याणकारी कार्यक्रम लागू करने के लिए काम किया।
आगे क्या होगा
राज्यपाल कार्यालय द्वारा शिकायत पर क्या कार्रवाई होती है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। कर्नाटक में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच यह विवाद राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना रहेगा।